Home Blog

खाली पेट चाय पीने से हो सकते हैं कई नुकशान

0

चाय धीरे -धीरे भारतीय संस्कृति का हिस्सा बन गया है। भारत का कोई ऐसा घर नहीं होगा जहाँ चाय नहीं बनती हो। देश के करीब आधे से ज्यादा लोग सुबह उठने के साथ ही चाय पीना पसंद करते है। चाय पीने का कल्चर न केवल शहरों में बल्क‍ि गांवों में भी प्रचलित है । किन्तु बहुत से लोगों को चाय पीने की लत लग जाती है और वो दिन भर में कई कप चाय पी जाते हैं। अधिक मात्रा में चाय पीना हमारे सेहत के लिए हमेशा नुक्शानदायक होता है मगर समस्या तब और बढ़ जाती है जब लोग सुबह खाली पेट चाय पीने से खुद को नहीं रोक पाते हैं।

सुबह खाली पेट चाय पीने से कई नुकसान तथा कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। हालांकि चाय को सही तरीके और सही मात्रा में पिया जाये तो इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स हमें कई फायदे भी पहुंचाते हैं । आइए आपको सुबह खाली पेट चाय पीने से नुकसान बताते हैं।

Pic: Awaaznation

दूध की चाय पीने से नुकसान

भले ही आप कैसे ही चाय पीएं अगर यह खाली पेट ली गई है यह आपको नुकसान ही होगी और खाली पेट ज्यादा दूध वाली चाय का सेवन करने से सारा दिन थकान तथा स्वभाव में चिड़चिड़ापन बना रहता है। एक और बात चाय में दूध डालते ही एंटीआक्सीडेंट का भी असर ख़त्म हो जाता है।

मिचली होना

रात को सोने के बाद से लेकर सुबह उठने तक हमारा पेट खाली हो जाता है इस दौरान सीधे चाय के पीने से पेट में या फिर श्वास नली में जलन,उल्टी आना या जी मिचलाने की समस्या का एक मूल कारण खाली पेट चाय पीना ही है, इन परेशानियों से बचने के लिए आपको चाय पीने से पहले कुछ खा लेना चाहिए

Pic: telegraph

कई बीमारियों का खतरा – कैफीन की मात्रा शरीर में कॉर्टिसोल यानी स्‍टेरॉयड हार्मोंस को बढ़ा देती है, जिससे शरीर को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।इनमें दिल से संबंधित समस्याएं, डायबिटीज़ व वजन का बढ़ना,नींद की समस्या,ब्लड प्रेशर पर असर पड़ता है, इसलिए खाली पेट चाय नहीं पीना चाहिए।

पेट का ख़राब होना तथा गैस की समस्या – प्रत्येक दिन खाली पेट चाय पीने से पाचन तंत्र का कमजोर होने का एक बड़ा कारण है। खाली पेट चाय पीने से आपकी भूख प्रभावित होती है या भूख लगनी बंद हो जाती है। चाय में दूध का इस्तेमाल होता है चूंकि दूध में लैक्टोज बहुत अधिक मात्रा में होता है इसलिए खाली पेट दूध वाला चाय के सेवन करने पर शरीर को नुकसान पहुंचता है इसके अलावा कई लोगों को गैस, और जलन करने लगती हैं ।

पोषक तत्व की कमी तथा मोटापा बढ़ना – चाय की अधिक मात्रा में पीने से शरीर में प्रोटीन और अन्य दूसरे पोषक तत्वों का अवशोषण ठीक ढंग से नहीं हो पाता है जो शरीर को प्रभावित करती है और जिससे गंभीर बीमारी होने की संभावना हो सकता है। चाय में इस्तेमाल होने वाली पत्ती और चीनी शरीर के अंदर चर्बी बढ़ाने का काम करती है जिससे वजन भी बढ़ जाता है।

Pic: stylecraze

डिहाइड्रेशन – चाय में डाईयूरेटिक गुण पाए जाते है अगर आप सुबह चाय पीते है ये शरीर के लिए उपयोगी नहीं होगा क्योंकि शरीर से मौजूद पानी निकलने के साथ -साथ प्यास लगने की समस्या हो सकती है चूँकि हम जब रात को सोते है तो हमारे शरीर में मौजूद पानी की कमी रहती है इसी के कारण सुबह खाली पेट चाय के पीने से डिहाइड्रेशन होता है। इसलिए ध्यान दें कि सुबह कुछ खाने पर ही चाय पीएं।

जिम गए बिना कैसे रखें खुद को फिट

0

एक स्वस्थ शरीर के लिए एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है। जिन लोगों के पास जिम जाने का समय नहीं है या एक्सरसाइज का समय भी नहीं निकाल पाते हैं, ऐसे में फिट एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए काम के साथ -साथ दूसरी एक्टिविटीज करने से फिट एवं स्वस्थ रह सकते हैं। हम आपको बताते हैं वो फिटनेस टिप्स जिससे जिम के बिना कैसे फिट रहें।

Pic: shawacademy

सुबह जल्दी उठना

बेशक सुबह-सुबह की नींद का मजा ही कुछ और होता है, इस मजे को त्यागने के फायदे भी कुछ बेहतरीन ही हैं। सुबह जल्दी उठ जाने की कोशिश करें और कम से कम 15 मिनट घर पर ही एक्सरसाइज करें। आप अगर हर दिन उसी समय पर व्यायाम करोगे तो जरूर ही कुछ ही दिनों में आपको अपने आप में बदलाव नज़र आएगा। सुबह जल्दी उठने के बाद एक्स्ट्रा टाइम मिल जाता है और उस एक्स्ट्रा टाइम में एक्सरसाइज करके अपने हेल्थ को और भी खुशनुमा बना सकते हैं। अगर आप एक्सरसाइज नहीं करना चाहते हैं तो टहलने के लिए जा सकते हैं।

टीवी देखते समय एक्सरसाइज

जब आप घर में हों और आपके पास कोई काम नहीं है या आप टीवी देख रहे हैं, तो उस समय आप एक्सरसाइज कर सकते हैं। टीवी देखते हुए आप स्‍ट्रेचिंग, योगासन और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज कर सकते हैं। आप मनोरंजन और सेहत का बेहतरीन कॉकटेल बना सकते हैं।

Pic: livingmagazine

अपनी दिनचर्या में बदलाव

व्यायाम करना सेहद के लिए फायदेमंद है और अगर आप एक्सरसाइज नहीं कर पाते हैं, तो अपने स्वस्थ जीवन जीने के लिए थोड़ा बदलाव कीजिए, जिससे शरीर स्वस्थ एवं खुश रह सके। अगर आप कार से ऑफिस जाते हैं, गाड़ी को ऑफिस से थोड़ी दूर पार्क करें, ताकि आप थोड़ा पैदल चल सकें। खाना खाने के तुरंत बाद बैठे नहीं, बल्कि 15 मिनट तक टहलें. इसके अलावा छोटे-मोटे कामों के लिए नजदीक के बाजार जाना हो तो पैदल जाया करें।

Pic: thetab

लिफ्ट का प्रयोग कम करें

आप घर, ऑफिस, मेट्रो, मॉल आदि जहां भी आप लिफ्ट का प्रयोग करते हो, उस जगह में सीढ़ियों का प्रयोग करने की कोशिश करें। अगर आप लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का प्रयोग करेंगे और धीरे-धीरे इसको अपनी आदत बना लेंगे तो पैदल चलकर आप काफी मात्रा में कैलोरी खर्च कर सकेंगे. साथ ही साथ आप स्वस्थ और तन्दुरुत भी रहेंगे।

पर्याप्त मात्रा में पानी पियें

स्वस्थ जीवनशैली के लिए संतुलित आहार और एक्सरसाइज के साथ पानी पीना भी बहुत जरूरी है। पानी पीने से शरीर के जोड़ और उत्तक अच्छे से काम से काम करते हैं और शरीर का तापमान भी सही रहता है और पोषक तत्‍व भी शरीर के सभी हिस्‍सों में पहुंचते हैं। वर्कआउट और चलकर आने के बाद पानी पीने पर विशेष ध्यान दें। पानी को हमेशा बैठकर और आराम से पियें।

प्याज में है गुणों का भंडार

0
Red Onion

प्याज सफेद तथा गुलाबी,देखने में जितना मनमोहक होता है,उतना ही खाने में एक अलग ही स्वाद तथा खुशबू जोड़ देता है। यह खाने की रूचि, पौष्टिकता एवं स्वाद बढ़ाता है और हर तरह के शाही खाने में इसका उपयोग किया जाता हैं। स्वाद के साथ ही प्याज में कई प्रकार के खनिज तत्व एवं विटामिन होते है।जो कि हमारे शरीर के लिए उपयोगी हैं जैसे- फ्लेवोनोइड्स तथा विटामिन बी, विटामिन सी, केल्शियम, ज़िंक, पॉटेशियम, तांबा, फाइबर, सल्फर के यौगिक लोहा और कम केलोरी वाले वसा प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं, आइए आपको बताते हैं प्याज खाने के फायदें

रक्तचाप नियंत्रित तथा कोलस्ट्रोल कम करने में सहायक
प्याज में क्रोमियम (Cr) तत्व होते हैं,प्याज खाने से शरीर में रक्त के मौजूद शक़्कर के मात्रा को घटाता है। इसके सेवन करने से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रैशर), मधुमेह (डायबिटीज) का खतरा भी कम होने के साथ -साथ रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है। नियमित प्याज को सलाद के रूप में खाने से शरीर में बढ़ने वाले कोलेस्ट्रॉल को रोक जा सकता है।

PiC: youtube

संक्रमण कम करे और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए
प्याज प्राकृतिक रूप से एन्टीबायोओटिक, एन्टीसेप्टिक है जो हमेशा ही संक्रमण से दूर रखता है। प्याज में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का गुण होता है इससे शरीर में किसी भी प्रकार की बीमारी लड़ने शक्ति मिलती तथा ये संक्रमण को रोकने में मदद करता है।

Pic: Lifealth

अलसर तथा कैंसर से बचाएं
प्याज में मौजूद फ्री रेडिकल्स पेट में होने वाली परेशानी तथा अलसर से बचाते हैं उसके साथ -साथ गेस्ट्रिक अलसर (पेट में होने वाले छाले) को खत्म करने में बहुत ही लाभदायक है।
प्याज का नियमित रूप से सेवन करने से कैंसर से बचने के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और सभी प्रकार के कैंसर जैसे – कोलोरेक्टल, और ओवरियन कैंसर से भी बचाता है।

त्वचा चमकाए तथा आँखों स्वस्थ

प्याज में भरपूर मात्रा में एन्टीओक्सिडेंट्स, विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन ई होते हैं जो कि त्वचा के लिए लाभदायक होते हैं वही हरे प्याज विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पायी जाती है जो आँखों की परेशानियों को दूर करने तथा शरीर में विटामिन ए की कमी से होने वाली बीमारियों से बचाने मदद करता है ।

Pic: sunset

पाचन शक्ति बढ़ाए
प्याज के नियमित सेवन से शरीर में पाचक रस की मात्रा को अधिक बनाने लगता है,जो की पाचन सही तरिके से होता है प्याज का सेवन से स्वाद तो बढ़ाता ही है साथ ही साथ पाचन शक्ति बढ़ाने में लाभकारी होती है। आदि

प्याज को इस्तेमाल करने का यह है सही तरीका

  • प्याज में कई परतें होती हैं। उसे उपयोग करते समय हमें ध्यान देना है की प्याज का ज्यादा छीलके नहीं उतारना चाहिए। क्योकि प्याज की बाहरी परतों पर अधिक फ्लेवोनोइड्स होता है जो बहुत ही फायदेमंद होते हैं।
  • कहा जाता है सब्जियों को ज्यादा देर तक पकने से उनके पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते है लेकिन प्याज के सूप बनाने के लिए ज्यादा देर तक उबाला जाता है।लेकिन प्याज के पौष्टिक तत्व सूप में सही मात्रा में आए इसलिए सूप को धीमी आंच पर पकाया जाये।और बहुत ही पौष्टिक सूप तैयार हो जाता हैं ।
  • वैसे तो प्याज को कच्चे खाएं या पकाकर खाएं यह तो फायदेमंद ही होता है,परन्तु फिर भी सलाद के रूप में इस्तेमाल करने से हमारे शरीर में अधिक क्यूसेर्टिन आता हैं जो सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।

गर्मियों में बढ़ सकती हैं अस्थमा (दमा) की समस्या

0

वैसे तो अस्थमा ठंड के मौसम में ज्यादा होता है लेकिन गर्मीयो में गर्म हवाओं के साथ -साथ धूलकण और प्रदूषण ने अस्थमा रोगियों के लिए काफी मुशीबत वाला होता है। इस मौसम में कूलर तथा एसी का ज्यादा प्रयोग, आइसक्रीम,और कोल्ड ड्रिंक के ज्यादा इस्तेमाल से भी अस्थमा का प्रकोप बढ़ा सकता है। इसलिए इस मौसम में भी सावधानी बरतनी चाहिए।

Pic: panaceum


अस्थमा क्या है – अस्थमा फेफड़े की बीमारी है, जिसमें वायुमार्ग सिकुड़ जाता है, अस्थमा होने पर इन नलियों में सूजन आ जाती है और गले से काफी अधिक बलगम (कफ) निकलने लगता है। इस बीमारी की वजह से खांसी,गले में घरघराहट, सांस लेने में कठिनाई, बेचैनी महसूस होना, दम घुटने-सा अनुभव होना और दौरा पड़ने पर नलिकाएं बंद हो जाती हैं।अस्थमा के मरीज को अटैक पड़ने पर सांस लेने की दिक़्क़त होती है जो कि कभी कभी जानलेवा भी हो सकता है। आजकल यह बीमारी आम हो गई है अस्थमा मुख्य रूप से दूषित हवा के कारण तथा एलर्जी के बढ़ जाने पर होता है।

Pic: express

क्या है मुख्य वजह अस्थमा के
प्रदूषण और धूलकण – बदलते मौसम और हवाओं में बढ़ रहे प्रदूषण के चलते अस्थमा जैसी बीमारी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में धूल भरी हवाएं और हवा में उड़ते कण अस्थमा रोगियों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। इसे नियंत्रित न कर पाने की स्थिति में यह जानलेवा साबित हो सकता है। प्रदूषण के कारण बच्चों को अस्थमा होने की आशंका ज्यादा होती है तथा इस तरह के मौसम में अस्थमा रोगियों के साथ बहुत ही सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।और समय -समय पर उपचार व परहेज करने पर इसके असर को नियंत्रित कर सकते हैं।

बदलते मौसम के कारण – बदलता मौसम के कारण अस्थमा के मरीजों की तकलीफ बढ़ सकता है । कभी धूप और कभी बारिश की वजह से इंफेक्शन हो सकता है । डॉक्टर के अनुसार गर्मी के मौसम में अस्थमा रोगियों कि दिखातें भी बढ़ सकती हैं।

संक्रमण – गर्मी में प्रदूषण से व्यक्ति के गले व नाक में संक्रमण हो सकता है, जिससे अस्थमा मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है। और मरीज को बड़ी प्रॉबल्म भी हो सकती है।

सर्द -गर्म की समस्या – गर्मी हो या सर्दी दोनों मौसम में व्यक्ति अस्थमा के रोगों से ग्रस्त हो सकता है दरअसल,गर्मी के मौसम में जरा सी भी गर्मी लगने पर एयर कंडीशन या अन्य माध्यम से शरीर को ठंडा रखते है वहीं अस्थमा रोगी के शरीर का तापमान अचानक गर्म होना और अचानक ठंडा होने से सर्द -गर्म होने से शरीर में एलर्जी हो सकती है, जिससे अस्थमा अटैक की संभावना बढ़ सकती है।

Pic: asthma

ठंडी चीजों को खाना – बच्चें अधिकतर बाहर धूप से आने के बाद तुरंत ठंडा पानी आइसक्रीम, बर्फ के गोले व अन्य चीजें खा लेते हैं। गर्मी में ठंडी चीजों की वजह से बच्चों में खांसी, कफ व गले का इंफेक्शन ज्यादा हो जाती है सामान्य बच्चों की अपेक्षा अस्थमा मरीज को इंफेक्शन के कारण सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और दिन में कई बार स्प्रे को यूज करना पड़ता है ।

अस्थमा (दमा) से बचाव-

  • अस्थमा के रोगियों को विशेषकर खाने -पीने में ध्यान देना चाहिए ।
  • तुरंत बाहर से आने के बाद ठंडी चीजों का सेवन न करें ।
  • बाहर निकलने से पहले मुंह पर कपड़ा जरूर बांधे।
  • गले में कफ, बलगम,गरगराहट की आवाज होने पर, सांस लेने में तकलीफ आदि विकार फेफड़े की
    क्रिया को प्रभावित करते हैं। ऐसी स्थिति के होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं ।
  • गर्मी में बच्चों को बचाएं।
  • अस्थमा की दवाई हमेशा अपने साथ रखें ।
  • इंफेक्शन होने पर डॉक्टर को दिखाएं ।

मोटापा क्या है और क्या है इससे बचाव?

0

मोटापा ऐसी बीमारी है जिससे आज लगभग हर पांचवा व्यक्ति जूझ रहा है। मोटापे अपने आप में बहुत बीमारियों को आमंत्रित करता है आज की व्यस्त जीवनशैली, तनाव और खान-पान को लेकर लापरवाही मोटापे का कारण बनता जा रहा है। कुछ लोगों में मोटापा अनुवांशिक हो सकता है जबकि अधिकांश लोगों में खान – पान की गलत आदतों के कारण होता है। आइए जानतें है आखिर मोटापा क्या है? और इसका कारण एवं निवारण क्या है।

मोटापा क्या होता है– मोटापा मनुष्य के शरीर की एक ऐसी स्थिति है जब शरीर में आवश्यकता से अधिक मात्रा में वसा जमा हो जाती है ,जो की हमारे स्वास्थ्य में हानिकारक प्रभाव डालने लगती हैं। सामान्य भाषा में कहा जाता है जब व्यक्ति का वजन सामान्य वजन से ज्यादा हो जाए तो यही मोटापा कहलाता है। मोटापे से अनेक बीमारियां हो जाती है जैसे:डायबिटीज,श्वास की बीमारी ,दिल की बीमारी आदि। यही नहीं मोटापे से कई सारी बीमारियों के होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

Pic: consumerreports

मोटापे का कारण – हमारे दैनिक जीवन में नियमित व्‍यायाम ( योग) नहीं करना या आवस्यकता से कम शारीरिक मेहनत करना। इसके अलावा मोटापे के कारण है जरूरत से ज्यादा खाना जिसमें मसालेदार व तलीभुनी चीजें शामिल हों। इसके एक और अहम् कारण है कि मनुष्य का पर्याप्त नींद न लेना याअत्यधिक नींद लेना। एक स्वस्थ मनुष्य को प्रतिदिन 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। वहीं अत्यधिक शराब का सेवन और विभिन्न तरह की बिमारियों में दवाईयों के सेवन से भी मोटापा बढ़ जाता है।

Pic: nm

मोटापे का लक्षण –
मोटापा शरीर के साथ – साथ आपको भी प्रभावित करता है जो आप सोचते हो की त्वचा पर मोटी परत का होना कोई विशेष बात नहीं है। लेकिन आप ने कभी सोचा भी है कि इससे कई गंभीर परिणाम हो सकती है। तो आइए हम आपको बता दें कि मोटापे का क्या लक्षण है।

  • सांस फूलना
  • ज्यादा पसीना आना
  • खर्राटे लेना
  • आलस्य करना
  • थकान महसूस करना
  • जोड़ो और पीठ में दर्द होना
  • आत्मविश्वास में कमी का अनुभव करना
  • अकेलेपन का अहसास होना
    अगर आपको यह सारे लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेनी चाहिए समय -समय पर फिट रहने के लिए स्वास्थ्य का जाँच करानी चाहिए।
Pic: thenews

मोटापा से कैसे करें बचाव –
अगर आप मोटे हैं और आपका वजन सामान्य से अधिक है तो मोटापे कि इस समस्या को जितना जल्दी हो सके कंट्रोल कर लेना चाहिए। क्योंकि मोटापे के कारण शरीर का वजन तो बढ़ता ही है परन्तु साथ ही साथ अनेक बीमारियां भी शरीर को घेर लेती हैं। इसके लिए निम्नलिखित उपाय पर ध्यान देना चाहिए।

  • सबसे जरूरी बात बाहर का तला भुना खाना बिलकुल बंद कर दीजिये और घर का सादा और संतुलित भोजन करना प्रारम्भ कर दीजिये।
  • फ़ास्ट फ़ूड और पैकेट फ़ूड को बिलकुल ही कम मात्रा में लें।
  • सुबह का नाश्ता टाइम पर करें, दोपहर का खाना भी समय से खाएँ और रात का भोजन सोने से 2 घंटा पहले खा लें
  • खाने को एक ही बार ठूस-ठूस कर नहीं खाएं और अपने दिनभर के आहार को पांच हिस्सों में बाँट लें।
  • फल और हरी सब्जियों को अपने भोजन में शामिल करें।
  • व्यायाम,योग,मोर्निंग या इवनिंग वाक जो भी आपके लिए उचित लगें। इसे अपनी रोजमर्रा की जिन्दगी का हिस्सा बना लें ।
  • हमेशा सुबह की शुरआत पानी गर्म से करें।

एड्स और उससे बचाव के तरीके

0

पिछले दशकों में एड्स का नाम सबसे खौफनाक बीमारी के तौर पर दर्ज है। यह किस आलम तक खतरनाक है, यह आप इस बात से ही समझ सकते हैं कि अभी तक इसका किसी भी प्रकार का इलाज संभव नहीं हो सका है। ऐसा नहीं है कि केवल एड्स ही एकमात्र खतरनाक बीमारी है, बल्कि कैंसर जैसी और खतरनाक बीमारियां भी हैं, लेकिन उनका इलाज कहीं ना कहीं संभव है और मरीज को एक उम्मीद सी बनी रहती है। लेकिन एड्स हो जाने की स्थिति में मरीज की उम्मीद ही खत्म हो जाती है और वह अपने अंत समय के लिए घड़ियां गिनता रह जाता है।

बहरहाल इससे बचाव के लिए ‘वर्ल्ड ऐड्स वैक्सीन डे’ प्रत्येक साल 18 मई को आयोजित किया जाता है और इस अवसर पर लोगों को जागरूक किया जाता है। बहुत सारे लोग इसके बारे में जानते भी हैं किंतु इतने खतरनाक रूप के बारे में जागरूकता लगातार फैलानी चाहिए ताकि जरा सी भी असावधानी न रह जाए।

Pic: themix

एड्स के कारणों के बारे में अधिकांश लोग जानते ही हैं और यह बिना प्रोटेक्शन के किसी के साथ सेक्स करने की स्थिति में सबसे ज्यादा फैलता है। बेहद आवश्यक है कि जब भी आप किसी अनजान के साथ संभोग करें तो पूरी तरह से प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करें। इसीलिए आप देखते होंगे कि वेश्यावृत्ति करने वाले क्षेत्रों में कंडोम का बड़े स्तर पर प्रचार प्रसार किया गया है। वैसे इस तरह के असुरक्षित सेक्स से बचना चाहिए और अब तो यह ट्रेंड चला है कि शादी से पहले लोग एक दूसरे का एचआईवी टेस्ट कराने लगे हैं।

बदलते जमाने के हिसाब से इसे बिल्कुल भी गलत नहीं मानना चाहिए।

इसी प्रकार से दूसरा बड़ा कारण है सिरिंज या सुई का बार-बार इस्तेमाल करना। इससे भी संक्रमण फैलता है, खासकर तब इसकी संभावना ज्यादा हो जाती है जब किसी एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति में प्रयोग की गई सुई आप किसी स्वस्थ व्यक्ति को इंसर्ट करते हैं। ऐसे में बेहद आवश्यक है कि जब कहीं भी डॉक्टर के पास या किसी टैटू गुदवा ने वाले के पास आप जाएं तो फ्रेश सुई के इस्तेमाल के प्रति निश्चिंत हो लें। हालांकि वर्तमान में तमाम डॉक्टर जागरूक होने लगे हैं किंतु एक नागरिक के तौर पर आपको भी इन चीजों का ध्यान रखना चाहिए।

Pic: homenaturalcures

एड्स फैलने के अन्य कारणों में संक्रमित योनि स्राव, वीर्य और खुले घाव का संपर्क मुख्य माना जाता है। अगर कोई औरत संक्रमित है और वह अपने बच्चे को जन्म देते हुए दूध पिलाती है तो उसे भी यह बीमारी फैल सकती है। इसीलिए आजकल प्रेग्नेंट महिलाओं का एचआईवी टेस्ट अनिवार्य होने लगा है।

Pic: ercare24

बचाव के तरीके अजमाना एड्स के लिए थोड़ा लाभदायक है हालांकि अगर इसका वायरस शरीर में हावी हो गया तब इसे कंट्रोल करना लगभग नामुमकिन सा ही है। एड्स के उपचार में एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी और इसी से संबंधित दवाइयां प्रयोग में लाई जाती हैं। सबसे बड़ी बात होती है, यह दवाइयां भी वायरस को खत्म नहीं करती हैं, बल्कि उसके प्रभाव को कुछ हद तक सीमित कर देती हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की कोशिश करती हैं। जैसा कि हम सबको पता है कि एड्स कोई अलग रोग नहीं है बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को यह समाप्त कर देता है और कोई भी रोग अगर आपको होता है ऐसी स्थिति में वह ठीक ही नहीं होता है। तो जाहिर तौर पर इससे बचने और इसके प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास जारी रहना चाहिए। क्योंकि अगर आप एड्स से सुरक्षित रहना चाहते हैं तो इससे बचाव और इसका उपचार बेहद आवश्यक है।

गर्मियों में अदरक क्यों नहीं खाना चाहिए?

0

अदरक एक ऐसे मसाले के तौर पर यूज किया जाता है जो स्वाद बढ़ा देता है, खासकर चाय में अदरक के दीवानों की संख्या कम नहीं है। कई जगह पर तो चाय अदरक के बिना बनती ही नहीं है और कई लोग ऐसे भी हैं जो मसालेदार खानों में अदरक का सेवन भरपूर मात्रा में करते हैं। वैसे तो अदरक लाभदायक भी है किंतु बात जब गर्मियों की होती है तब मामला थोड़ा बदल जाता है। अगर गर्मियों में भी आप अदरक का ढ़ेर सारा सेवन करते हैं तो यह आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। आइए देखते हैं कैसे-

गैस्ट्रोइनटेस्टाइनल से हो जाएंगे परेशान
गर्मियों में अदरक का ज्यादा सेवन करने से आपके हेल्थ पर नेगेटिव इंपैक्ट पड़ना स्वाभाविक है। बताया जाता है कि अदरक के अधिक सेवन से दस्त और हार्टबर्न जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त शरीर में भारी मात्रा में एसिड जमा हो जाता है और जाहिर तौर पर इसे एसिडिटी और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल जैसी समस्या स्वाभाविक रूप से होती है।

गाल ब्लैडर की बड़ी समस्या
आपको यह जानकर आश्चर्य लगेगा, लेकिन अदरक का अधिक मात्रा में सेवन करने से यह पित्त की थैली में समस्या बढ़ा देता है। गर्मी में अत्यधिक अदरक खाने से पित्तस्राव बढ़ जाता है और अगर पित्ताशय का रोग है तो इससे पीड़ित लोगों को और भी समस्या होती है। लेडीस को खासतौर पर गर्मियों में अदरक से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह गर्भपात तक कर सकता है।

Pic: healthline

कब्ज
जाहिर तौर पर अदरक गर्म तासीर का होता है और एसिडिटी इससे बढ़ती ही है। इसके ज्यादा सेवन से सीने में जलन और कब्ज इस के सामान्य लक्षण हैं, तो इससे ग्लाइसीमिया की शिकायत होने की संभावना भी बढ़ जाती है। गर्मियों में अदरक का सेवन उन रोगियों के लिए घातक हो जाता है जो खून के थक्के को रोकने के लिए दवा ले रहे होते हैं। निश्चित रूप से यह खून को पतला भी करता है।

कम रक्तचाप होना
जी हां! अगर आप अदरक की चाय भारी मात्रा में पीते हैं तो आपका ब्लड प्रेशर कम हो जाता है और अगर आप पहले से ही लो ब्लड प्रेशर का सामना कर रहे होते हैं तब भारी मात्रा में आपका ब्लड प्रेशर कम हो जाता है और ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर का चक्कर लगाना पड़ सकता है।

तो गर्मियों में अदरक के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है और इसके वाजिब कारण भी आपको समझ आ गए होंगे। हां आप कम मात्रा में अपने स्वास्थ्य की जरूरतों के अनुसार इसका प्रयोग अवश्य कर सकते हैं, किंतु गर्मियों में इससे बचें तो ज्यादा बेहतर होगा।

खराब नींद और मेंटल हेल्थ का अंतर्संबंध

0

खराब नींद आपके मानसिक स्वास्थ्य को बरबाद कर सकती है। यह बात कई शोध में साबित हो चुकी है। अगर आपका मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है तो आप यह बात जान लें कि आप कोई भी कार्य ढंग से नहीं कर पाएंगे। खराब नींद के कई मायने होते हैं और आखिर यह किस प्रकार आपके मानसिक स्वास्थ्य को डिस्टर्ब कर सकता है, आइए देखते हैं।

स्लीप एक जानी-मानी पत्रिका है और इसमें नींद पर एक शोध हुआ था। इस शोध में तकरीबन 165 लोग शामिल किए गए थे जिनकी उम्र 31 वर्ष तक थी। इसमें 52% पुरुष शामिल थे। खास बात यह है कि यह लोग 2010 में आए भूकंप की वजह से अपना घर खो चुके थे और उसके बिना जीवन बसर कर रहे थे। नींद की गड़बड़ी तीन लोगों में बड़े स्तर पर पाई गई और यह शोध किया न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी के जु़डिक ब्लैंक ने। जाहिर तौर पर परिणाम बेहद निराशाजनक थे।

इन लोगों में पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) जैसे लक्षण पाए गए और कई लोगों में तो अवसाद और डिप्रेशन तक देखा गया था। निश्चित रूप से जो लोग सो नहीं पाते थे वह तनाव में रहते थे और यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि तनाव, मानसिक-स्वास्थ्य से सीधा जुड़ा होता है। उपरोक्त शोध से यह भी निष्कर्ष निकाला गया कि अगर आपके सामने कोई बड़ी समस्या आई हो तो उसका असर लंबे समय तक रहता है और निश्चित रूप से ऐसे में नींद-संबंधी तमाम परेशानियां आपको हो सकती हैं।

Pic: healthline

इस शोध से इतर भी देखें तो नींद न आने से चिड़चिड़ापन होना सामान्य सी बात है। कई लोग कम नींद की वजह से इतने परेशान होते हैं कि उनको डॉक्टर तक को दिखाने की आवश्यकता पड़ जाती है। निश्चित रूप से अगर आप ऐसी किसी समस्या का सामना कर रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेने में जरा भी कोताही नहीं करनी चाहिए।

हालांकि बेहतर यह है कि आप 6 से 8 घंटे की नींद प्रतिदिन अवश्य लें और उस दौरान आपके आसपास का माहौल शांत हो। यह ज्यादा आवश्यक है! कई बार क्या होता है कि 6 से 8 घंटे अब बेड पर लेटे जरूर होते हैं, लेकिन नींद आपकी आंखों से दूर होती है। वहीं कई बार ऐसे लोगों को भी देखते होंगे जो चार-पांच घंटे में ही अपनी नींद पूरी कर लेते हैं।

Pic: angrybirdsriogame

निश्चित रूप से यह एकाग्रता का प्रतिफल है। स्मार्टफोन युग में जिस प्रकार से लोगों के बिस्तर तक में यह घुस चुका है वह अपने आप में चिंता का विषय है। आज लोग दिन भर स्मार्टफोन से तो चिपके ही रहते हैं किंतु जब वह बिस्तर में जाते हैं तब भी वह घंटों तक टाइम पास करते हैं। इसे टाइमपास ही कहा जाएगा, हालांकि मनोरंजन के नाम पर थोड़ा टाइम बिताना और एक लंबे समय तक स्मार्टफोन से चिपके रहना इन दोनों में खासा फर्क है।

जाहिर तौर पर ऐसी स्थिति में आपको नींद कम आती है और आपको बेचैनी घेरी रहती है, जिसका परिणाम अंततः आपके मेंटल हेल्थ पर पड़ता है। इसके अतिरिक्त आप को वह सारे जतन करने चाहिए, जिससे आपकी नींद पूरी हो, ताकि आपका मानसिक स्वास्थ्य उत्तम बना रह सके।

Pic: sleepjunkies

इन उपायों में यह भी कहा जाता है कि सोने से पहले कम से कम 4 से 6 घंटे तक शराब नहीं पीना चाहिए, क्योंकि अल्कोहल की मात्रा आपकी नींद तुरंत तोड़ देती है। इसी प्रकार बिस्तर पर जाने से 4 से 6 घंटे पहले काफी, चाय, सोडा, चॉकलेट इत्यादि लेने से परहेज करें।

जाहिर तौर पर एक्सरसाइज करना जरूरी है लेकिन बिस्तर पर जाने से ठीक पहले ऐसा ना करें। बिस्तर आपका आरामदायक होना चाहिए और सोने से ठीक पहले गर्म दूध और केले लेने से आपको नींद अच्छी आती है। किंतु यह आवश्यक है कि अगर आप अपने मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखना चाहते हैं तो किसी भी स्थिति में बेहतर नींद लेने का जतन करें।

हाई ब्लड प्रेशर और घरेलू उपचार

0

ब्लड प्रेशर की समस्याएं आज के समय में आम हो गई हैं और अगर इस समस्या को अनदेखा किया जाता है तो यह दिल की बीमारियों में परिवर्तित हो जाता है। इसके अतिरिक्त चिड़चिड़ापन और तनाव इस समस्या में आम है। इसीलिए समय रहते इस समस्या पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके लिए न केवल आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए बल्कि घरेलू उपचारों को भी आजमाना चाहिए जिनका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता।

आइए देखते हैं घर पर आप किस प्रकार से हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के तरीके आजमा सकते हैं-

लहसुन हाई ब्लड प्रेशर की समस्या में रामबाण हो सकता है। इसे आप सुबह खाली पेट चबा चबा कर एक गिलास पानी के साथ निगल लें। अगर आपको चबाने में समस्या आ रही है तो आप इसे निगल भी सकते हैं या फिर इसका रस निकाल कर थोड़ा पानी (20 से 25 एम एल) के बीच मिलाकर पी सकते हैं।

Pic: newsvaani

लहसुन की भांति ही अजवाइन और मेथी भी हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए बेहद उपयोगी है। इसके लिए आपको एक स्पून मेथी और अजवाइन पाउडर को पानी में भिगोकर रखना पड़ेगा और सुबह आप इस पानी को पी लें तो आपकी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी।

हाई ब्लड प्रेशर रोगियों को अपने शरीर की मालिश भी करानी चाहिए ताकि ब्लड सरकुलेशन बेटर ढंग से शरीर में हो सके। जब आपका ब्लड सरकुलेशन सही होता है तो आपको उच्च रक्तचाप नियंत्रित करने में खासी मदद मिलती है। इसीलिए 1 सप्ताह में कम से कम चार से पांच बार आप पूरे शरीर पर तेल से मालिश कराने की कोशिश करें।

Pic: geckomassage

व्यायाम और खासकर प्राणायाम उच्च रक्तचाप में बेहद लाभकारी होता है। आप टेलीविजन पर या फिर यूट्यूब पर भी कई ऐसे प्राणायाम आसनों को देख सकते हैं जो हाई ब्लड प्रेशर में आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं।

इसी प्रकार खानपान में आपको सावधानी रखनी पड़ेगी और हाई ब्लड प्रेशर पेशेंट्स को भोजन में नमक कम ही खाना चाहिए। अगर नमक की मात्रा भोजन में ज्यादा होगी तो हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ेगा, इसीलिए इसे बेहद नियंत्रित मात्रा में इस्तेमाल करें।

दूध में दालचीनी और हल्दी मिलाकर अगर आप इसका नियमित सेवन करते हैं तो हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से निजात पाने में आपको निश्चित रूप से मदद मिलेगी।

Pic: medicalnewstoday

एक और उपचार के तहत आप त्रिफला का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको 20 से 25 ग्राम त्रिफला पानी में भिगोकर रात भर के लिए रखना पड़ेगा, फिर सुबह होने पर इसमें 2 चम्मच पानी मिलाकर आप इसका सेवन करें और इस तरीके से आप हाईब्लड प्रेशर की समस्या से राहत पा सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको अपनी लाइफ स्टाइल में सकारात्मक बदलाव भी करना चाहिए जैसे आप समय से सोएं और पर्याप्त नींद लें। इसके अतिरिक्त योगा को भी अपनी जीवनशैली में स्थान दें और इस तरीके से हाई ब्लड प्रेशर को आप हरा सकेंगे।

क्या है हाइपरटेंशन और कितना जानते हैं आप इसके बारे में?

0

हाइपरटेंशन नाम सुनकर कई लोगों को ऐसा लगेगा कि यह कोई साधारण सी बीमारी होगी या कोई तनाव का दूसरा रूप होगा। किंतु आप को इस लेख से पहले ही बता दें कि हाइपरटेंशन के रोगियों में हार्ट अटैक का खतरा सबसे ज्यादा होता है। सिर्फ इसी से आप इसकी गंभीरता का अंदाजा लगा सकते हैं! वास्तव में हाइपरटेंशन होता कैसे है और इससे बचाव के क्या कारण हो सकते हैं और इसके लक्षण क्या होते हैं, आइए देखते हैं।

सच कहा जाए तो हाइपरटेंशन के पीछे सबसे बड़ा कारण होता है अनियंत्रित खानपान और तनाव। निश्चित रूप से यह किसी भी व्यक्ति में हो सकता है और इसके पीछे कोई भी कारण हो सकता है। हाइपरटेंशन में मैक्सिमम हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है जिससे आप की नसों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। इसकी वजह से दिल की धड़कन तेज होने लगती हैं। जाहिर तौर पर इसका सबसे ज्यादा नुकसान आपके हृदय पर होता है।

Pic: medicalxpress

वास्तव में हाइपरटेंशन के कई कारण हो सकते हैं जिसमें कम नींद लेना, अत्यधिक गुस्सा करते रहना, नॉनवेज खाते रहना, ज्यादा ऑइली खाना और मोटापा इत्यादि शामिल हैं। पर एक बार जब आपको हाइपरटेंशन की प्रॉब्लम शुरू हो जाती है तो फिर यह घटने की बजाय बढ़ने ही लगती है।

हाइपरटेंशन के लक्षणों की बात करें तो सबसे बड़ा लक्षण है कि इस के पेशेंट को सांस लेने में तकलीफ होती है और इसके अतिरिक्त पेशेंट के सिर के पीछे और गर्दन में काफी दर्द रहने लगता है। यह सब शुरुआती लक्षण हैं, किन्तु जैसे जैसे समय निकलता है, वैसे वैसे मरीज को धुंधला दिखने लगता है, साथ ही पेशाब के साथ खून तक निकलने लगता है।

Pic: healthline

इसी तरह आगे लक्षणों की बात की जाए तो थकान और सुस्ती के साथ सिर चकराना इसमें आम बात है। निश्चित रूप से रात में नींद ना आने की समस्या भी होने लगती है और इसी वजह से दिल की धड़कनें भी बढ़ जाती हैं।

Pic:webmd

हाइपरटेंशन से बचने के लिए आपको अपनी जीवनशैली नियमित करने की जरूरत पड़ती है। इसी के साथ अगर आप अपनी लाइफ स्टाइल में योग और प्राणायाम को शामिल करते हैं, आयली खाना कम करते हैं और पर्याप्त नींद लेते हैं तो निश्चित रूप से आपको इसमें मदद मिल सकती है। लेकिन जैसे-जैसे समस्या बढ़ती है तो आप डॉक्टर से सलाह लेने में कतई परहेज न करें।

बच्चों के दिमाग को तेज करने के घरेलू उपाय!

0

आजकल की बदलती जीवनशैली का सबसे ज्यादा असर अगर किसी पर पड़ा है तो वो हैं बच्चे!

असंतुलित खानपान और असंयमित जीवनचर्या ने एक तरफ जहाँ बच्चों का स्वास्थ्य बिगाड़ा है तो दूसरी तरफ बच्चों के दिमाग पर भी ख़ासा असर पड़ा है। आपने अक्सर सुना होगा कि बच्चा पढ़ता तो है लेकिन उसे चीजें याद नहीं रहती हैं। सच कहा जाए तो बच्चों के शारीरिक विकास के लिए जिस प्रकार के संतुलित भोजन की जरुरत होती है उसी प्रकार से मानसिक विकास के लिए भी सही डाइट और दिमागी कसरत की आवश्यकता होती है।

आज हम कुछ घरेलू नुस्खें बताएँगे जिससे बच्चों का दिमाग तेज होगा तो उसकी याददाश्त भी बढ़ेगी।

बच्चों के दिमाग को विकसित और बुद्धिमान बनाने के लिए हमें उनके साथ छोटे -मोटे दिमागी खेल खेलना चाहिए। आजकल बाजार में अनेकों खिलौने भी आ रहे हैं, जिससे ब्रेन एक्टिव होता है। इसलिए उन्हें उम्र के मुताबिक माइंड गेम्स खेलने को दें तथा उनके साथ समय निकालकर आप भी खेलें।

बच्चों के साथ प्यार व दुलार से व्यवहार करें। शोधकर्ताओं के मुताबिक जो औरत अपने नवजात बच्चे के साथ अधिक प्यार और दुलार के साथ व्यवहार करती है उनके बच्चों के दिमाग के हिप्पोकेंपस एरिया में ज्यादा मात्रा में नर्व कोशिकाएं बनती हैं। इसी वजह से इन बच्चों का दिमाग तेज हो जाता है। माना जाता है कि जिन बच्चों को अपनी मां से लगाव होता है, उनके दिमागी विकास पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।

Pic: fashionbhaskar

बच्चों के दिमाग के विकास के लिए संतुलित, पौष्टिक आहार देना बहुत महत्वपूर्ण है। आप बच्चों के मील में दूध, हरी सब्जियां, अंडे, फल और मेवे आदि अनेक खाद्य- पदार्थों को शामिल करें। बच्चों को प्र्त्येक दिन सुबह भीगे हुए 2 से 3 बादाम खाने को दें, बादाम खाने से याद्दाशत बढ़ती है। अपने बच्चों को बाहर का खाना जैसे फास्ट फ़ूड या जंक फूड कम से कम खिलाएं।

बच्चों को पोषक खाद्य -पदार्थों के अलावा उन्हें पर्याप्त नींद की जरूरत होती है। पर्याप्त नींद के कारण बच्चों की याददाश्त बढ़ती है। इसलिए कम से कम 1 घंटा दिन में भी सुलाने की कोशिश करें।

नवजात बच्चे के लिए मां के दूध को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। दूध से अच्छा कोई भी दूसरा आहार नहीं होता है। स्तनपान कराने से बच्चों को गंभीर बीमारियों होने की संभावना कम होती है तथा दिमागी विकास के लिए मां का दूध फायदेमंद होता है।

Pic: tarotgyan

आप अपने बच्चे को दूध में हल्दी का पाउडर मिलाकर पिला सकते हैं। हल्दी में कुरकुमीन रसायन की मात्रा पायी जाती है जो दिमाग को एक्टिव और स्वस्थ रखने के साथ कैंसर जैसे रोगों के इलाज में असरदार होती है।

बच्चों के भोजन में दही शामिल करें, किसी भी तरह के तनाव को दूर रखने में इससे फायदा होता है।
निःसंदेह ही इन घरेलू नुस्खों का आपके बच्चे के दिमाग पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

नवजात शिशुओं के पेट में होने वाली परेशानियों को कैसे दूर किया जाएं?

0

आमतौर पर यह बात सब जानते हैं कि नवजात बच्चों का पालन-पोषण करना कोई आसान काम नहीं है। छोटे बच्चों की पाचन-क्रिया बहुत ही नाजुक एवं संवेदनशील होती है। इसीलिए शिशुओं के खानपान में एक छोटी सी गलती या छोटा सा बदलाव नवजात शिशु की पाचन-क्रिया को प्रभावित कर सकती है। खासकर महिलाएं जब नयी -नयी माँ बनती हैं, तो ऐसे में माताएं अपने नवजात शिशु के स्वास्थ्य के प्रति हमेशा काफी चिंतित रहती हैं।

छोटे शिशुओं में जो आम समस्या आती है वो है पेट में दर्द, पेट में मरोड़, बुखार आना, उल्‍टी-दस्‍त (डायरिया) कब्‍ज, गैस तथा नवजात शिशु का बार-बार रोना आदि।

शिशु के पाचन तंत्र की समस्‍याओं के लिए कुछ घरेलू उपाय प्रस्तुत हैं…

Pic: babycenter

स्तनपान करवाने की तरीका
ध्यान रहें नवजात शिशु को स्तनपान कराते समय सिर हमेशा पेट से अधिक ऊंचा होना चाहिए। यह शिशु को दूध पिलाने का अच्छा तरीका है, इससे दूध आसानी से पेट में चला जाता है। इससे शिशु के पाचन तंत्र, गैस या एसिड की समस्या भी नहीं होती है। पर आप बच्चे को बिस्तर पर लेट कर दूध न पिलाएं, बल्कि हमेशा उनको अपने गोदी में बिठाकर दूध पिलाएं।

शिशु की मालिश
आप अपने छोटे बच्चे की मालिश प्रतिदिन कर सकते हैं। मालिश करने से शिशु की पाचन-तंत्र से संबंधित परेशानियां दूर होती हैं, परन्तु आप अपने शिशु की मालिश हल्‍के हाथों से करें तथा पेट व छाती के आस-पास ज्‍यादा जोर न दें। मालिश के लिए अच्‍छा क्रीम व हल्‍की खुशबू वाला बेबी ऑयल ही प्रयोग करें।

Pic: momjunction

शिशु को दूध पिलाने के बाद पीठ थपथपाएं
शिशु को दूध पिलाने के बाद हमेशा अपने कंधे पर रखकर उन्हें अपने हल्के हाथ से पीठ को थपथपाना चाहिए। इससे बच्चे को पेट में होने वाली समस्याएं जैसे- कब्ज, पेट दर्द की संभावना कम होती है। यह अपच से राहत दिलाती है तथा शिशु को उल्‍टी की समस्या से राहत दिलाती है।

शिशु को ग्राइप वाटर पिलाएं
इस गर्मी के मौसम में अपने शिशु को ग्राइप वाटर पिला सकते हैं। यह शरीर को ठंडक एवं राहत दिलाती है, साथ ही यह शिशु के पेट से संबंधित समस्याओं के लिए भी इस्‍तेमाल किया जाता है। यह पानी, सोडियम बाइकार्बोनेट के अलावा कई तरह की जड़ी-बूटियां से बना होता है। अगर आपके शिशु को गैस की समस्‍या है तो इसे पिलाना एक बेहतरीन उपचारों में से है।

Pic: wefornewshindi

बच्चें को केवल मां का ही दूध पिलाएं
6 से 8 महीने तक के बच्चों को केवल माँ का ही दूध पिलायें। अगर आपके शिशु को मां का दूध पिलाने के बाद पाचन-क्रिया में परेशानी का सामना करना पड़ता है तो आप सबसे पहले मां के दूध के अलावा जरूरत से ज्यादा खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ न दें। जब तक आपका बच्चा पूर्ण रूप से विकसित न हो जाए, तब तक स्तनपान करवाते रहें। जब आपका बच्चा खाने -पीने में सक्षम हो तो ही आप कुछ खिलाने की कोशिश करें।
इन छोटी मोटी सावधानियों को ध्यान में रखने से आसानी से बच्चों के स्वास्थ्य-सम्बन्धी समस्या से निपटा जा सकता है।

ठन्डे पानी का सेवन बिगाड़ देगा आपकी सेहत!

0

गर्मी के अत्यधिक बढ़ जाने पर सबसे पहले किसी चीज की जरुरत पड़ती है तो वह है पानी। गर्मी के मौसम में लोग चाहें अंदर हों या बाहर, हमेशा ही प्यास लगती है। तमाम लोग अपनी प्यास को बुझाने के लिए पानी का सेवन करते हैं, किन्तु ‘नॉर्मल पानी न पीकर हम इस स्थिति में ठंडा पानी पीना ज्यादा पसंद करते हैं। खूब प्यास लगी हो तो ठंडा पानी किसी अमृत से कम नही लगता है। ठन्डे पानी से शरीर को ठंडक, थकान तथा लू से भी राहत मिलती है।

लेकिन बहुत से लोगों को यह पता नहीं होगा कि ठंडे पानी का सेवन हमारे शरीर के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है। आज हम बताएँगे कि ठंडा पानी शरीर पर कितना नकारात्मक प्रभाव डालता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना
ठंडा पानी पीने से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता एकदम से कम हो जाती है, जिससे खांसी, जुकाम की समस्या पैदा हो जाती है और छाती में भी कफ बनना शुरू हो जाता है। हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम के कमजोर हो जाने के साथ ही अनेक बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।

Pic: continentalhospitals

पाचन क्रिया पर बुरा असर
भोजन के बाद या भोजन के समय कभी भी ठंडे पानी का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि खाना खाते समय ठन्डे पानी को पीने से खाना पचने की समस्या हो जाती है। ठन्डे पानी के सेवन से धमनियां सिकुड़ने लग जाती हैं और ठंडा पानी पीने से पाचन तन्त्र बुरी तरीके से प्रभावित हो जाने के साथ उल्टी, दस्त यानी कि डायरिया, पचने में दिक्कत, पेट में दर्द जैसे अनेक रोगों का सामना करना पड़ता है।

सिरदर्द होना
ज्यादा ठंडे पानी के सेवन से सिर में दर्द शुरू हो जाता है। हालाँकि आप लोग “ब्रेन फ्रिज” के बारे में जानते होंगे जोकि ज्यादातर आइसक्रीम या ठंडे पानी के सेवन से होता है। ज्यादा ठंडा पानी पीने से ब्रेन की स्पाइन नसों के भी ठंडा होने के कारण यह ब्रेन पर असर डालती है, इसलिए यह सिर दर्द की वजह बन जाता है।

दिल की समस्या
ज्यादा ठंडा पानी पीना हमारे दिल के लिए भी नुकसानदायक होता है क्योंकि हमारे बॉडी में एक नर्व होती है, जिसका नाम वेगस है। यह नर्व शरीर के अंगों जैसे हार्ट, लंग्स और डाइजेस्टिव सिस्टम को कंट्रोल करती है। अधिक ठंडा पानी पीने से नर्व भी ठंडी होकर दिल की धड़कनों को धीमा कर देता है तथा इससे रक्त वाहिनियां भी सिकुड़ जाती हैं और कभी -कभी ब्लड फ्लो में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

Pic: indiatvnews

कब्ज़ की परेशानियां
देखा जाता है कि जो लोग ज्यादा ठंडा पानी पीते है उन्हें हमेशा कब्ज की शिकायत रहती है। क्योंकि ठन्डे पानी से भोजन पचने में परेशानी होती है। यह खाए हुए खाद्य – पदार्थों को कठोर बना देता है, इसलिए आगे चलकर कब्ज तथा बवासीर जैसी बीमारियाँ पैदा हो सकती हैं।

वजन का बढ़ जाना
ठंडे पानी के सेवन से मोटापा बढ़ जाता है, क्योंकि यह बॉडी में चर्बी को और कठोर तथा सख्त बनाता है। इसी कारण दिन-प्रतिदिन वजन बढ़ता जाता है। इस बात का ध्यान रहे कि जब कभी आप अपना मोटापा कम करने की सोच रहे हैं, तो ठंडे पानी का सेवन बंद करके आपको हमेशा गर्म या गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए।

Pic: sansaninews

आलस तथा थकान महसूस होना
ज्यादा ठंडा पानी पीने से आपको दिन भर थकान व आलस महसूस होता है। ठंडे पानी का तापमान बहुत कम तथा शरीर का तापमान ज्यादा होने के कारण शरीर में आलस या थकान महसूस होने लगती है।

युवाओं में दिखें ‘ये लक्षण’ तो हो जाएं सावधान!

0

आधुनिक जीवनशैली की चपेट में आ कर आज की युवा पीढ़ी अपने स्वास्थ्य सम्बन्धी जरुरी चीजों को नजरअंदाज करती जा रही है। इसका नतीजा यह होता है कि असमय ही युवाओं का शरीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है। इसमें प्रमुख है कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना।

कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। कुछ लोगों का मानना है कि कोलेस्ट्रॉल अधेड़ उम्र में बढ़ता है, परन्तु आजकल के बदलते खानपान की वजह से देखा जाता है कि अक्सर 18-35 साल के युवाओं में भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या आम हो गई है।

Pic: cbsnews

जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है तो यह अनेक प्रकार से हानिकारक हो सकता है। जैसे आर्टरी ब्लॉक, ब्रेन स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर समस्या, कम उम्र में हार्ट अटैक सहित अनेक खतरनाक और जानलेवा बीमारियाँ भी हो सकती हैं। कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाने पर शरीर में कुछ लक्षण दिखाई देता है।

तमाम युवा इन संकेतों को अनदेखा यानी कि इन संकेतों को सामान्य समझकर ध्यान नही देते हैं। अगर इन संकेतों के दिखने पर आप सावधान हो जाएँ और अपनी जीवनशैली में थोड़ा बहुत बदलाव करें तो आप इन बीमारियों से निजात पा सकते हैं।
कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाने पर निश्चित रूप से इस तरह के संकेत हमारा शरीर हमें देता है।

सीढ़ियां चढ़ते समय या पैदल चलते समय सांस फूलना
यदि पैदल चलते या सीढ़ियां चढ़ते समय आपकी साँस तेजी से चलती है या पहले की तुलना में थोड़े से काम करने पर ही बहुत जल्दी थकान महसूस करते हैं तो यह लक्षण कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के हो सकते हैं। कोलेस्ट्रॉल के शुरुआती संकेत हैं- सांस फूलना, धड़कनों का तेजी से बढ़ना तथा अंदर से कमजोरी महसूस होना आदि।

Pic: lifealth

हाथ और पैरों में झनझनाहट होना

अगर आपके हाथों-पैरों में झनझनाहट या शरीर में चीटियां रेंगने की तरह अहसास हो तो इस प्रकार की समस्या कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से हो सकती है। शरीर के जिन अंगों तक ऑक्सीजनयुक्त रक्त के पहुंचने में दिक्कत आती है, या उस अंग तक खून पर्याप्त मात्रा में नही पहुँच पाता है तो समझ लीजिए कि धमनियों में प्लाक जमा हो गया है, इसलिए उस स्थान पर झनझनाहट महसूस होने लगती है।

अगर आपको इस प्रकार की परेशानियां नजर आयें तो तुरंत कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएं।

Pic: amayen

शरीर के अंगों में दर्द
कई बार पूरे शरीर में दर्द या अकड़न जैसी समस्या हो जाती है, इसे नजरंदाज न करें क्योंकि यह खतरनाक साबित हो सकता है। जैसे, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, पीठ में दर्द तथा गर्दन दर्द आदि। यह सामान्य दर्द भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का लक्षण हो सकते हैं। छाती के निचले भाग, जबड़ों में होने वाले दर्द हार्ट अटैक के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं।

आंखों की ऊपरी त्वचा पर पीले चकत्ते होना
जब रक्त में वसा की मात्रा बढ़ जाती है तो आंखों के ऊपर पीले चकत्ते दिखने शुरू हो जाते हैं। यह संकेत भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का हो सकता है। लेकिन कई बार इस तरह के लक्षण डायबिटीज के भी हो सकते हैं।

घबराहटऔर अधिक पसीना आना
कभी-कभी अचानक घबराहट, बेचैनी और शरीर में अधिक पसीना आना भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाने का संकेत होता है, क्योंकि शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक बढ़ जाने की वजह से दिल तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता है, इसलिए दिल कम मात्रा में खून पंप करने लगता है। साथ ही सांस लेने में दिक्क़त, घबराहट तथा शरीर से अधिक पसीना निकलने की समस्या हो सकती है।

Pic: navodayatimes

कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएं
20 साल की उम्र के हो जाने पर बहुत ही जरूरी है पहली बार कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाना। इसके बाद हर 3 साल बाद कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाना चाहिए, ताकि आपको सही समय पर कोलेस्ट्रॉल का पता चले तथा आप जानलेवा रोगों से दूर रहें।

प्रेग्नेंसी के दौरान आपको किन खतरों से सावधान रहना चाहिए?

0

मां बनना हर महिला के लाइफ में बहुत ही सौभाग्य एवं ख़ुशी की बात होती है। वहीं गर्भावस्था के दौरान उचित सावधानी नहीं बरतने पर यह माँ और शिशु के लिए खतरनाक भी हो सकता है। गर्भावस्था की स्थिति में महिलाओं को अपने स्वास्थ्य और शरीर को लेकर अनेक सावधानियां बरतनी चाहिए।

चूंकि महिलाओं को नौ महीनों तक काफी लम्बा सफर तय करना होता है। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को सिर में दर्द होना, डिप्रेशन, तनाव, वजन बढ़ना, भूख कम लगना, नींद न आना आदि तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गर्भवती महिला को इसके बारे में जानना अति आवश्यक है।

आईये जानते हैं गर्भावस्था के दौरान होने वाली परेशनियों के बारे में

गर्भ में बच्चे की मूवमेंट कम होना और माँ के पेट में दर्द होना
गर्भावस्‍था के खतरों को पहचानने के लिए वैसे तो डॉक्टर कुछ संकेतों को बता देते हैं, फिर भी कुछ ऐसे लक्षण होते हैं, जिन्हें कुछ महिलाएं नज़रअंदाज़ कर देती हैं।
जैसे गर्भ के तीसरे महीने के चलते प्रेग्नेंट महिलाओं को तेज सिरदर्द, पेट में सूजन तथा पेटदर्द की समस्या होने लगती है तो इस का मतलब यूरीन में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा हो गयी है या ब्लड प्रेशर के बढ़ने से भी ऐसा हो सकता है।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अगर गर्भावस्था के दौरान बच्चा गर्भ में कम घूम रहा है तो बच्चे को प्लेसेन्टा से पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन नहीं मिल रहा है। इस तरह की परेशनियां होने पर तत्काल अस्पताल में दिखाना चाहिए ।

Pic: kidspot

पानी का गिरना
गर्भावस्‍था के दौरान ज्यादा पानी आना भी नुकसानदायक होता है। यह यूट्रस के सूजे होने तथा ब्लैडर के भारीपन की वजह से होता है। परन्तु ध्यान दें अगर पानी लगातार निकलता है तो इसकी वजह पानी की थैली का फटना भी हो सकता है। इस स्थिति में आपको तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए ।

लगातार उल्‍टी और कमजोरी महसूस होना
प्रेग्नेंसी में लगातार उल्टियों का आना भी परेशानियों की वजह बन सकता है। ऐसे में शरीर में पानी की कमी तथा बच्चे के जन्म के समय समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थितियों में डॉक्‍टर से हर समय परामर्श लेना चाहिए क्योंकि विशेषज्ञ आपको उचित आहार लेने का तरीका बताएंगे जिससे जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहेंगे।

Pic: healthunbox

फ्लू के लक्षण या संकेत
कहा जाता है कि सामान्य महिलाओं की तुलना में प्रेग्नेंट महिलाओं में फ्लू का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि प्रेग्नेंट महिलाओं के शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम कमजोर होता है जिससे फ्लू से होने वाली समस्याएँ ज्यादा हो जाती हैं।

फ्लू में होने वाले सामान्य लक्षण

  • बार -बार उल्टियां आना
  • दस्त लगना या डायरिया होना
  • गले में दर्द, खरास की समस्या
  • लगातार खांसी और सर्दी जुकाम का लगना
  • कमज़ोरी महसूस होना
  • नाक का अधिक बहना आदि फ्लू के लक्षण हैं।

Pic: dastaktimes

खून की कमी होना
गर्भावस्‍था के समय में खून का कमी होना आम समस्या है। ऐसे में शरीर में रक्त की कमी हो जाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि महिला के गर्भ में एक और जान पल रही है। यह मां और बच्चे दोनों के लिए परेशानी का कारण हो सकता है।
इसलिए नियमित जाँच कराएं तथा डॉक्टर से परामर्श लें और इन खतरों से सावधान रहें।

सुबह खाली पेट भीगे बादाम खाने से क्या फायदे होते हैं?

0

यूँ तो आपने सुना होगा कि बादाम खाने से दिमाग तेज बनता है, परन्तु क्या आपको पता है कि भीगे हुए बादाम के सेवन से और अधिक फायदे मिलते हैं?

जी हाँ! नियमित तौर पर सुबह उठने के बाद 3 या 4 भीगे हुए बादाम खाने से अनेक बीमारियों से लड़ने की क्षमता हमारे शरीर को मिलती है, साथ ही यह शरीर को स्वस्थ एवं मजबूत बनाता है। बादाम में प्रचुर मात्रा में मिनरल्स व फाइबर पाए जाते हैं। इसके अलावा विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम और फॉस्फोरस की मात्रा अधिकता में पायी जाती है। बादाम के खाने से शरीर में ब्लड प्रेशर और वजन बढ़ने तक की शिकायत भी कम होती है।

हृदय के मरीजों के लिए भी बादाम खाने से लाभ मिलता है। बादाम को पानी में भिगोकर या दूध के साथ भी खा सकते हैं। माना जाता है कि भीगे हुए बादाम, सूखे बादाम की अपेक्षा अधिक स्वास्थ्यवर्धक होता है।

तो आइये हम आपको बता देते हैं कि भीगे हुए बादाम खाने से वास्तव में क्या -क्या फायदे होते हैं?

Pic: livehalchal

डिप्रेशन या तनाव को करे दूर
बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट बादाम में पाए जाते हैं, इसलिए नियमित बादाम के सेवन करने से दिमाग तेज रहता है और इसके साथ ही तनाव, डिप्रेशन से भी राहत मिलती है। भीगे हुए बादाम के हर दिन 4 से 5 दाने खाने से फायदा होता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए उत्तम
बादाम खाना प्रेगनेंसी के लिए बहुत ही सर्वोत्तम होता है । बादाम के सेवन करने से न केवल गर्भवती महिलाओं को फायदा होता है बल्कि मां के पेट में पल रहें शिशु का भी दिमाग तेज बनता है। इसके साथ ही बादाम से मिलने वाले न्यूट्रीशन से दोनों स्वस्थ एवं तंदुरूस्त रहते हैं।

Pic: hindusta

दिमाग को रखे तेज एवं स्वस्थ
प्रतिदिन सुबह 4 से 5 भिगोये हुए बादाम खाने से दिमाग तेज तथा याददाश्त भी तेज हो जाती है। जिन लोगों का काम दिमाग वाला होता है, ऐसे लोगों को नियमित रूप से बादाम खाना चाहिए। इससे मेमोरी तेज़ बनती है और सेंट्रल नर्वस सिस्टम ठीक से काम करता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करे
सर्दी, जुकाम तथा खांसी आदि छोटे- छोटे रोगों से लड़ने के लिए आप तुरंत ही बादाम खाना शुरू कर दीजिये, क्योंकि यह इन सब से राहत देता है। बादाम के खाने से शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ जाती है साथ ही छोटे- छोटे बीमारियों का भी शरीर में कोई असर नहीं हो पाता है। गर्म दूध में कूछ बूंदें बादाम के तेल की डालकर पीने से कफ से निजात पा सकते हैं।

मोटापा कम करने में सहायक
बादाम वजन कम करने में भी मदद करता है, इसलिए आप सुबह भीगे हुए बादाम को अपनी डाइट में शामिल करें। बादाम को खाने से भूख भी कम लगती है तथा साथ ही मोटापे से भी राहत मिलती है।

कब्ज़ से राहत
बादाम से शरीर में कब्ज आदि की समस्या नहीं होती है, क्योंकि बादाम में अत्यधिक फाइबर की मात्रा होने के कारण पेट अच्छे से साफ़ एवं हल्का हो जाता है।

Pic: fitglobal

ब्लड प्रेशर करे नियंत्रित
भीगे हुए बादाम से उच्च रक्तचाप वाले लोगों को लाभ होता है। इसमें मैग्नीशियम होता है जो शरीर में खून के दबाव को नियंत्रित करता है और आपको घटते -बढ़ते ब्लड प्रेशर में आराम मिलेगा।

कोलेस्ट्राल कम करे
बादाम शरीर में मौजूद कोलेस्ट्राल की मात्रा को कम करता है, साथ ही इसमें पाए जाने वाले मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड और विटामिन E रक्त के प्रवाह से कोलेस्ट्राल कम करता है।

Pic: mensweakness

स्किन से झुर्रियों को दूर करे
भीगा हुआ बादाम खाने से त्वचा से झुर्रियों को दूर करने में आसानी होता है। इसे एक नैचुरल एंटी-एजिंग फ़ूड के रूप में माना जाता है। इसलिए सुबह -सुबह भीगे बादाम के खाने से आपकी त्वचा पर झुर्रियों का असर कम हो जायेगा।

Recent Posts

गर्मियों में खान-पान का रखें विशेष ख्याल

गर्मी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। और इस मौसम में आपके शरीर को पानी की बहुत जरूरत होती है शरीर में...

जानें थायराइड के कारण और बचाव

आजकल थाइराइड आम बात हो गई है। लोगों के बिजी लाइफस्टाइल और असंतुलित भोजन की वजह से थायराइड के मरीजों की संख्या...

ठंडा पानी पीने के कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी

शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसे गर्मियों में ठंडा पानी पीना पसंद नहीं हो। जब आदमी का शरीर तप...

युवाओं में दिखें ‘ये लक्षण’ तो हो जाएं सावधान!

आधुनिक जीवनशैली की चपेट में आ कर आज की युवा पीढ़ी अपने स्वास्थ्य सम्बन्धी जरुरी चीजों को नजरअंदाज करती जा रही है।...

कान के संक्रमण और घरेलू उपचार

विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया या वायरस कान के घाव या संक्रमण का कारण बन सकते हैं। यह बाहरी कान (तैराक वर्ष), मध्य...