Home Blog Page 2

गर्मियों में हार्ट के मरीज रखें अपना ‘विशेष ध्यान’

0

गर्मियों के मौसम में बाहर का बढ़ता हुआ तापमान हमारे दिल पर बहुत बुरा असर डालता है। इसलिए इस तपती धूप में दिल के मरीजों को अधिक समय तक धूप में कम या बाहर नहीं निकलना चाहिए। ज्यादा गर्मी में अत्यधिक शारीरिक श्रम करने से स्वस्थ शरीर वाले व्यक्तियों को भी थकावट या हीट स्ट्रोक (लू) जैसी बीमारियां घेर सकती हैं, तो जरा सोचिये दिल के रोग से ग्रस्त आदमी के लिए कितना खतरा हो सकता है?

आइए जानते हैं इस गर्मी के मौसम में दिल के मरीज अपना ख्याल किस प्रकार रखें

बढ़ता हुआ तापमान दिल के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक

बढ़ता हुआ तापमान हमारे हृदय पर अधिक बुरा असर डालता है। हमारे शरीर में पसीने का आना बहुत ही जरूरी होता है, क्योंकि पसीना आने से शरीर अपने आप थोड़ा ठंडा हो जाता है। वहीं जब शरीर किसी कारणवश अपने आप ठंडा न हो तो हार्ट को खून पंप करने में कठिनाई होती है। इतना ही नहीं रक्त वाहिकाओं का साइज बढ़ जाने पर दिल तेजी से धड़कने लगता है और ब्लड प्रेशर भी तुरंत कम हो जाता है।

इसलिए इस स्थिति में दिल के मरीजों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

Pic: medium

बढ़ती हुई गर्मी में हार्ट के रोगियों को निम्न सावधानियाँ बरतनी चाहिए

विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में दिल के दौरे पड़ने के साथ ही तेज गर्मी में भी हार्ट अटैक के खतरे बढ़ जाते हैं। इसलिए दिल के रोग से ग्रस्त व्यक्तियों को इन दोनों मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए। गर्मियों में आमतौर पर हार्ट अटैक पड़ने की संभावना तब होती है जब लगातार कुछ दिनों तक तेज धूप होती है।

तेज गर्मी की वजह से यदि आप को घबराहट, बेचैनी हो तो तुरंत ब्लड प्रेशर चेक कराएं।
दोपहर के तेज धूप में बाहर जाने से बचें।
दिन के समय किसी जरूरी काम से अगर बाहर जाना हो तो छाते को ले जाना न भूलें।

Pic: apkpure

इसके अतिरिक्त कुछ और बातें भी आपको ध्यान में रखनी चाहिए, जैसे…

  • तेज गर्मी में खड़े न हों तथा कोशिश करें कि सुबह शाम ही घरया दफ्तर से बाहर निकलें
  • ज्यादा गर्मी लगने पर ठंडे पानी से नहाएं
  • गर्मियों में ढीले व हल्के रंग के कपड़े पहनें
  • तरल पदार्थों और पानी का सेवन बार -बार करें
  • चाय-कॉफी तथा एल्कोहल का सेवन करने से बचें
  • मसालेदार खाने से परहेज करें

गर्मी के प्रकोप के शुरुआती संकेतों को नजर अंदाज न करें क्योंकि यह हानिकारक हो सकते हैं

  • ज्यादा पसीना आना
  • सिर में अधिक दर्द होना
  • त्वचा का नमी युक्त व ठंडा महसूस होना
  • चक्कर आना
  • उल्टी, कमजोरी तथा जी मिचलाना
  • ठंड लगना
  • अधिक थकान महसूस करना
  • धड़कन व नाड़ी का तेज चलना
  • मांसपेशियों में ऐंठन महसूस होना आदि

Pic: olympichottub

आप यदि इन लक्षणों को शुरुआत में ही पहचान लेते हैं तथा ठंडे वातावरण, पर्याप्त मात्रा में पानी व अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते हैं तो पीड़ित व्यक्ति की सेहत में सुधार हो सकता है। वरना बीमारी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।

इसके साथ ही नियमित समय पर अपने शरीर की जांच कराते रहें।

जोन्डिस होने के कारण?

0

जोन्डिस यानीकि पीलिया रोग गर्मी के मौसम में अधिक होने की संभावना होती है, इसका मुख्य कारण है गंदा पानी एवं संक्रमित खानपान, इसलिए आवश्यक है कि आप सभी लोगों को पीलिया के बारे में जानकारी होनी चाहिए तथा जानकारी प्राप्त करने के बाद सुरक्षात्‍मक उपाय कर लेंना चाहिए। तो आइए जानते है ।

जोन्डिस व्यक्ति के शरीर की एक ऐसी अवस्‍था है जिसमें बिलिरुबिन की मात्रा रक्त में बढ़ जाती है। इससे रोगी की आंख का सफेद भाग तथा चमड़ी में पीलापन पड़ने लगता है । पीलिया के लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने की आवश्यकता पड़ती है।

Pic: wikipedia

बिलिरुबिन क्या है?
यह एक पीले रंग का पदार्थ होता है, जोकि खून में उपस्थित लाल रक्त कणिकाओं के 120 दिन के सामान्य से कम अवधि पर टूटने से बनता है । बिलिरुबिन में बिलि होने के कारण हमारा लीवर पित्त रस का निर्माण तथा भोजन को पचाने और मल के उत्सर्जन में सहायता करता है । वहीँ जब किसी वजह से बिलिरुबिन, बिलि के साथ मिश्रण नहीं बना पाता तो इस स्थिति के वजह से रक्त में बिलिरुबिन की मात्रा तेजी से बढ़ जाता है । इसलिए यह शरीर के दुसरें अंगों में भी पहुंचकर पीलापन उत्पन्न कर देता है ।

जोन्डिस (पीलिया) इन बीमारियों का कारण बन सकता है
जोन्डिस अनेक बीमारियों के कारण भी बन सकता है जैसे : सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया,मलेरिया रोग बिलिरुबिन के बनने की स्थिति के तेज हो जाने के वजह से ग्रंथियों का बुखार, हेपेटाइटिस, लिवर का कैंसर,अल्कोहलिक लिवर की बीमारी इसके अलावा अधिक शराब के सेवन से बिलिरुबिन को प्रोसेस करने में लिवर की क्षमता को भी प्रभावित करती है।

Pic: ghareluupcharinhindi

जोन्डिस (पीलिया) के लक्षणों को पहचानें
रक्त में बिलिरुबिन की मात्रा बढ़ जाने से चमड़ी, आंख का सफेद भाग व नाख़ून अत्यधिक तेजी से पीलापन हो जाता है।

इस बीमारी में फ्लू-जैसे लक्षण होते है जैसे कि रोगी को बार-बार बुखार चढ़ना तथा मरीज को अधिक ठंड महसूस होता है।

उल्टी आना, पेटदर्द, कभी-कभी पेट में मरोड़ उठना तथा खाना खाने का मन न करना आदि अनेक प्रकार की समस्या हो जाती है।

एकदम से वजन का घट जाना

पेशाब का रंग गहरा/पीला होना तथा अत्यधिक थकान महसूस होना आदि अनेक लक्षण दिखाई देतें है

Pic: firstpost

इस तरह के लक्षण के दिखाई देनें पर हमें अनेक प्रकार की सावधानियां बरतनी चाहिए ।

जैसे :
1 गर्मी के मौसम में विशेष ध्यान दें क्योंकि इस मौसम में अनेक प्रकार की संक्रमण की तरह ही पीलिया होने का संभावना कुछ ज्‍यादा बढ़ जाता है।
2 सबसे पहले आप हमेशा खाना बनाते समय, परोसते समय, खाना खाने से पहले, बाद में तथा शौच जाने के बाद अपने हाथ को साबुन लगाकर अच्छी तरह से धो लें तथा भोजन को कभी भी खुला न रखें,और धूल व मक्खियों से बचने के लिए हमेशा भोजन को ढक्कन से ढंककर या किचन अलमारी में रखना चाहिए ।
3 प्रत्येक दिन ताजा, शुद्ध, गर्म संतुलित आहार लें । पानी तथा दूध को हमेशा उबालकर इस्तेमाल करें, पानी स्वच्छ एवं साफ पीएं ।
4 कटे हुए फल, धूल में पड़ी, सड़े, गंदे या खुले हुए बाजार के पदार्थ के खाने से बचे साथ ही स्वच्छ शौचालय का इस्तेमाल करें ।
5 इस रोग से पीड़ित बच्चों नियमित तौरपर डॉक्टर के पास जाँच के लिए लें जाएं । याद रहें कि बच्चा जब तक ठीक नही हो तो उन्हें स्कूल या किसी भी अन्य स्थानों पर न जाने दें।

गर्म पानी पीने से शरीर में होते हैं ये फायदें

0

भला पानी के बारे में कौन नहीं जानता है । पानी के बिना इस सरजमीं पर सभी प्रकार के प्राणीयों का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा । इसलिए कहा जाता है कि पानी ऑक्सीजन के जैसे ही हमारे शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक है । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भरपूर मात्रा मे पानी पीना चाहिए । एक स्वस्थ मनुष्य को कम से कम एक दिन में 8 से 10 गिलास पानी पीना चाहिए । वहीँ अगर गुनगुने पानी की बात करें तो यह एक दवाई का काम करता है । यह शरीर को स्वस्थ, त्वचा को मुलायम तथा चमकदार बनता है। गर्म पानी पीने से अनेक छोटे -छोटे रोग जैसे पाचन संबंधी दिक्कते, कब्ज और गैस की समस्याएं समाप्त हो जाती है । गुनगुना पानी को आप सुबह उठने के बाद, रात को सोने से पहले, ठंडी के मौसम में, व्यायाम व योगा के बाद पी सकते हैं। तो जानते हैं गर्म पानी पीने के फ़ायदे के बारें में।

मोटापा कम करे
अगर आपका वजन लाख प्रयास करने के बाद भी लगातार बढ़ रहा है तो बस आप रोज सुबह खाली पेट गर्म पानी पीना शुरू कर दें । गर्म पानी हमारे शरीर से अतिरिक्त फैट को घटने के साथी ही शरीर को स्लिम होने में सहायता करता है।

त्वचा की झुर्रियों व मुंहासे दूर करें
नियमित रूप से सुबह खाली पेट गर्म पानी के सेवन से किसी भी प्रकार की त्वचा से संबंधित परेशनियां ठीक हो जाती है । तेल व मसालेदार भोजन से शरीर के अंदर ख़राब पदार्थ जम जाते हैं, तथा व्यक्ति के शरीर को अंदर से कमजोर व जल्दी बूढ़ा कर देता है । इसलिए इस तरह की समस्या से निजात पाने के लिए सुबह गर्म पानी का सेवन करें । गर्म पानी आपकी त्वचा की झुर्रिया, पिंपल्स से छुटकारा दिलाने के साथ ही साथ ही पेट को साफ रखने में मदद भी करता है और शरीर में रूखापन भी दूर करता है ।

Pic: alessandrovalieri

सर्दी-जुकाम में फायदा
सर्दी-जुकाम से राहत पाने के लिए गर्म पानी पीना भी यह एक रामबाण इलाज है। अगर बे मौसम में आपकी नाक,गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत, छाती में जकड़न तथा जुकाम की समस्या हो जानें पर आप इन तकलीफों से बचने के लिए गर्म पानी में थोडा सा नमक डालकर गरारा करें और गर्म पानी का ही सेवन करें ।इससे आपको तुरंत राहत अथवा आराम मिलेगी ।

Pic: theactivetimes

पेट रखें साफ
गर्म पानी के सेवन से पाचन क्रिया ठीक रहता है । यह पेट को साफ, कब्ज, गैस तथा पेट दर्द होने पर आराम मिलता है। इसलिए भोजन करने आधे घंटे के बाद एक गिलास गर्म पानी अवश्य पीएं ताकि आपका पेट हल्का तथा खाना जल्‍दी पच जाए ।

ब्लड सर्कुलेशन में मददगार
गर्म पानी के पीने से ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में बहुत मदत मिलता है । अगर व्यक्ति शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही हो तो अनेक तरह की रोगों से बचा जा सकता है । इसलिए हमेशा गर्म पानी का सेवन करें ।

Pic: jansatta

दमा के मरीजों को फायदा
दमा के रोगियों को मसालेयुक्त भोजन के बाद गर्म पानी का सेवन करना बेहद फायदा होता है । हालाँकि ऐसे मरीजों को सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म या गुनगुने पानी में नींबू तथा शहद मिलाकर पीना चाहिए । इसका इस्तेमाल करने से इम्यून सिस्टम ठीक रहता है ।

गर्मी के मौसम में लू लगने पर कैसे करें घरेलू उपाय

0

गर्मी के मौसम में लू चलना यानि की गर्म हवा चलना एक आम समस्या होती है। वहीँ जब हमारे शरीर में पानी की कमी होती है तो ऐसे में बड़ी आसानी से हम लू का शिकार बन जाते हैं। इसलिए इस मौसम में अधिक से अधिक पेय पदार्थो का सेवन करना चाहिए । वहीँ गर्मी के मौसम में लू से बचने के लिए जब घर से बाहर जाएँ तो आपको अपने शरीर का पूरा ध्यान रखना चाहिए । जैसे : आंख, कान, नाक की सुरक्षा के लिए कपड़ा बांधकर बाहर निकलना चाहिए, क्योंकि इन्ही के जरिए गर्म हवा शरीर में पहुंचती है और फिर आपको लू का शिकार होना पड़ता है। जिससे व्यक्ति को अनेक तकलीफ उठानी पड़ती है जैसें : सांस लेने में परेशनियां, शरीर में ऐंठन, हाथ-पैरों के तलुओं व आंखों में जलन तथा इसे में व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है । तो आइए हम आपको इस लेख में बता रहें हैं कि लू से बचने के लिए कुछ घरेलु उपाय ।

Pic: thoughtco

क्या करें लू लग जाने पर
लू लगने पर मरीज को सबसे पहले खुली हवा तथा ठंडी जगह में रखना चाहिए जिससे उसे मिलता है।
बुखार104 डिग्री से अत्यधिक होने पर रोगी के सिर पर बर्फ की पट्टी रखना चाहिए।
प्याज का रस शहद में मिलाकर लू लगने वाले व्यक्ति को खिलाना चाहिए।
लू लगने वाले मरीज को प्यास लग जाने पर उसे नींबू के रस में मिट्टी के घड़े यानिकी सुराही का पानी देना चाहिए । यह पानी बहुत ही उत्तम रहेगा फ्रिज का ठंडा पानी या बर्फ नहीं पिलाना चाहिए क्योंकि यह रोगी के स्वस्थ पर बुरा असर डालता है।
मरीज के शरीर को गीले तौलिए से दिन में चार-पाँच बार पोंछना चाहिए।


लू लगने पर गर्म पेय पदार्थ जैसे : चाय-कॉफी आदि का सेवन नही करना चाहिए
पिसा हुआ कच्चा प्याज को जौ के आटे में मिलाकर मरीज के शरीर पर लेप करने से तुरंत आराम मिलती है ।
धनिए को रात -भर पानी में भिगोकर रखें, फिर उसे अच्छी तरह मसलकर तथा छानकर उसमें चुटकी भर चीनी मिलाकर लू वाले मरीज को पिलाए ।

Pic: patrika

लू से बचने के कुछ घरेलू उपाय
दिन के समय में ज्यादा लू चलती हैं । इसलिए जरूरी न होने पर दिन के धूप में बाहर न निकलिए । अगर बहुत ही आवश्यक हो तो अपने सिर व गर्दन को कपड़ें से बांधकर बाहर निकलना चाहिए
इस मौसम में हल्का व सुपाच्य खाद्य-पदार्थों का सेवन करें । अगर घर से बाहर जाना हो तो खाली पेट न जाएं तथा मसालेदार चीजों को खाने से बचें ।
गर्मी के दिनों में पेय -पदार्थों का खूब सेवन करना चाहिए जैसे : नींबू और नमक को मिलाकर दिन में दो – तीन बार पिएं जिससे शरीर में पानी की कमी न होने के साथ लू की शिकायत नहीं होती है।
गर्मी से बचने के लिए आपको विशेष रूप से कपड़ों पर भी ख्याल रखना चाहिए । इस दौरान सूती कपड़े, मुलायम, नरम तथा हल्के कलर एवं फुल आस्तीन के कपड़े पहनना चाहिए।

Pic: newstracklive


शरीर को ठंडक रखने के लिए नियमित मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए जैसे – अंगूर, खरबूज, तरबूज आदि तथा कटे प्याज को जेब में रखकर निकलें ।
कच्चे आम का शर्बत और आम का पन्ना पीने से राहत मिलती है
ध्यान रहें कही भी बाहर निकलनें से पहले हमेशा पानी की बोतल और छाता जरुर अपने साथ लें जाएं
थकान कम लगने एवं ऊर्जा के लिए पानी में ग्लूकोज मिलाकर पीएं
गर्मी के मौसम में बाहर से आने पर तुरंत पानी नहीं पीना चाहिए । ऐसे स्थिति में आपको तब पानी पीना चाहिए जब शरीर का तापमान सामान्य हो ।

गर्मी का मौसम डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरनाक

0

गर्मी के मौसम में दिल के मरीजों को अत्यधिक थकान, तनाव (डिप्रेशन) तथा ब्लडप्रेशर बढ़ने की समस्या हो सकती है। ठीक इसी प्रकार डाइबिटीज के मरीजों को भी थकान, तनाव तथा ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या बढ़ जाती है । गर्मी के मौसम में पसीना अधिक आने के कारण शरीर में सोडियम व पोटैशियम की मात्रा की कमी की वजह से मरीज को बैचेनी, नींद कम आना, सुस्ती आदि महसूस होती है।
गर्मी के मौसम में मांसपेशियों में भी जल्दी थकान लग जाती है । वहीँ इस मौसम में पानी की अधिक आवश्यकता होती है। शरीर में पानी की कमी से घबराहट तथा बैचेनी महसूस होने लगती है । गर्मी के मौसम में भूख नहीं लगती है इसलिए पर्याप्त पोषक तत्व व कैलोरीज न मिलने से शरीर में सुस्ती और आलस बनी रहती है।

Pic: youtube

तापमान के बढ़ जाने पर होती है समस्या
28 डिग्री सेल्सियस तापमान पर शरीर अच्छी तरह से कार्य करता है, वहीं जब तापमान 35 डिग्री सेल्सियस को पार करता है तो ह्रदय तथा मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसकी वजह से कमजोरी, सिरदर्द होना , चक्कर आना, दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट होना, तनाव तथा जी मिचलाना आदि समस्या हो जाती है।

Pic: patrika

डायबिटीज के मरीजों रहें सावधान
गर्मियों के दिनों में तेज धूप में बाहर निकलने की कम कोशिश करें । यदि शरीर में पानी की कमी से अचानक घबराहट, बैचेनी महसूस हो, तो इस स्थिति में आवश्कता के अनुसार पानी, ग्लूकोज तथा नींबू पानी लें तथा साथ ही ठंडें जगह पर आधा-एक घंटे आराम करें जिससे आपको राहत मिल सकती है । अगर आराम करने के बाद भी बैचेनी दूर नही होगी तो इसे अनदेखा न करें, तुरंत ही नजदीक अस्पताल में जाकर डॉक्टर से संपर्क करें । घबराहट तथा बैचेनी की समस्या को जानने के लिए डॉक्टर अनेक जाचें कर सकते हैं जैसे : शरीर में सोडियम और पोटेशियम, ब्लडप्रेशर, ईसीजी, 2डी इको डॉप्लर तथा ब्लड शुगर आदि ।

Pic: mtatva

कैसे करें बचाव
शरीर में सोडियम और पोटेशियम की हमेशा जांच कराए । पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें । तथा बाहर जाते समय खाली पेट न निकलें ।
लस्सी, दही और मट्ठे का सेवन करें।
मार्किट में मिलने वाले खुले और कटे फलों का सेवन न करें
आम का पना, ककड़ी, खीरा व बेल का शर्बत पीना बहुत ही फायदेमंद होता है
ताजा भोजन करें।
घबराहट और बैचेनी होने पर अपने आप कुछ भी दवा न लें तुरंत ही डॉक्टर परामर्श लें।

मुंह की बदबू को दूर करें इलाइची से

0

इलाइची को हमारे स्वस्थ शरीर के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है । इलाइची दो किस्म की होती हैं बड़ी इलायची तथा छोटी इलायची । इलाइची का इस्तेमाल अनेक प्रकार के रोगों से निजात पाने में किया जाता है। तेज खुशबु तथा स्वाद के कारण इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में भी किया जाता है । आज हम इलाइची के प्रयोग से मुँह की दुर्गन्ध की समस्या से निजात पाने के बारे में बात करेंगे।

Pic: sanjeevnitoday

मुंह में दुर्गंध आने के लक्षण
जिस व्यक्ति के मुंह से अक्सर बदबू आती है वह लोगों के साथ मिलने में हिचकिचते है, यानीकि संकोच करते है । तथा वह हमेशा अपने मुंह को ढ़ककर और माउथ फ्रेशनर का इस्तेमाल भी करते है। कई बार दांतों की समस्य के चलते भी मुँह से बदबू आने लगती है।

मुंह की दुर्गंध के कारण
प्याज तथा लहसुन के खाने से
मादक, धूम्रपान,तम्बाकू आदि पदार्थो का सेवन करने
ज्यादा तला – भुना आहार के खाने से
अच्छे से दांतों की सफाई न करने से या दांतों में बीमारियां की वजह से ।
डायटिंग करने या खाली पेट रहने से

इलायची मुंह की दुर्गंध दूर करने में मदद करती
अगर आपके मुंह से दुर्गंध आती है तो आप इसे घरेलू तरीके से दूर कर सकते है, जैसे नियमित रूप से सुबह एक भीगी हुई बड़ी इलायची चबाना बहुत ही फायदेमंद होगी । वहीं कुछ ही दिनों में आपको महसूस होगा कि आपके मुंह से दुर्गंध आनी बंद हो गई है। इसके अलावा मुंह के घाव को ठीक करने के लिए इस्तेमाल कर सकते है ।

Pic: samacharnama

इलायची के सेवन से अन्य लाभ
दिमाग को तेज करने में मदद करें – इलाइची के दो -तीन दानों को दो -तीन पिस्ता तथा दो – तीन बादाम के साथ तीन चम्मच दूध डालकर उस सभी मिश्रण को मिक्सी में पीस लें तथा पीसे हुए मिश्रण को एक गिलास दूध में इसे मिलाकर तब तक गाढ़ा करें जब तक यह आधा गिलास न हो। इसमें स्वाद के अनुसार मिश्री मिलाकर पिएं, तथा इसे बच्चों को पिलाने से अति उत्तम होता है। जैसे : दिमाग के तेज होने के साथ याद्दाश्त और आंखों की रोशनी बढ़ाने में इलायची बहुत सहायता करता है ।

पेट में गैस (एसिडिटी) और बदहजमी से निजात – अगर पेट में गैस और एसिडिटी की समस्या हो तो भोजन करने के तुरंत बाद इलाइची खाये इससे आपको राहत मिलेगी । केले के अधिक खाने पर अगर आप उसी समय एक इलाइची के खाने पर केला जल्दी पच जायेगा साथ ही शरीर हल्का हो जायेगा ।

उल्टी होना या जी मिचलाना – अगर कभी उल्टी की समस्या होने पर आपको 5 ग्राम बड़ी इलायची को आधा लीटर पानी में उबालें, जब तक एक-चौथाई पानी रह जाए, फिर हल्का गुनगुना होने पर इसका सेवन करें । यह पानी उल्टी बंद होने में मदद करता है।तथा बस में बैठने पर अगर आप को चक्कर या जी घबराने का लगता है तो इस स्थिति में आप लोगों को मुंह में एक छोटी इलायची को रखना चाहिए । इसके सेवन से जी मिचलाना बंद हो जायेगा ।

Pic: swasthyakiore

खांसी, खराश, तथा सूजन को दूर करें – एक छोटी इलायची, एक लौंग, एक टुकड़ा अदरक, चार पांच तुलसी के पत्ते को एक साथ पान में रखकर खाने से खांसी से राहत मिलती है । गले में खराश है, या आवाज बैठी हुई है तो सुबह- शाम छोटी इलायची को चबा-चबाकर खाना चाहिए तथा साथ में गुनगुना पानी पीना चाहिए । गले में सूजन होने की समस्या हो तो छोटी इलायची पीसकर मूली के पानी में पीने से फायदा मिलेगा ।

सांस से संबंधित की बीमारी – बड़ी इलायची का सेवन सांस से संबंधी रोगों को दूर रखने में सहायता होती है। जैसे : फेफड़े का संकुचन होना, तथा अस्थमा से ग्रस्त मरीजो को बड़ी इलायची लेना बहुत फायदेमंद होगा।और इसका सेवन सर्दी-खांसी में भी बहुत लाभ मिलेगा ।

सिरदर्द तथा ब्लड प्रेशर कंट्रोल – लगातार सिरदर्द की शिकायत होने पर बड़ी इलायची के तेल से मसाज करने से बहुत लाभ मिलेगा । ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहेगा क्योंकि इलायची में मैग्नीशियम तथा पौटैशियम की मात्रा पाया जाता है ।

डायरिया में दही के सेवन से मिलता है आराम

0

आमतौर पर डायरिया असंतुलित एवं संक्रमित चीजों से सेवन के कारण होता है । कई लोग जल्दी ही डायरिया यानि कि अतिसार के चपेट में आ जाते है। डायरिया होने का मुख्य कारण है गंदे पानी का सेवन तथा बैक्टीरिया युक्त खाना। इसमें मरीज को बार बार मल का त्यागना तथा मल बहुत ही पतला होता है, इसके अलावा अनेक समस्यों का सामना करना पड़ता है जैसे : मरीज के सिर दर्द और पेट दर्द हो जाता है । डायरिया होने पर कुछ ही घंटों में रोगी को कमजोरी महसूस होने लगती है क्योंकि लगातार दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है । वहीं बड़ों की अपेक्षा छोटे बच्चे डायरिया की इसकी चपेट में जल्दी आ जाते हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि बच्चे साफ सफाई और उचित खानपान का पालन नहीं कर पाते हैं। इसलिए डायरिया से बचनें के लिए हर अभिभावक को अपने बच्चों के खानपान पर विशेष ख्याल रखने के साथ साफ सफाई का भी ध्यान रखें।

Pic: parenting


डायरिया के निम्नलिखित लक्षण है
1. बार -बार लूज़ मोशन(मल) आना
2. पतले दस्त का होना
3. दस्त के अलावा सिरदर्द तथा पेटदर्द का होना
4. डिहाइड्रेशन की समस्या उत्पन्न हो सकती है
5. मरीज को बैचेनी महसूस होना

डायरिया होने का मुख्य कारण
गंदा पानी और ख़राब भोजन
पेट में कीड़ों के वजह से
पेय पदार्थों की कमी के कारण
शरीर को साफ-सुथरा नहीं रखना
पाचन क्रिया के कमजोर होने पर आदि अनेक कारण है ।

डायरिया का इलाज उचित समय पर करना चाहिए । अस्पताल में इस रोग से बचने के लिए अनेक प्रकार की दवाइयां मिलती है। समय के साथ डॉक्टर को दिखना चाहिए । लेकिन हम आपको कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताएंगे जिसके कारण आप डायरिया को कंट्रोल कर सकते हैं।

Pic: khoobsurati

दही का इस्तेमाल : डायरिया के होने पर मरीज को अपने खाने में एक कटोरी दही का सेवन करना चाहिए । दही के खाने से मरीज के शरीर में अच्छे बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ने के साथ ही नुकसानदायक बैक्टीरिया समाप्त होने लगते हैं तथा मरीज को दस्त से जल्दी राहत मिल जाती है।

दही के साथ केले का सेवन : डायरिया के मरीज को दही के साथ केला मिलाकर खाने से अधिक फायदा होता है । इसे बनाने के लिए आपको एक कटोरी में ताजा दही और दो केले लें, तथा केले को छोटे -छोटे टुकड़े में काटकर दोनों को अच्छी तरह से मिला लें । इसका सेवन आप दिन में एक बार कर सकते है, इस प्रकार की समस्या को निजात पाने के लिए आपको लगातार तीन दिन तक इसका सेवन करना चाहिए ।

Pic: news18

मेथी के बीज और दही का सेवन :डायरिया के तुरंत राहत दिलाने में मेथी के बीज को दही के साथ मिलाकर पीने से बहुत ही फायदा होता है । इसे बनाने के लिए आधा चम्मच मेथी के दाने और एक कटोरी ताजी दही को अच्छी तरह से घोल कर
तुरंत खा लेना चाहिए ।

जीरा और दही का सेवन : दस्त लगने पर आधा चम्मच मेथी के बीज तथा आधा चम्मच जीरा इन दोनों मिश्रणों को अच्छी तरह से भून कर मिक्सी में पीस लें, तथा इसके बाद एक कटोरी ताज़ी दही को लेकर उसमे इस पावडर को मिलकर पीने से तुरंत राहत मिल जाती है । इस मिश्रण को २ से 3 बार पी सकते हैं।

गर्मी के मौसम में बच्चों का कैसे रखें ख्याल?

0

बच्चों का शरीर बहुत ही नाजुक होता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बहुत कमजोर होती है । और यही वजह है कि उन्हें जल्द ही रोग पकड़ लेता है । वहीँ हम गर्मियों की बात करें तो सबसे लम्बे समय तक पड़ने वाली गर्मियों में बच्चे सबसे अधिक बीमार पड़ते हैं। आइए जानते है कि गर्मी के मौसम की शुरुआत होने के साथ आपको कुछ ऐसे बातों का ख्याल रखना चाहिए, जिससे आपके शिशु को गर्मी से राहत मिलने
के साथ ही उनकी सेहत भी बनी रहे।

Pic: acchitips

शिशु को सूती एवं आरामदायक कपड़ें पहनाएं
गर्मियों के मौसम में आप अपने शिशु के कम्फर्ट के ख्याल रखते हुए उसे हमेशा सूती कपड़े या हल्के रंग के कपड़ें पहनाएं। क्योंकि सूती कपड़ें शिशु के पसीना आने पर नमी को सोख लेते हैं।अगर आप शिशु को बाहर धूप में ले कर जा रही हैं उसे हल्के फुल बाजू के कपड़े और टोपी पहनाकर लें जाए । ध्यान रहें शिशु की त्वचा को ज्यादा समय तक गीली न होने दें, क्योकि घमौरी होने की समस्या बढ़ सकती है।

पेय पदार्थ
गर्मियों के मौसम में आप अपने बच्चे को दिन -भर थोड़ी -थोड़ी मात्रा में पानी और पेय पदार्थ जैसे : मध्यम -ठंडा जूस, शर्बत आदि पिलाते रहें। क्योंकि जब शरीर से पसीना निकलता है तो शरीर में खून गाढ़ा होने लगता है । आप अपने शिशु को जब कभी बाहर लें जाएं तो हमेशा पानी और उचित भोजन साथ लें जाएं।

Pic: care.com

बच्चें को सुबह – शाम नहलाएं
गर्मियों के मौसम में बच्चें को सुबह शाम नहलाना चाहिए क्योंकि नहाने से त्वचा साफ हो जाती है, तथा रोम छिद्र भी खुल जाते हैं । और आसानी से पसीना निकलता है इसी की वजह से शरीर को ठंडक एवं आराम महसूस होता है ।

कमरें का तापमान उचित रखें
अगर आपके घर में ए।सी।और कूलर लगे है तो यह उचित रहेगा परन्तु ए।सी। का तापमान बहुत कम न करें, शिशु के लिए 27 डिग्री तक तापमान सही रहेगा । लेकिन बच्चें को सीधी ठंडी हवा न लगने दें । अगर कही बाहर गर्मी से बच्चा आये तो तुरंत ही एसी या कूलर वाले कमरे में न ले जाए, क्योकि एकदम से शरीर का तापमान कम होना सही नही है, । कूलर का पानी को टाइम से बदलें इससे मच्छर नही होंगे और मलेरिया की संभावना भी कम होगी ।

बच्चें को पानी में खेलने से ठंडक मिलती है
शिशु को थोड़े से पानी जैसे कि बेबी पूल या बाथटब में कुछ खिलौनों के साथ बिठा सकते हैं । बच्चों को खेलना में बहुत मजा एवं आनंद आता है परन्तु ध्यान रहें शिशु को एक सैकंड के लिए अकेला मत छोड़िए ।

Pic: baptisthealth

शिशु को मच्छरों से सुरक्षित रखें
कोशिश करें कि आप अपने घर के दरवाजों तथा खिड़कियों पर जाली लगवा दें जिसके कारण मच्छर अंदर नहीं आएंगे। अगर कूलर का उपयोग करते हैं, तो हमेशा पानी चेंज करें तथा साफ करें । अपने आसपास या घर में पानी जमा न होने दें । ऐसे करने पर मच्छरों के प्रजनन की रोकथाम हो जाती हैं । इसके साथ बच्चों को फूल बाजु के कपड़े भी पहनाएं।

Pic: ubuntu

चश्में पहनाएं
अगर आप अपने बच्चें को बाहर लेकर जा रहें हो तो आप धूप और धूल (मिट्टी) से बचने के लिए चश्में का इस्तेमाल कर सकते है । चश्मा हमेशा कंपनी के ही पहनाएं ।

गर्मियों के मौसम में हमारे शरीर को पानी के कमी से होने वाले नुकशान

0

वैसे तो हमारे शरीर को भरपूर मात्रा में पानी की जरुरत हर मौसम में होती है लेकिन बात अगर गर्मी की हो तो हमें विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि कि गर्मियों के मौसम में हमारे बॉडी को कार्य करने के लिए अधिक पानी की जरुरत पड़ती है।डॉक्टर्स के अनुसार एक स्वस्थ मनुष्य को दिन भर में लगभग 7 से 8 ग्लास तक पानी पीना चाहिए।
वहीँ गर्मी के मौसम में पानी की कमी के कारण वजन बढ़ सकता है, इसलिए सुबह उठते ही चाय -कॉफी पीने से बचें तथा आप सुबह की शुरुआत एक गिलास पानी से करें । इससे आपका वजन घटने के साथ ही शरीर को ऊर्जा प्राप्त करने में मदद भी मिलेगा। आइए जानते है पानी कम पीने से क्या -क्या हो सकता है

सुबह पानी ना पीने से शरीर में एनर्जी की कमी
सुबह उठते ही आप अगर चाय या कॉफी पीते हैं तो आप इस आदत को छोड़ कर गुनगुना या सादा पानी पीना शुरू कर दीजिये। क्योंकि रात भर की लम्बी नींद के बाद सुबह आपके शरीर को पानी की जरुरत पड़ती है। इससे शरीर को स्वस्थ एवं फ्रेश रखने में सहायता मिलता है। यह मूड फ्रेश करने, बॉडी को एनर्जी देने के साथ ही पाचन की समस्या को भी दूर करता है।

Pic: ujjawalprabhat

पानी के कमी से मुंह में बदबू आना
अगर आपके शरीर में पानी की कमी हो तो इसकी वजह से मुंह से बदबू आने की समस्या आ सकती है। मुंह का सुखना तथा पानी की कमी से मुंह में बैक्टीरिया उत्पन्न होते है जिसके कारण सांसों से बदबू आना शुरू हो जाती है। इसके लिए आपको पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए जिससे सांसो की बदबू न आएं ।

पानी की कमी से वजन का बढना
मनुष्य के शरीर में लगभग 70 फीसदी हिस्सा पानी होता है। इसलिए पानी की मात्रा के संतुलन बनाए रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना जरूरी है । शरीर में पानी के कमी होने पर मेटाबॉलिज्मस प्रभावित होता है, तथा जिसके कारण कम खाने पर भी मोटापा तेजी से बढ़ जाता है । आजकल देखा जाता है कि अधिकतर लोग मोटापा की वजह से बहुत ही परेशान है हर किसी के मुंह से यही सुनने को मिलता है कि हम इतना खाते नहीं फिर भी मोटापा बहुत बढ़ रहा है, इसके पीछे काम पानी का सेवन भी एक कारण हो सकता है।

Pic: mensxp

चेहरे पर झुर्रियां तथा त्वचा का मुरझाना
चेहरे की कुदरती नमी को बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक है उचित मात्रा में पानी के सेवन किया जाये। जो लोग पानी कम मात्रा में सेवन करते है उनकी त्वचा में रूखापन बढने के साथ ही चेहरा मुरझाने लगता है। इसके साथ ही मुंहासे, दाग, झुर्रियां और चेहरे की चमक भी समाप्त हो सकती है । इसलिए त्वचा की नमी बांये रखने के लिए और चेहरे को स्वस्थ रखने के लिए सही मात्रा में पानी पिए ।

दिल की समस्या
शरीर में अगर पानी की कमी हो जाये तो बहुत सारी समस्याएं आपके सामने आने लगती हैं। जो लोग पानी कम पीते है उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे : शरीर में खून का जमना, रक्त संचार सही से न होना तथा दिल से संबंधित अनेक बीमारियों की समस्या हो सकती हैं। इसलिए डिहाइड्रेशन से बचने के लिए सही मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए जिसके कारण हानिकारक पदार्थ पेशाब और पसीने के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।

Pic: lifealth

अत्यधिक थकान का महसूस होना
शरीर में पानी की कमी के कारण अत्यधिक थकान तथा एनर्जी की कमी महसूस हो सकती हैं । पानी की कमी से सिरदर्द, डिप्रेशन यानीकि तनाव, उलझन आदि अनेक प्रकार की समस्याए हो सकती है अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हो तो सही मात्रा में पानी का सेवन करें । यह आपको कई रोगों और बीमारियों से दूर रखेगा।

जानिए खांसी के कारण, लक्षण तथा घरेलू उपाय

0

गर्मी हो या सर्दी बदलते मौसम के साथ खांसी की समस्या होना आम बात है । कभी -कभी खांसी इतनी ज्यादा होती है कि इसकी वजह से दिन की चैन ख़त्म होने के साथ ही रातों की नींद भी समाप्त हो जाती है। खांसी के ठीक होनें के लिए लोग दवा का सेवन करते है किन्तु दवा से तो खांसी ठीक हो जाती है लेकिन कुछ समय बाद फिर से खांसी शुरु हो जाती है ।आज इस लेख में खांसी के कारण,लक्षण,कुछ घरेलू उपाय बता रहे है । आइए जानते है।

Pic: samacharjagat

खांसी होने का कारण
बहुत से लोग खांसी से अधिक परेशान रहते है, जिसके वजह से सेहत पर बूरा असर पड़ता है इसलिए जरूरी है खांसी होने के वजहों के बारे में जानना ।

  • टीबी के वजह से होने वाली खांसी
  • अस्थमा (दमा) के रोगियों को
  • एलर्जी वालो को
  • प्रदुषण तथा धूल-मिट्टी के वजह से
  • निमोनिया के ग्रस्त व्यक्तियों को
  • बदलते मौसम के कारण
  • फेफड़ों का कैंसर
  • गले में टॉन्सिल की वजह से
  • धुम्रपान के करने से
  • ठंडी चीज़ें के सेवन से जैसे –कोल्डड्रिंक या आइसक्रीम

खांसी से होने वाली परेशानियां निम्न हैं

  • गले में दर्द तथा ख़राश होना *
  • तेज बुखार आना
  • ठंडा लगना
  • सिरदर्द होना
  • अत्यधिक थकान महसूस होना
  • सीने में दर्द,सीनें में जलन, सांस लेने में दिक्कत तथा नाक बंद होना
  • उल्टी आना
  • नींद की समस्या
  • भूख न लगना
  • खांसी के जल्दी ठीक होने पर इसे सामान्य माना जाता है ,हालाँकि यही खांसी ज्यादा समय तक रहें तो यह चिंता का वजह बन सकता है। खांसी होने पर जल्द ही इलाज करना चाहिए ।
    हम आपको कुछ घरेलू उपाय बता रहें है जैसे –

1. नमक के पानी से ग़रारे करने पर होगा फायदा
एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच नमक डालकर ग़रारे करने से जल्दी आराम मिल जाता है। यह तरीका सबसे आसान होता है । यह एंटीबैक्टीरियल एजेंट के तरह काम करते हुए गले को नमी, ख़राश और दर्द से राहत देता है। इसलिए खांसी के होने पर इसे कुछ दिनों तक नियमित रूप से सुबह – शाम करें ।

Pic: sheroes

2. शहद का इस्तेमाल
शहद और अदरक या शहद या नींबू के रस को मिलाकर इसे दवा की तरह दो बार पीनें से खांसी में राहत मिलेगी क्यों कि शहद में एटी-माइक्रोबियल की मात्रा होने के कारण वह उन बैक्टीरिया और वायरस को भी मारता है ।

3. अदरक का सेवन
अदरक में एंटीबायोटिक की गुण पाया जाता है । इसे शहद के साथ मिलाकर खाने से दर्द से राहत मिलती है कफ, गले में खराश को कम करने में मदद करता है ।और इसमें एंटी-वायरल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है

4. काली मिर्च

काली मिर्च और शहद दोनों को मिलाकर पीने से आपको खांसी से राहत मिल सकती है तथा काली मिर्च, सर्दी-खांसी को कम करने के लिए एक आयुर्वैदिक दवा की तरह काम करती है । दो चम्मच शहद एक कप गर्म पानी में कालीमिर्च पाउडर को मिलाए तथा इस चाय का सेवन करें । खांसी के दौरान इसको दिन में दो बार लें सकते है ।

5. लहसुन का सेवन
लहसुन में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है लहसुन की दो कली को एक गिलास दूध में उबालें फिर सेवन करें इससे गले के दर्द तथा खांसी में तुरंत राहत मिलती है ।

Pic: food-dee-dum

6. दूध में हल्दी पाउडर का सेवन करें

खांसी होने पर दूध में एक चुटकी हल्दी पाउडर मिलकर पी सकते है। यह आप तब तक लें सकते हो जब तक आपकी खांसी ठीक न हो, रात को सोते समय पीने से ज़्यादा फायदा होगा तथा नींद भी अच्छी आएगी । गर्म दूध के पीने से गले को नमी तथा ख़राश में आराम मिलती है । हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है जिसकी वजह से पुरानी से पुरानी खांसी को दूर करने में मदद करती है ।

कैसे करें खांसी से बचाव

तला हुआ तथा ज्यादा मसालेदार खाद्य-पदार्थ से बचें

मौसम के बदलते समय ठंडी चीज़ें का सेवन न करें जैसे :- आइसक्रीम या कोल्डड्रिंक आदि

अधिक मात्रा में पानी पीए

अगर कही बाहर धूप या गर्मी से आये तो तुरंत ठंडी चीज़ों या ठंडा पानी पीने से बचें

बाहर गर्मी से आकर कुछ समय रुककर नहाए तुरंत न नहाएं

जब भी बाहर जाए तो मुंह पर मास्क या कपड़ा बांधकर रखनें से आपके मुंह में धूल-मिट्टी नहीं जाएगी

गर्म चीज के खाने के बाद तुरंत ठंडा नहीं खाएं

ज़्यादा ठंडे फलों को न खाएं

धूम्रपान से बचें
अगर आपको खांसी की समस्या अधिक हो तो देर न करें तथा डॉक्टर से सलाह लेकर खांसी की दवा लें।

गर्दन दर्द के कारण और उसके निवारण

0

आमतौर देखा जाता है जो लोग घंटों बैठकर काम करते है उनको अधिकतर सर्वाइकल स्पेन्डिलाइसिस की संभावना हो सकती है । गर्दन में दर्द का कारण स्वास्थ्य संबंधित पुरानी चोट, गलत तरीके से बैठना, लेटकर टीवी देखना, देर तक बिस्तर में लेटना तथा तकिये का इस्तेमाल ज्यादा ऊँची या नीची करना के वजह से भी हो सकती है ।सर्वाइकल स्पेन्डिलाइसिस में आपकी गर्दन के साथ रीढ़ की हड्डी भी प्रभावित होती है।

Pic: medicalnewstoday

गर्दन दर्द के लक्षण
जब आप के गर्दन में दर्द होता हैतो उसके कुछ लक्षण इस प्रकार के हो सकते हैं।

  • गर्दन को छूने पर दर्द महसूस होना
  • खाना निगलते समय दर्द होना या कठिनाई होना
  • तेज गर्दन दर्द से चक्कर आना, तथा उल्टी जैसा होना
  • लसिका ग्रन्थि में सूजन आना
  • गर्दन का सुन्न होना
  • तेज बुखार आना
    गर्दन दर्द का समस्या गर्दन के नसों के दबने के वजह से होती है । अगर यह दर्द एक सप्ताह से ऊपर हो तो इसे अनदेखा न करें और तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें ।

गर्दन दर्द होने के कारण

गर्दन दर्द निम्नलिखित कारणों से होता है जो इस प्रकार है

Pic: yaasa

  • गर्दन दर्द का सामान्य कारण जैसे – बिस्तर पर बैठकर पढ़ने से, स्टीयरिंग के ऊपर झुककर कई घंटो तक गाड़ी चलाने से भी गर्दन में दर्द हो सकती है। हालाँकि अधिकतर दर्द मांसपेशियों के खिचाव के कारण होता है ।
  • बढ़ती उम्र के हिसाब से शरीर के अन्य जोड़ों की जैसे ही गर्दन की जोड़ भी घिस जाते है । इसी के कारण गर्दन में अनेक समस्या उत्पन्न हो जाती है ।
  • गर्दन की हड्डी या डिस्क कई बार अधिक जगह घेर लेती है । इसी वजह से गर्दन दर्द शुरू होता है ।
  • गर्दन पर चोट लगने की वजह से गर्दन दर्द हो सकता है
  • यह दर्द रोग की वजह से होता है, जैसे – रुमेटी गठिया तथा रुमेटाइड अर्थराइटिस, दिमागी बुखार या कैंसर की आदि। इसलिए गर्दन दर्द के रोकथाम के लिए व्यायाम अति आवश्यक है ।

Pic: activehealthcentre

आइए जानते है दर्द का समाधान कैसे करें
जी हां अगर आपको गर्दन दर्द की शिकायत हैं तो इसका समाधान करने के लिए आपके पास अनेक प्रकार के तरीके है जैसे : दर्द के स्थान पर मसाज करना तथा बर्फ को लगाना परन्तु इस दर्द से बचाव के लिए आप घर हो या दप्तर में सबसे पहले अपना पोस्चर सही बनाएं रखें । यदि आप का काम दिनभर कुर्सी पर बैठकर करना है तो सीधा बैठें तथा आराम से दोनों पैरों को जमीन पर रखकर कंधों को रिलेक्श दें । मांसपेशियों को आराम देने के लिए अलग -अलग पोजिशन में बैठे । यदि आप कम्प्यूटर के सामनें बैठकर काम करते हो तो अपना वर्क स्टेशन ठीक ढंग से रखें । तथा मानीटर का टाप आखों के सामने रखें । अपने जीवनशैली मैं तनाव तथा डिप्रेशन से बचें। ज्यादा देर तक टेलीफोन पर बातों न करें हो सके इसके जगह हैड या स्पीकर फोन का उपयोग कर सकते है ।इसके अलावा

Pic: activehealthcentre

  • मोबाइल फोन को कंधें के सहारा लेतें हुए बातें न करें
  • सोतें समय गर्दन को टेडी न करें
  • तकिये का इस्तेमाल सही तरीके से करें
  • तकिया न ज्यादा ऊँचा हो न ज्यादा नीचे होना चाहिए
  • अगर आप बेड पर पढ़तें हो तो ध्यान दीजिए कि अपना पोस्चर सही रहें
  • अपनी किताबों को किसी ऐसे स्थान पर रखें जिससे किताब को आसानी से पकड़कर तथा गर्दन को टेडी न करनी पड़ें
  • कार की सीट को अपराइट तरीके से रखें
  • हमेशा तनकर खडें हो तथा पीठ को सीधी रखें
  • धुम्रपान से बचें
  • संतुलित आहार लें
  • सुबह -सुबह टहलने से भी गर्दन दर्द में राहत मिलती है इसलिए हमेशा मोर्निग वाक,व्यायाम आदि करें । ऐसे करने पर गर्दन दर्द से छुटकारा मिल सकता है ।
  • गर्दन दर्द अर्थराइटिस या इन्फेक्सन के वजह से भी हो सकता है इस स्थिति में अच्छी थैरेपी के लिए डाक्टर से उचित सलाह लें
    अधिकतर लोगों में गर्दन दर्द होने का आम समस्या गलत पोजिशन को ही दर्शाया है इसलिए आप अपने स्वस्थ जीवनशैली में गर्दन दर्द से बचने के लिए इस समस्या का हल कर सकतें है ।

सिरदर्द की समस्या के कई प्रकार

0

बदलती जीवनशैली और असंतुलित खाद -पदार्थों के सेवन करने से सिरदर्द की समस्या आम हो गई है । सिरदर्द का मतलब है कि सिर के एक या एक से ज्यादा हिस्सों में दर्द तथा गर्दन के पीछे हिस्से में हल्के या तेज़ दर्द का होना। सिर दर्द अनेक कारणों से होते है, जैसे – नींद पूरी न होने से , दांतों में दर्द के वजह से, थकान लगने पर , दवाई की गलत सेवन से, चश्मे का नंबर बढ़ने तथा मौसम के चेंज हो जाने पर हो सकता है। सिरदर्द अलग-अलग प्रकार के होते है यह नहीं कह सकते है कि सारे सिरदर्द में डॉक्टर की जरूरत पड़े या सारे सिरदर्द सामान्य हों । आइए जानते है सिर दर्द के बारें में ।

Pic: moov

1. तनाव यानी की टेंशन
यह सिरदर्द बहुत ही सामान्य है । ऐसे दर्द में सिर के दोनों तरफ तेज दर्द होने लगता है तथा सिरदर्द के कारण गर्दन तथा कंधे की मांसपेशियों में बहुत समस्या आ जाती है । अक्सर देखा जाता है कि इस तरह के सिरदर्द में तनाव, नींद की समस्या या सिर पर चोट लगने के कारण होता है ।
नोट -यह अधिक सर्दी, एयर-कंडीशन के संपर्क में आने के कारण हो सकता है । गर्दन और सिर पर ठंडी हवा लगने से भी सिरदर्द हो सकता है । तथा तनाव यानी कि टेंशन के कारण सिरदर्द में फिज़ियोथेरेपी के करने से बहुत फायदेमंद हो सकता है ।

2. माइग्रेन से सिरदर्द
माइग्रेन से आजकल बहुत से लोग परेशान है। क्योंकि ख़राब खानपान और बिजी लाइफस्टाइल के कारण यह एक बड़ी समस्या बन चूकी है। कभी -कभी यह दर्द असहनीय हो जाता है तथा कई बार कुछ मिनटों में सही हो जाता है। यह सिर के एक तरफ होने के कारण इसे अधकपारी भी कहा जाता है। इसे एक आनुवांशिक रोग भी माना जाता है। इस बीमारी में रोगी के जी मिचलाना, उल्टी होना, दृष्टि-दोष, सुस्ती, बुखार और ठंड भी अधिक लगती है ।
माइग्रेन दर्द ज्यादा बढनें के वजह है टाइम से खाना नही खाना,नींद पूरी न लेना, तेज खुशबू, हार्मोंन में बदलाव, एलर्जी, शराब पीने से, डिप्रेशन या तेज आवाज की वजह से हो सकता है ।

Pic: clinicalpainadvisor

3. क्लस्टर सिरदर्द
इस तरह के सिरदर्द कभी भी किसी ही समय शुरु होता है तथा यह दर्द बहुत ही तेज एवं पीड़ादायक भी होता है। यह दिन में कई बार हो सकता है अधिक समय तक नही होता है यह दर्द एक ही समय पर शुरु होता है । इस सिरदर्द की वजह है, तेज रोशनी, धूम्रपान, थकावट, तेज गर्मी आदि ।

4. साइनस में होने वाला सिरदर्द

मौसम के बदल जाने पर सिरदर्द का होना सामान्य है। साइनस सिरदर्द तेज तथा कई बार होने के वजह से यह दर्द सिर के आगे के तरफ तथा चेहरे पर अनुभव होता है यह सिर दर्द अधिकतर सुबह के समय होता है तथा व्यक्ति अपने सिर नीचे की और झुकता है तो यह दर्द तब महसूस होता है। इस तरह सिरदर्द में कई प्रकार की समस्या आ जाती है जैसे – आंखों पर, मथें पर, गाल पर ,ऊपरी दांत में दर्द, बुखार, ठंड लगना, चेहरे पर सूजन और सिर के अगले हिस्से में दबाव और दर्द होता है। यह अधिकतर धूल-मिट्टी, प्रदूषण, संक्रमण, सर्दी-ज़ुकाम, बुख़ार, ज्यादा ठंडी हवाएं चलने कारण हो सकती है ।

Pic: fashionnewsera

सिरदर्द को नजरंदाज न करें और बरतें सावधानियां
अगर आपको सिरदर्द की समस्या हो तो सबसे पहले तनाव कम करें तथा पर्याप्त नींद लें फिर भी इन सबसे आराम न मिले तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें सिरदर्द के उचित इलाज करें । आपकी लापरवाही की वजह से समस्या बढ़ सकती है । कई बार असंतुलित भोजन के कारण गैस बनने भी सिरदर्द हो सकता है आप अपने खानपान और रुटीन पर ध्यान दें तो आप सिरदर्द से निजात पा सकतें है।

किडनी फेल होने के लक्षण

0

किडनी मानव शरीर का बहुत अहम और नाजुक हिस्सा है। शरीर की गंदगी को सफाई करने के साथ ही किडनी का सबसे बड़ा कार्य है कि खून को फ़िल्टर करता है। तथा हानिकारक तत्व को पेशाब के रूप में शरीर से बाहर निकलता है। यदि हमारे शरीर से गंदगी बाहर न आए तो इस स्थिति में जान भी जा सकती है । आजकल असंतुलित खाद्य-पदार्थो के सेवन, समय पर भोजन न करना, शरीर में पानी की कमी होनें के कारण व्यक्ति की किडनी यानि गुर्दा में भार बढ़ जाता है, और किडनी काम करना बंद कर देती है तथा धीरे -धीरे यह ख़राब हो जाती है । आइए आपको बता दें कि किडनी के ख़राब होने का लक्षण क्या- क्या है

Pic: empowher

यूरिन में ब्लड आना
अगर व्यक्ति के यूरिन यानी की पेशाब के रास्ते ब्लड आ रहा हो तो यह किडनी के ख़राब होने का लक्षण हो सकता है । इस स्थिति को नजरंदाज न करें किसी यूरोलाजिस्ट से परामर्श लें।

Pic: dailyhunt

उल्टी होना
किडनी में दिक्कत की वजह से पेट में दर्द तथा बार -बार उल्टी आनें का संकेत हो सकता है ।

यूरिन की समस्या
दिन में कई बार और बार -बार पेशाब आना, मूत्रविसर्जन के समय अगर पेशाब में जलन व बैचेनी हो तो यूरिन इन्फेक्सन के कारण भी हो सकता है। किन्तु बार -बार होने पर यह समस्या को नजर अंदाज नही करें । ऐसे में हालत को जाननें की कोशिश करें तथा चेक -अप करवाए ।

शरीर में सूजन आना
आंखो के नीचे बहुत सुजन आ जाना यह भी किडनी फेल होने की निशानी हो सकती है वहीँ पूरे शरीर में सूजन आना भी किडनी डैमेज होना का लक्षण हो सकता है किडनी के ख़राब होने पर कई विषैले पदार्थ जमा हो जाते है जिसके कारण पेशब का कलर गाढ़ा हो जाता है ।

Pic: youtube

बुखार की समस्या
बार -बार तेज बुखार का आना या ठण्ड लगना इस लक्षण से पता चलता है कि किडनी सही से कार्य नही कर रही है ।
पेट में दर्द
आमतौर पर पेट के दायी तथा बायीं तरफ बहुत तेज दर्द होना किडनी के ख़राब होने के लक्षण हो सकते हैं।

साँस लेने में दिक्कत
शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाने के कारण यही पानी फेफड़े में भर जाता है, ऐसे में फेफड़े अपने कार्य करना बंद कर देते है । ऐसे में मरीज को सांस लेने में परेशान होती है । अधिकतर जो लोग धुम्रपान करने वालों को यह समस्या ज्यादा होती है, साँस लेने में दिक्कत हो तो यह किडनी जैसे समस्या का लक्षण हो सकती है ।

Pic: zeenews

बेहोश होना
अगर आदमी बिना किसी भी रोग का बेहोश एवं बैचेनी महसूस करता हैं तो बहुत ही चिंता का विषय है । इस कारण भी किडनी का फेल होने का संकेत हो सकता है ।
इन सभी लक्षणों को सावधानी से पढ़ें अपनी शरीर में किसी भी प्रकार की लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह लें क्योंकि मनुष्य की जिन्दगी बहुत ही अनमोल होती है, इसे स्वस्थ एवं दुरस्त रखना अपने हाथों में है।

किडनी का कैसे करें बचाव

0


किडनी शरीर का बहुत ही अहम हिस्सा होता है । किडनी का कार्य है, रक्त में मौजूद पानी तथा विषैले पदार्थों को अलग करना तथा ब्लड साफ करना, यूरिन बनाना, हार्मोन बनाना आदि। इससे यह स्पष्ट होता है कि किडनी हमारे शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण भाग है । अगर हम उचित देखभाल नहीं करते है तो किडनी से संबंधित बहुत प्रकार की बीमारियां हमारे शरीर में होती है । इसका उपचार सही समय पर नहीं करने पर स्थिति गंभीर भी हो सकती है । हम आपको किडनी के सुरक्षा से संबधित कुछ कारण एवं उपाय आपको बताएँगे।

Pic: recipes

किडनी फेल होने के कारण
आजकल बदलती जीवनशैली में आमतौर पर देखा जाता है, कि भागदौड़ की जिंदगी की वजह से खान – पान में ध्यान नहीं दें पाते है, तथा जंक फ़ूड तथा फास्ट फ़ूड को लोग बड़े ही मजे (चांव )से खा लेते हैं।, जिसकी वजह से लोगों के जीवन से संतुलित आहार दिन प्रतिदिन गायब होते जा रहें है । किडनी से ग्रस्त लाखों लोग अपनी जान गवां देतें है क्योकि बहुत से लोगों को किडनी ख़राब होने का पता नहीं चलता है । इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। 50 प्रतिशत मरीज ऐसे होते है जिन्हे बीमारी का पता तब चलता है, जब 65 या 70 प्रतिशत किडनी ख़राब हो चूकि होती है फिर किडनी को ट्रांसप्लांट करवाना पड़ जाता है । किडनी से सम्बंधित बेसिक नॉलेज हर व्यक्ति को होनी चाहिए ।

Image Source: Health Europa

शरीर में पानी की मात्रा कम होना
सबसे बड़ा कारण है, शरीर में पानी की कमी होना, पानी शरीर के लिए बहुत ही जरूरी होती है । शरीर में पानी की कमी के कारण किडनी पर बहुत बुरा असर पड़ता है, क्योंकि किडनी खून को साफ करने के साथ ही ख़राब पदार्थों को भी अलग करती है, जिसके लिए शरीर को भारीमात्रा में पानी की आवश्यकता होती है ।

Pic: capitalfm

अत्यधिक नमक का सेवन करना तथा मीठा खाना
बहुत से लोग खाने में नमक का सेवन अत्यधिक करते है, शायद उन्हें पता नहीं कि किडनी पर इसका बुरा असर पड़ता है। अधिक नमक खानें से हमारे शरीर में सोडियम बढ़ने के साथ ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है, इसलिए खाने में नमक की मात्रा कम लें । मीठा ज्यादा खाने से यूरिन से प्रोटीन निकलने लगता है, और इसी से किडनी की समस्या हो जाती है ।

पेशाब को रोकना तथा नींद कम लेना
कुछ लोगों की आदत होती है, पेशाब यानी कि यूरिन के प्रेशर को रोक कर रखने की , जो कि बहुत ही खतरनाक होता है, पेशाब के प्रेशर को रोकने से किडनी के ख़राब होने और पत्थरी होने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए भरपूर पानी पियें और पेशाब को रोकें नहीं बल्कि समय पर पेशाब को करते रहें।

तम्बाकू तथा धूम्रपान करना – धूम्रपान या तम्बाकू का सेवन करने से फेफड़े के साथ ही लिवर से संबंधित रोग भी हो सकते हैं और बहुत से बीमारियों का सामना भी करना पड़ सकता है । इसलिए इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए ।

Pic: steemit

किडनी के ख़राब करने में कुछ अन्य आदतें
अधिक शराब पीना, पर्याप्त आराम न करना, देर तक भूखा रहना, असंतुलित भोजन का करना, अत्यधिक मांस खाना आदि किडनी को हानि पहुंचा सकता है।

किडनी को स्वस्थ कैसे रखें उपाय

  • अगर किडनी में स्टोन की समस्या हो तो हर रोज विटामिन बी 6 का सेवन करें इसी के साथ विटामिन डी तथा सी के सेवन से किडनी ख़राब होने से बच सकती है।
  • किडनी रोगियों को सुबह शाम सब्जियों के रस पीना चहिए जैसे – गाजर,लौकी,खीरा,पत्तागोभी, आलू, तरबूज आदि का रस पीने से बहुत ही फायदा रहता है।
  • गुर्दे के मरीजों को रुक -रुक कर आधे – आधे गिलास पानी पीना चाहिए जिसकी वजह से किडनी में मौजूद विषैले पदार्थ यूरिन के रास्ते बाहर निकलने में सहायक होता है ।
  • संतुलित भोजन खाये तथा प्रतिदिन व्यायाम के साथ अपने वजन पर नियंत्रित करें । इस बीमारी को रोकथाम और शीध्र इलाज के लिए चैक-अप करवाना अति आवश्यक है ।

कैसे करें पीठ दर्द को कम?

0


आज के आधुनिक जीवनशैली में पीठ दर्द की शिकायत हर उम्र के व्यक्तियों की समस्या बन चूकी है । पीठ दर्द से व्यक्ति को शारीरिक गतिविधियों को करने में तकलीफ होती है, जैसे – झुकना, बैठना, उठना, पेडू और कूल्हों के पास दर्द आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है। देखा जाता है कि यह अकसर 45 से 60 उम्र के व्यक्तियों में समस्या अधिक होती है, क्योंकि दिन प्रतिदिन उम्र के हिसाब से शरीर में खून की कमी, कमजोरी,विटामिन डी, तथा कैल्शियम की कमी से यह समस्या हो जाती है, तथा जिन लोगों को पीठ दर्द होती है उन्हें हड्डियाँ मजबूत रखनें के लिए अपनें खानपान में इन चीजों को शामिल करना चाहिए, जैसे – कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन सी, विटामिन डी-3, साथ ही अनाज, लौकी, मछली, हरी सब्जियों और फलों का सेवन करना चाहिए । पीठ दर्द को नजर अंदाज न करें क्योकि ध्यान नही देने पर बड़ी समस्या बढ़ सकती है। पीठ दर्द से निजात पाने के लिए प्रतिदिन घरेलू काम, एक्सरसाइज, तथा कसरत करनें पर आपको फायदा मिल सकता है ।



Pic: dusbus

पीठ दर्द के कारण

  • अधिक वजन होने के कारण ।
  • अत्यधिक भारी सामान के उठाने पर ।
  • झटके के साथ उठनें या बैठनें से ।
  • गलत शारीरिक गतिविधियाँ करने से ।
  • मांसपेशियों में खिचाव के कारण ।
  • बहुत ज्यादा थकान लगने के कारण ।
  • लगातार कुर्सी पर बैठने से ।
  • रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर की वजह से ।
  • गुर्दें में संक्रमण के कारण ।
  • ऊंची हील वाली सैंडल पहनने से

पीठ दर्द से निजात पाने का उपाय

  • सबसे पहले शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ाए, सुबह -शाम को एक – एक गिलास दूध पिएं तथा इसके अलावा आप प्रतिदिन सुबह की धूप में 30-35 मिनट तक बैठने या टहलनें का प्रयास करें । सूर्य की किरण से शरीर को विटामिन डी प्राप्त होने के साथ ही हड्डियाँ भी मजबूत होंगी ।
  • लहसुन की चार-पांच कलियों को सरसों या नारियल के तेल में खूब अच्छे से गर्म करें तथा ठंडें होनें पर इस तेल को अपनी हल्के हाथों से मालिश करें। धीरे-धीरे कमर दर्द से राहत मिलेगा ।
  • बढती उम्र के साथ पीठ दर्द के अलावा शरीर के अन्य अस्थियों के साथ रीढ़ की हड्डी का जोड़ भी कमजोर हो जाता है, इसके अलावा शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण कंधा, बांह, गर्दन और पीठ दर्द की समस्या हो जाती है। इस प्रकार की समस्या से बचने के लिए सुबह जल्दी उठना, टहलना, व्यायाम आदि करने से आप अपने शरीर को स्वस्थ एवं दुरुस्त रख सकते हैं ।
  • पीठ दर्द के होने पर आप एक टब में गर्म पानी बनाए उसमें हल्का सा नमक मिलाए फिर एक तौलिया को डालकर और निचोड़कर अपनी पेट के बल लेटें तथा तौलिये को दर्द के स्थान पर रखें और सिकाई करें इससे आपको आराम मिलेगा ।
  • अगर आपको चोट लगने के वजह से पीठ दर्द हो रही हो तो आप बर्फ से सिकाई करे । बर्फ के सिकाई से मांसपेशियों में हो रही सूजन एवं दर्द से छुटकारा मिलता है ।
  • आप अपने खान -पान पर विशेष ध्यान दें तथा वजन को भी नियंत्रित करें ।
  • तुलसी के 6 से 8 पत्ते को एक गिलास पानी के आधे होने तक उबालें जब ठंडा हो जाए तो उसमे एक चुटकी नमक मिलाकर पीने से पीठ दर्द में आराम मिलेगा ।

Pic: khoobsurati.

पीठ दर्द से बचाव के लिए ये भी अपनाएं

  • मलाई रहित दूध में हल्दी डालकर पी सकते है ।
  • नियमित अपने आहार मे कैल्शियम और विटामिन सी की मात्रा लें ।
  • वसा युक्त भोजन न करे तथा प्रतिदिन संतुलित आहार लें ।
  • अगर आपकोपीठ दर्द हो तो उस दर्द में व्यायाम न करें ।
  • अत्यधिक बैठें मत कुछ न कुछ काम को करते रहें ।
  • उठना,बैठना, चलना, सोना आदि का पोस्चर हमेशा सही रखें ।
  • नियमित एक्सरसाइज करे ।
    अगर आपके पीठ में दर्द है तो आप ये तरीके आजमा सकते हो लेकिन अत्यधिक दर्द होने पर चिकित्सक से जरुर परामर्श लें

गर्मियों में छाछ पीने के हैं कई फायदे

0

गर्मियों के मौसम में छाछ,मीठी लस्सी आदि का सेवन बहुत ही अच्छा लगता है। छाछ शरीर को ठंडक प्रदान करने के साथ ही पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद होता है। क्योकि इसको बनाने में दही को मथकर मक्खन अलग निकल दिया जाता है। तथा यह एक तरल पेय होने के साथ वसा रहित होती है । इसमें विटामिन तथा खनिज प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, यह खाना पचाने में मदद करता है । गर्मियों में छाछ की तुलना अमृत से की जाती है, छाछ शरीर को हाइड्रेड रखने एवं पेट को भी गर्मी से शांत रखने में मदद करता है । तो जानते है छाछ के फायदे के बारे में



Pic: rohtakmedia

छाछ से होने वाले फायदे

ब्लड प्रेशर को कंट्रोल – प्रतिदिन छाछ के सेवन करने से ब्लड प्रेशर को घटने में सहायक होता है, क्योंकि इसमें बायोएक्टिव प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण हृदय संबंधी बिमारियों का खतरा कम होता है ।

कॉलेस्टॉल को कम करने में सहायक – प्रतिदिन छाछ के पीने से शरीर में कॉलेस्टॉल की मात्रा कम हो जाता है तथा छाछ को एक आयुर्वेदिक औषधि भी माना जाता है



Pic: virarjun

कब्ज को दूर करें – जब कभी हम असंतुलित भोजन करते है तो उसके पश्चात पाचन तन्त्र पर दबाव पड़ने के कारण पेट में गड़बड़ी होने से दस्त (डायरिया) तथा कब्ज हो जाती है । ऐसे में छाछ इन खतरे से बचाने में सहायता करता है ।

वजन करे नियंत्रित – छाछ में पोषक तत्वों के होने के साथ ही एंजाइम भी अधिक मात्रा में होता है, छाछ को भोजन करने के बाद में पीने से शरीर में धीरे -धीरे चर्बी भी कम हो जाती है,जिससे वजन नियंत्रण में मदद मिलता है । छाछ में वसा तथा कौलोरी की मात्रा नही होता है । गर्मियों में प्रतिदिन छाछ के पीने से शरीर में पानी की कमी को पूरी होती है तथा शरीर को एनर्जी प्रदान करता है । छाछ में विटामिन बी, कैल्शियम, प्रोटीन,और पोटैशियम प्रचुर मात्रा पाया जाता है ।

पेट में गैस (एसिडिटी) से राहत – एसिडिटी होने पर छाछ में कुछ आवश्यक मसाले डालकर सेवन करना चाहिए जैसे: काली मिर्च, जीरा, नमक, अदरक आदि को मिलाकर पीने से गैस की जलन से राहत मिलेगी ।



Pic: khoobsurati

त्वचा के सौंदर्य बढ़ाए – छाछ त्वचा को मॉइस्चराइज के साथ ही प्राकृतिक चमक भी देता है। तथा छाछ का प्रयोग फेस मास्क के रूप में किया जाता है, यह त्वचा को नमी, चमक तथा झुर्रिया को कम करने में सहायता करता है तथा इसके साथ ही आप इसे बालों पर भी लगा सकते है जिससे आपके बाल मुलायम और चमकदार हो जाएंगे ।

छाछ के अनेक फायदे होने के साथ ही कुछ नुकसान भी है आइए एक नजर इस पर डालते हैं ।

छाछ के पीने से होने वालें नुकसान

कोई भी व्यक्ति जिसे गुर्दे की समस्या है या इससे सम्बंधित किसी रोग से पीड़ित हो तो उसे छाछ का सेवन डॉक्टर के परामर्श से करना चाहिए।

एक्जिमा जैसी त्वचा के समस्या से पीड़ित व्यक्ति को भी छाछ का सेवन नहीं करना चाहिए ।

छाछ में सैचुरेटेड फेट होने के कारण कुछ गंभीर स्थिति में कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ सकता है । जिससे ह्रदय रोगियों को नुकसान पहुंच सकता है ।



Pic: sanjeevnitoday

छाछ का सेवन सर्दी -जुकाम तथा खांसी की स्थिति में नहीं करना चाहिए ।

अगर आपको बुखार एवं कमजोरी महसूस हो रही हो तो छाछ का सेवन नहीं करना चाहिए ।

जब कोई व्यक्ति छाछ का अत्यधिक सेवन करता है तो ऐसे में उसे पेचिस (डायरिया) या उल्टी जैसे शिकायत हो सकती है ।

Recent Posts

गर्मी के मौसम में बच्चों का कैसे रखें ख्याल?

बच्चों का शरीर बहुत ही नाजुक होता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बहुत कमजोर होती है । और यही...

गर्मी का मौसम डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरनाक

गर्मी के मौसम में दिल के मरीजों को अत्यधिक थकान, तनाव (डिप्रेशन) तथा ब्लडप्रेशर बढ़ने की समस्या हो सकती है। ठीक...

‘स्तनपान’ शिशु के लिए अमृत, तो माँ के लिए भी फायदेमंद

ही नहीं बल्कि जीवन की धारा है। मां का दूध सुपाच्य होता है । स्तनपान करने से मां और बच्चें के बीच...

पेट्स के साथ बढ़ते बच्चों के फायदे

जब एक घोड़ा आपके बच्चे को ले जाता है, जो छोटा और शक्तिहीन महसूस करता है, तो उसका बहुत आंदोलन आपके बच्चे...

स्वस्थ जीवन के लिए अपनाएं ये जरुरी आदतें

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती को बनाए रखने के लिए सन्तुलित भोजन के साथ नियमित शारीरिक व्यायाम की आवश्यकता होती है। अच्छे स्वास्थ्य और...