‘स्तनपान’ शिशु के लिए अमृत, तो माँ के लिए भी फायदेमंद

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ही नहीं बल्कि जीवन की धारा है। मां का दूध सुपाच्य होता है । स्तनपान करने से मां और बच्चें के बीच सकारात्मक प्रभाव पड़ता है बौद्विक शक्ति का विकास, तथा अनेक रोगो से लड़ने की शक्ति मिलती है जैसे : डायरिया,कुपोषण, सूखा रोग आदि तथा जो शिशु भरपूर मात्रा में स्तनपान करते हैं उनके बड़े होकर मधुमेह, दिल संबंधी रोग और कैंसर आदि जैसे बड़े रोगों के होने की संभावना भी काफी कम हो जाती है।

प्रतिरोधक क्षमता – मां का दूध पीने वाले बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता अन्य बच्चों की अपेक्षा तुलनात्मक रूप से अधिक होती है। स्तनपान करने से बच्चों को सर्दी, जुकाम,खांसी, छाती में इंफेक्शन और कान के संक्रमण आदि रोग नहीं होते हैं।

Pic: kindercarepediatrics

स्तनपान से शिशु का वजन नियंत्रित – जिस शिशु को स्तनपान कराया जाता है उस शिशु पर अनावश्यक चर्बी नहीं चढ़ती है। माँ के दूध से पेट भरते ही शिशु आवश्यकता से अधिक दूध नहीं पीता। बड़े होने के बाद भी बचपन में मिला स्तनपान मोटापे तथा कोलेस्ट्रॉल आदि से बचाता है।

स्तनपान से शिशु का दिमाग तेज – माँ के दूध से शिशु को डी एच ए मिलता है जो और शिशु के मानसिक विकास में सहायक होता है। शिशु को भावनात्मक सुरक्षा का अहसास मिलता है जो मष्तिस्क के विकास के लिए सहायता करता है।

Pic: naturalhealthcourses

दांत और मुँह का सही विकास – जो बच्चा स्तनपान करता है उसके जबड़े की हड्डी तथा ऊपरी वायु मार्ग की मांसपेशियों का विकास सही तरीके से होता है। शिशु का मुँह स्तन से दूध पीने के लिए सबसे अनुकूल होता है। इस पूरी प्रक्रिया में बच्चें का मुँह का विकास अच्छे से हो जाता है और दांत निकलने में भी यह प्रक्रिया सहायक होती है। इससे जबड़े भी मजबूत बनते हैं

माँ का दूध अत्यधिक सुविधा जनक – माँ का दूध सबसे सुविधा जनक माना जाता है क्योंकि जब भी बच्चे को भूख लगे तो स्तनपान कराने के लिए किसी प्रकार की कोई तैयारी नहीं करनी पड़ती है। अगर कहीं माँ को बाहर जाना भी पड़े तो शिशु का आहार हमेशा माँ के साथ होता है। माँ के दूध को ठंडा गर्म करने की कोई भी परेशानी नहीं होती है।

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स्तनपान से माँ के लिए भी फायदा – स्तनपान से जितना शिशु को फायदा है उतना ही माँ को भी फायदा पहुंचता है । यह डिलीवरी के बाद महिला के वजन पर नियंत्रित करता है, कैलोरी घटाता है और शीघ्र घाव को भरता है। माँ और बच्चें के बीच भावनात्मक सम्बन्ध को भी बढ़ाता है तथा हार्मोन का संतुलन बनाये रखता है। स्तनपान कराने से महिलाओं में होने वाले स्तनकैंसर की संभावना भी कम होती है। जो महिलाएं बच्चे के जन्म के तुरंत बाद ब्रेस्टफीडिंग शुरू करती हैं उन्हें प्रसव के बाद होने वाले दर्द व रक्तस्त्राव में भी काफी आराम मिलता है।

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