एड्स और उससे बचाव के तरीके

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पिछले दशकों में एड्स का नाम सबसे खौफनाक बीमारी के तौर पर दर्ज है। यह किस आलम तक खतरनाक है, यह आप इस बात से ही समझ सकते हैं कि अभी तक इसका किसी भी प्रकार का इलाज संभव नहीं हो सका है। ऐसा नहीं है कि केवल एड्स ही एकमात्र खतरनाक बीमारी है, बल्कि कैंसर जैसी और खतरनाक बीमारियां भी हैं, लेकिन उनका इलाज कहीं ना कहीं संभव है और मरीज को एक उम्मीद सी बनी रहती है। लेकिन एड्स हो जाने की स्थिति में मरीज की उम्मीद ही खत्म हो जाती है और वह अपने अंत समय के लिए घड़ियां गिनता रह जाता है।

बहरहाल इससे बचाव के लिए ‘वर्ल्ड ऐड्स वैक्सीन डे’ प्रत्येक साल 18 मई को आयोजित किया जाता है और इस अवसर पर लोगों को जागरूक किया जाता है। बहुत सारे लोग इसके बारे में जानते भी हैं किंतु इतने खतरनाक रूप के बारे में जागरूकता लगातार फैलानी चाहिए ताकि जरा सी भी असावधानी न रह जाए।

Pic: themix

एड्स के कारणों के बारे में अधिकांश लोग जानते ही हैं और यह बिना प्रोटेक्शन के किसी के साथ सेक्स करने की स्थिति में सबसे ज्यादा फैलता है। बेहद आवश्यक है कि जब भी आप किसी अनजान के साथ संभोग करें तो पूरी तरह से प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करें। इसीलिए आप देखते होंगे कि वेश्यावृत्ति करने वाले क्षेत्रों में कंडोम का बड़े स्तर पर प्रचार प्रसार किया गया है। वैसे इस तरह के असुरक्षित सेक्स से बचना चाहिए और अब तो यह ट्रेंड चला है कि शादी से पहले लोग एक दूसरे का एचआईवी टेस्ट कराने लगे हैं।

बदलते जमाने के हिसाब से इसे बिल्कुल भी गलत नहीं मानना चाहिए।

इसी प्रकार से दूसरा बड़ा कारण है सिरिंज या सुई का बार-बार इस्तेमाल करना। इससे भी संक्रमण फैलता है, खासकर तब इसकी संभावना ज्यादा हो जाती है जब किसी एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति में प्रयोग की गई सुई आप किसी स्वस्थ व्यक्ति को इंसर्ट करते हैं। ऐसे में बेहद आवश्यक है कि जब कहीं भी डॉक्टर के पास या किसी टैटू गुदवा ने वाले के पास आप जाएं तो फ्रेश सुई के इस्तेमाल के प्रति निश्चिंत हो लें। हालांकि वर्तमान में तमाम डॉक्टर जागरूक होने लगे हैं किंतु एक नागरिक के तौर पर आपको भी इन चीजों का ध्यान रखना चाहिए।

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एड्स फैलने के अन्य कारणों में संक्रमित योनि स्राव, वीर्य और खुले घाव का संपर्क मुख्य माना जाता है। अगर कोई औरत संक्रमित है और वह अपने बच्चे को जन्म देते हुए दूध पिलाती है तो उसे भी यह बीमारी फैल सकती है। इसीलिए आजकल प्रेग्नेंट महिलाओं का एचआईवी टेस्ट अनिवार्य होने लगा है।

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बचाव के तरीके अजमाना एड्स के लिए थोड़ा लाभदायक है हालांकि अगर इसका वायरस शरीर में हावी हो गया तब इसे कंट्रोल करना लगभग नामुमकिन सा ही है। एड्स के उपचार में एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी और इसी से संबंधित दवाइयां प्रयोग में लाई जाती हैं। सबसे बड़ी बात होती है, यह दवाइयां भी वायरस को खत्म नहीं करती हैं, बल्कि उसके प्रभाव को कुछ हद तक सीमित कर देती हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की कोशिश करती हैं। जैसा कि हम सबको पता है कि एड्स कोई अलग रोग नहीं है बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को यह समाप्त कर देता है और कोई भी रोग अगर आपको होता है ऐसी स्थिति में वह ठीक ही नहीं होता है। तो जाहिर तौर पर इससे बचने और इसके प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास जारी रहना चाहिए। क्योंकि अगर आप एड्स से सुरक्षित रहना चाहते हैं तो इससे बचाव और इसका उपचार बेहद आवश्यक है।

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