थोड़ी सी सावधानी से बचा जा सकता है अवसाद से

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अवसाद एक गंभीर बीमारी है जो नकारात्मक रूप से इससे ग्रस्त व्यक्ति को प्रभावित करती है, इसकी वजह से कई लोगो को अपने जिंदगी जीने की रूचि ख़त्म होने लगती है जिसका प्रभाव व्यक्ति की कामकाज पर पड़ता है।अगर किसी को भी एक बार अवसाद (तनाव) का स्ट्रोक आ गया, तो इसके पुनरावृत्ति की सम्भावना बढ़ जाती है।

Pic: healthbeautytips

अवसाद क्या है?

अवसाद किस वजह से होता है,अभी तक ये स्पष्ट रूप से नहीं बताया जा सका है परन्तु माना जाता है कि इसके लिए कई चीजों की अहम भूमिका होती है। जैसे -लगातार उदास रहना, किसी नज़दीक़ी की मौत, नौकरी चले जाना या शादी का टूट जाना, इन कारणों से व्यक्ति के व्यवहार में भी बदलाव आते है और उसे चिड़चिड़ापन होना, बेचैनी महसूस होना, अत्यधिक रोना, गुस्सा आना तथा उनका मन सामाजिक गतिविधियों में नहीं लगता है । अवसाद से ग्रसित लोग सामाज के संपर्क से बचने के लिए बहाने बनाते है तथा अपने आप को अपराधी समझने जैसी नकारात्मक सोच उनके मन में आनी शुरू हो जाती है। इसके साथ ही उनके मन में हर समय कुछ बुरा होने की आशंका बनी रहती है तो इससे भी अवसाद में जाने का ख़तरा रहता है।
अवसाद से ग्रस्त व्यक्तियो का हमेशा सिर दर्द,किसी को भूख का ज्यादा लगना,किसी को भूख नहीं लगना, वजन का बढ़ना या कम होना, ज्यादा थकान महसूस करना, अनिंद्रा या हाइपरसोम्निया, ये सभी शारीरिक लक्षण अवसाद ग्रस्त व्यक्ति में दिखने लगते है।

अवसाद किसे हो सकता है?


Pic: shiningdaylight

यह एक छोटा सा जबाव है कि अवसाद किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता हैं। यह एक मस्तिष्क का विकार है।
हमारे मस्तिष्क में कई तरह के रसायन कार्य करते है इसके कारण रसायनों में चेंज या अंतर हार्मोन के स्तर में जो परिवर्तन लाते हैं उससे ही अवसाद होने का खतरा रहता है।
वैसे शोध से पता चलता है कि इसके पीछे कोई आनुवांशिक वजह भी हो सकती है। इसके तहत कुछ लोग जब चुनौतीपूर्ण समय से गुज़र रहे होते हैं तो उनके अवसाद में जाने की आशंका 70 % होती है इसके अलावा मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर में बदलाव या कमी जिनमे सेरोटोनिन और डोपामाईन शामिल है, इनकी वजह से भी व्यक्ति अवसाद जैसे बीमारी से ग्रस्त हो सकता है।

अवसाद के लक्षण

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अवसाद के लक्षण वाले व्यक्तियों का मूड यानी मिजाज सामान्य उदासी जैसी नहीं होती बल्कि किसी भी प्रकार का काम या चीज में इनका मन नहीं लगता,किसी प्रकार की रूचि,तथा का ख़ुशी का न होना , यहाँ तक कि गम का भी अहसास नहीं होता है। हर समय व्यक्ति नकारात्मक सोच में डूबा रहता है। इसके साथ ही नींद न आना या बहुत नींद आना। रात को दो-तीन बजे नींद का खुलना और अगर यह दो सप्ताह से अधिक चले तो अवसाद की निशानी है।

अवसाद से बचाव

  • नींद को नियमित रखना
  • समय पर खाना और अच्छा खाना
  • अच्छी सोच रखना
  • सभी लोगो को तनाव होता है विचार ऐसा रखना कि इसे कैसे कम रखना हैं
  • अपने काम में मस्त और व्यस्त रहना
  • महत्वाकांक्षा को उतना ही रखना जितना हासिल करना संभव हो
  • परिवार के साथ जुड़े रहना
  • नियमित व्यायाम करना

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