कैसे पहचानें कुपोषण को और क्या है बचाव के उपाय

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व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक है पोषक तत्व क्योंकि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जैसे :प्रोटीन,वसा,कार्बोहाइड्रेट,विटामिन फाइवर तथा जल आदि। कम या ज्यादा मात्रा में इन तत्वों को लेने से व्यक्ति कुपोषण का शिकार हो सकता है। कुपोषण के कारण बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है। इसके कारण व्यक्ति आसानी से कई प्रकार के रोगों से ग्रस्त हो सकता है जैसे : स्त्रियों में रक्ताल्पता या घेंघा रोग अथवा बच्चों में सूखा रोग या रतौंधी आदि प्रायः कुपोषण अपर्याप्त असंतुलित आहार के कारण होता है अतः कुपोषण का जानकारियाँ होना बहुत ही जरूरी है

Pic: dopahar

कुपोषण के कारण
कुपोषण से ग्रस्त होने के अनेक कारण हो सकते है जैसे: कुपोषण का कारण सिर्फ संतुलित आहार की अधिकता एवं कमी से ही नहीं बल्कि यह सामाजिक स्थिति से भी प्रभावित करता है जैसे :जनसंख्या में वृद्धि के कारण भी यह संभव हो सकता है, जिसमे समाज के एक हिस्से को ही पोषण मिलने लगता है।तथा दूसरे पक्ष कुपोषण से ग्रस्त हो जाते हैं। इसके अलावा गरीबी, आर्थिक रूप से कमजोर होना भी कुपोषण का कारण है। लोगो के पास पोषक तत्व खरीदने को भी धन नहीं होते है ऐसे में उन्हें जो भी मिलता है उसी से जीवन को चला लेते हैं। और यही असंतुलित आहार कुपोषण को बढ़ाता है । आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति पौष्टिक चीजें जैसे दूध, फल, घी इत्यादि नहीं खरीद पाते और उनके प्रतिदिन के आहार में पौष्टिकता की कमी हो जाती है।
अज्ञानता तथा निरक्षरता भी कुपोषण एक बड़ा कारण है। गाँव, देहात में रहने वाले व्यक्तियों को पौष्टिक आहार की उतनी जानकारी नहीं होती है इस कारण अपने और बच्चों के भोजन में पौष्टिक आहार शामिल नहीं करते है इसके कारण अपने आप तो इस रोग से ग्रस्त होते ही है बल्कि अपने परिवार को भी कुपोषण के शिकार बना देते है।

Pic: dailyhunt

गर्भावस्था के दौरान कुपोषण के गंभीर परिणाम

माँ के शरीर में पोषक तत्वों की कमी बच्चें की विकास के लिए खतरनाक ही नहीं बल्कि पुरे उम्र रोग से ग्रस्त तथा कमजोर बना देती है । कुपोषण की शिकार गर्भवती महिलाओं को खून की कमी अथवा रक्ताल्पता की बीमारी हो सकती है इसलिए गर्भवती स्त्रियों को ज्यादा पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है। किन्तु जो गर्भवती माताएं संतुलित आहार नहीं लेती हैं, स्वयं तो रोग से पीड़ित होते ही हैं साथ में होने वाले बच्चें को भी कमजोर एवं रोगी बना देती हैं। गर्भावस्था के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी बच्चे के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

कैसे पहचानें कुपोषण को
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार की जरूरी होती है। तथा समय के अनुसार पौष्टिक आहार के न मिलने पर हमें कई प्रकार के लक्षण दिखते हैं।

  • शरीर का विकास अवरुद्ध होना या रुक जाना ।
  • त्वचा का रंग पीलापन होना तथा झुर्रियाँ युक्त।
  • मांसपेशियाँ का सिकुड़ जाना
  • थोड़ा बहुत काम करने पर ज्यादा थकान लग जाना ।
  • वजन का कम होना, कमजोरी महसूस होना ।
  • मन उदास होना ,घबराहट तथा चिड़चिड़ापन होना ।
  • पाचन शक्ति में गड़बड़ी तथा नींद कम आना ।
  • स्किन और बालों का रंग में परिवर्तन आना ।
  • रोग प्रतिरक्षा में कमजोर होना ।
  • पैरों तथा घुटनों और शरीर के निचले हिस्से में सूजन होना है।
    ऐसे होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए
Pic: mjeetkaur

कुपोषण रोकने के उपाय

  • नियमित रूप से संतुलित आहार लेना चाहिए|
  • दूध और डेयरी खाद्य पदार्थ
  • फलों एवं सब्जियां
  • प्रोटीन के अन्य गैर-डेयरी स्रोत
    इसके अलावा सभी हॉस्पिटलों में मरीजों,बच्चों ,गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गो को कुपोषण के लिए मूल्यांकन किया जाना चाहिए| तथा बच्चें कुपोषण से ग्रस्त न हो इसलिए गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त पौष्टिक आहार देना चाहिए|

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