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गर्मियों में अदरक क्यों नहीं खाना चाहिए?

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अदरक एक ऐसे मसाले के तौर पर यूज किया जाता है जो स्वाद बढ़ा देता है, खासकर चाय में अदरक के दीवानों की संख्या कम नहीं है। कई जगह पर तो चाय अदरक के बिना बनती ही नहीं है और कई लोग ऐसे भी हैं जो मसालेदार खानों में अदरक का सेवन भरपूर मात्रा में करते हैं। वैसे तो अदरक लाभदायक भी है किंतु बात जब गर्मियों की होती है तब मामला थोड़ा बदल जाता है। अगर गर्मियों में भी आप अदरक का ढ़ेर सारा सेवन करते हैं तो यह आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। आइए देखते हैं कैसे-

गैस्ट्रोइनटेस्टाइनल से हो जाएंगे परेशान
गर्मियों में अदरक का ज्यादा सेवन करने से आपके हेल्थ पर नेगेटिव इंपैक्ट पड़ना स्वाभाविक है। बताया जाता है कि अदरक के अधिक सेवन से दस्त और हार्टबर्न जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त शरीर में भारी मात्रा में एसिड जमा हो जाता है और जाहिर तौर पर इसे एसिडिटी और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल जैसी समस्या स्वाभाविक रूप से होती है।

गाल ब्लैडर की बड़ी समस्या
आपको यह जानकर आश्चर्य लगेगा, लेकिन अदरक का अधिक मात्रा में सेवन करने से यह पित्त की थैली में समस्या बढ़ा देता है। गर्मी में अत्यधिक अदरक खाने से पित्तस्राव बढ़ जाता है और अगर पित्ताशय का रोग है तो इससे पीड़ित लोगों को और भी समस्या होती है। लेडीस को खासतौर पर गर्मियों में अदरक से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह गर्भपात तक कर सकता है।

Pic: healthline

कब्ज
जाहिर तौर पर अदरक गर्म तासीर का होता है और एसिडिटी इससे बढ़ती ही है। इसके ज्यादा सेवन से सीने में जलन और कब्ज इस के सामान्य लक्षण हैं, तो इससे ग्लाइसीमिया की शिकायत होने की संभावना भी बढ़ जाती है। गर्मियों में अदरक का सेवन उन रोगियों के लिए घातक हो जाता है जो खून के थक्के को रोकने के लिए दवा ले रहे होते हैं। निश्चित रूप से यह खून को पतला भी करता है।

कम रक्तचाप होना
जी हां! अगर आप अदरक की चाय भारी मात्रा में पीते हैं तो आपका ब्लड प्रेशर कम हो जाता है और अगर आप पहले से ही लो ब्लड प्रेशर का सामना कर रहे होते हैं तब भारी मात्रा में आपका ब्लड प्रेशर कम हो जाता है और ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर का चक्कर लगाना पड़ सकता है।

तो गर्मियों में अदरक के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है और इसके वाजिब कारण भी आपको समझ आ गए होंगे। हां आप कम मात्रा में अपने स्वास्थ्य की जरूरतों के अनुसार इसका प्रयोग अवश्य कर सकते हैं, किंतु गर्मियों में इससे बचें तो ज्यादा बेहतर होगा।

हाई ब्लड प्रेशर और घरेलू उपचार

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ब्लड प्रेशर की समस्याएं आज के समय में आम हो गई हैं और अगर इस समस्या को अनदेखा किया जाता है तो यह दिल की बीमारियों में परिवर्तित हो जाता है। इसके अतिरिक्त चिड़चिड़ापन और तनाव इस समस्या में आम है। इसीलिए समय रहते इस समस्या पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके लिए न केवल आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए बल्कि घरेलू उपचारों को भी आजमाना चाहिए जिनका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता।

आइए देखते हैं घर पर आप किस प्रकार से हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के तरीके आजमा सकते हैं-

लहसुन हाई ब्लड प्रेशर की समस्या में रामबाण हो सकता है। इसे आप सुबह खाली पेट चबा चबा कर एक गिलास पानी के साथ निगल लें। अगर आपको चबाने में समस्या आ रही है तो आप इसे निगल भी सकते हैं या फिर इसका रस निकाल कर थोड़ा पानी (20 से 25 एम एल) के बीच मिलाकर पी सकते हैं।

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लहसुन की भांति ही अजवाइन और मेथी भी हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए बेहद उपयोगी है। इसके लिए आपको एक स्पून मेथी और अजवाइन पाउडर को पानी में भिगोकर रखना पड़ेगा और सुबह आप इस पानी को पी लें तो आपकी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी।

हाई ब्लड प्रेशर रोगियों को अपने शरीर की मालिश भी करानी चाहिए ताकि ब्लड सरकुलेशन बेटर ढंग से शरीर में हो सके। जब आपका ब्लड सरकुलेशन सही होता है तो आपको उच्च रक्तचाप नियंत्रित करने में खासी मदद मिलती है। इसीलिए 1 सप्ताह में कम से कम चार से पांच बार आप पूरे शरीर पर तेल से मालिश कराने की कोशिश करें।

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व्यायाम और खासकर प्राणायाम उच्च रक्तचाप में बेहद लाभकारी होता है। आप टेलीविजन पर या फिर यूट्यूब पर भी कई ऐसे प्राणायाम आसनों को देख सकते हैं जो हाई ब्लड प्रेशर में आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं।

इसी प्रकार खानपान में आपको सावधानी रखनी पड़ेगी और हाई ब्लड प्रेशर पेशेंट्स को भोजन में नमक कम ही खाना चाहिए। अगर नमक की मात्रा भोजन में ज्यादा होगी तो हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ेगा, इसीलिए इसे बेहद नियंत्रित मात्रा में इस्तेमाल करें।

दूध में दालचीनी और हल्दी मिलाकर अगर आप इसका नियमित सेवन करते हैं तो हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से निजात पाने में आपको निश्चित रूप से मदद मिलेगी।

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एक और उपचार के तहत आप त्रिफला का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको 20 से 25 ग्राम त्रिफला पानी में भिगोकर रात भर के लिए रखना पड़ेगा, फिर सुबह होने पर इसमें 2 चम्मच पानी मिलाकर आप इसका सेवन करें और इस तरीके से आप हाईब्लड प्रेशर की समस्या से राहत पा सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको अपनी लाइफ स्टाइल में सकारात्मक बदलाव भी करना चाहिए जैसे आप समय से सोएं और पर्याप्त नींद लें। इसके अतिरिक्त योगा को भी अपनी जीवनशैली में स्थान दें और इस तरीके से हाई ब्लड प्रेशर को आप हरा सकेंगे।

खराब नींद और मेंटल हेल्थ का अंतर्संबंध

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खराब नींद आपके मानसिक स्वास्थ्य को बरबाद कर सकती है। यह बात कई शोध में साबित हो चुकी है। अगर आपका मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है तो आप यह बात जान लें कि आप कोई भी कार्य ढंग से नहीं कर पाएंगे। खराब नींद के कई मायने होते हैं और आखिर यह किस प्रकार आपके मानसिक स्वास्थ्य को डिस्टर्ब कर सकता है, आइए देखते हैं।

स्लीप एक जानी-मानी पत्रिका है और इसमें नींद पर एक शोध हुआ था। इस शोध में तकरीबन 165 लोग शामिल किए गए थे जिनकी उम्र 31 वर्ष तक थी। इसमें 52% पुरुष शामिल थे। खास बात यह है कि यह लोग 2010 में आए भूकंप की वजह से अपना घर खो चुके थे और उसके बिना जीवन बसर कर रहे थे। नींद की गड़बड़ी तीन लोगों में बड़े स्तर पर पाई गई और यह शोध किया न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी के जु़डिक ब्लैंक ने। जाहिर तौर पर परिणाम बेहद निराशाजनक थे।

इन लोगों में पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) जैसे लक्षण पाए गए और कई लोगों में तो अवसाद और डिप्रेशन तक देखा गया था। निश्चित रूप से जो लोग सो नहीं पाते थे वह तनाव में रहते थे और यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि तनाव, मानसिक-स्वास्थ्य से सीधा जुड़ा होता है। उपरोक्त शोध से यह भी निष्कर्ष निकाला गया कि अगर आपके सामने कोई बड़ी समस्या आई हो तो उसका असर लंबे समय तक रहता है और निश्चित रूप से ऐसे में नींद-संबंधी तमाम परेशानियां आपको हो सकती हैं।

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इस शोध से इतर भी देखें तो नींद न आने से चिड़चिड़ापन होना सामान्य सी बात है। कई लोग कम नींद की वजह से इतने परेशान होते हैं कि उनको डॉक्टर तक को दिखाने की आवश्यकता पड़ जाती है। निश्चित रूप से अगर आप ऐसी किसी समस्या का सामना कर रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेने में जरा भी कोताही नहीं करनी चाहिए।

हालांकि बेहतर यह है कि आप 6 से 8 घंटे की नींद प्रतिदिन अवश्य लें और उस दौरान आपके आसपास का माहौल शांत हो। यह ज्यादा आवश्यक है! कई बार क्या होता है कि 6 से 8 घंटे अब बेड पर लेटे जरूर होते हैं, लेकिन नींद आपकी आंखों से दूर होती है। वहीं कई बार ऐसे लोगों को भी देखते होंगे जो चार-पांच घंटे में ही अपनी नींद पूरी कर लेते हैं।

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निश्चित रूप से यह एकाग्रता का प्रतिफल है। स्मार्टफोन युग में जिस प्रकार से लोगों के बिस्तर तक में यह घुस चुका है वह अपने आप में चिंता का विषय है। आज लोग दिन भर स्मार्टफोन से तो चिपके ही रहते हैं किंतु जब वह बिस्तर में जाते हैं तब भी वह घंटों तक टाइम पास करते हैं। इसे टाइमपास ही कहा जाएगा, हालांकि मनोरंजन के नाम पर थोड़ा टाइम बिताना और एक लंबे समय तक स्मार्टफोन से चिपके रहना इन दोनों में खासा फर्क है।

जाहिर तौर पर ऐसी स्थिति में आपको नींद कम आती है और आपको बेचैनी घेरी रहती है, जिसका परिणाम अंततः आपके मेंटल हेल्थ पर पड़ता है। इसके अतिरिक्त आप को वह सारे जतन करने चाहिए, जिससे आपकी नींद पूरी हो, ताकि आपका मानसिक स्वास्थ्य उत्तम बना रह सके।

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इन उपायों में यह भी कहा जाता है कि सोने से पहले कम से कम 4 से 6 घंटे तक शराब नहीं पीना चाहिए, क्योंकि अल्कोहल की मात्रा आपकी नींद तुरंत तोड़ देती है। इसी प्रकार बिस्तर पर जाने से 4 से 6 घंटे पहले काफी, चाय, सोडा, चॉकलेट इत्यादि लेने से परहेज करें।

जाहिर तौर पर एक्सरसाइज करना जरूरी है लेकिन बिस्तर पर जाने से ठीक पहले ऐसा ना करें। बिस्तर आपका आरामदायक होना चाहिए और सोने से ठीक पहले गर्म दूध और केले लेने से आपको नींद अच्छी आती है। किंतु यह आवश्यक है कि अगर आप अपने मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखना चाहते हैं तो किसी भी स्थिति में बेहतर नींद लेने का जतन करें।

क्या है हाइपरटेंशन और कितना जानते हैं आप इसके बारे में?

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हाइपरटेंशन नाम सुनकर कई लोगों को ऐसा लगेगा कि यह कोई साधारण सी बीमारी होगी या कोई तनाव का दूसरा रूप होगा। किंतु आप को इस लेख से पहले ही बता दें कि हाइपरटेंशन के रोगियों में हार्ट अटैक का खतरा सबसे ज्यादा होता है। सिर्फ इसी से आप इसकी गंभीरता का अंदाजा लगा सकते हैं! वास्तव में हाइपरटेंशन होता कैसे है और इससे बचाव के क्या कारण हो सकते हैं और इसके लक्षण क्या होते हैं, आइए देखते हैं।

सच कहा जाए तो हाइपरटेंशन के पीछे सबसे बड़ा कारण होता है अनियंत्रित खानपान और तनाव। निश्चित रूप से यह किसी भी व्यक्ति में हो सकता है और इसके पीछे कोई भी कारण हो सकता है। हाइपरटेंशन में मैक्सिमम हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है जिससे आप की नसों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। इसकी वजह से दिल की धड़कन तेज होने लगती हैं। जाहिर तौर पर इसका सबसे ज्यादा नुकसान आपके हृदय पर होता है।

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वास्तव में हाइपरटेंशन के कई कारण हो सकते हैं जिसमें कम नींद लेना, अत्यधिक गुस्सा करते रहना, नॉनवेज खाते रहना, ज्यादा ऑइली खाना और मोटापा इत्यादि शामिल हैं। पर एक बार जब आपको हाइपरटेंशन की प्रॉब्लम शुरू हो जाती है तो फिर यह घटने की बजाय बढ़ने ही लगती है।

हाइपरटेंशन के लक्षणों की बात करें तो सबसे बड़ा लक्षण है कि इस के पेशेंट को सांस लेने में तकलीफ होती है और इसके अतिरिक्त पेशेंट के सिर के पीछे और गर्दन में काफी दर्द रहने लगता है। यह सब शुरुआती लक्षण हैं, किन्तु जैसे जैसे समय निकलता है, वैसे वैसे मरीज को धुंधला दिखने लगता है, साथ ही पेशाब के साथ खून तक निकलने लगता है।

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इसी तरह आगे लक्षणों की बात की जाए तो थकान और सुस्ती के साथ सिर चकराना इसमें आम बात है। निश्चित रूप से रात में नींद ना आने की समस्या भी होने लगती है और इसी वजह से दिल की धड़कनें भी बढ़ जाती हैं।

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हाइपरटेंशन से बचने के लिए आपको अपनी जीवनशैली नियमित करने की जरूरत पड़ती है। इसी के साथ अगर आप अपनी लाइफ स्टाइल में योग और प्राणायाम को शामिल करते हैं, आयली खाना कम करते हैं और पर्याप्त नींद लेते हैं तो निश्चित रूप से आपको इसमें मदद मिल सकती है। लेकिन जैसे-जैसे समस्या बढ़ती है तो आप डॉक्टर से सलाह लेने में कतई परहेज न करें।

बच्चों के दिमाग को तेज करने के घरेलू उपाय!

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आजकल की बदलती जीवनशैली का सबसे ज्यादा असर अगर किसी पर पड़ा है तो वो हैं बच्चे!

असंतुलित खानपान और असंयमित जीवनचर्या ने एक तरफ जहाँ बच्चों का स्वास्थ्य बिगाड़ा है तो दूसरी तरफ बच्चों के दिमाग पर भी ख़ासा असर पड़ा है। आपने अक्सर सुना होगा कि बच्चा पढ़ता तो है लेकिन उसे चीजें याद नहीं रहती हैं। सच कहा जाए तो बच्चों के शारीरिक विकास के लिए जिस प्रकार के संतुलित भोजन की जरुरत होती है उसी प्रकार से मानसिक विकास के लिए भी सही डाइट और दिमागी कसरत की आवश्यकता होती है।

आज हम कुछ घरेलू नुस्खें बताएँगे जिससे बच्चों का दिमाग तेज होगा तो उसकी याददाश्त भी बढ़ेगी।

बच्चों के दिमाग को विकसित और बुद्धिमान बनाने के लिए हमें उनके साथ छोटे -मोटे दिमागी खेल खेलना चाहिए। आजकल बाजार में अनेकों खिलौने भी आ रहे हैं, जिससे ब्रेन एक्टिव होता है। इसलिए उन्हें उम्र के मुताबिक माइंड गेम्स खेलने को दें तथा उनके साथ समय निकालकर आप भी खेलें।

बच्चों के साथ प्यार व दुलार से व्यवहार करें। शोधकर्ताओं के मुताबिक जो औरत अपने नवजात बच्चे के साथ अधिक प्यार और दुलार के साथ व्यवहार करती है उनके बच्चों के दिमाग के हिप्पोकेंपस एरिया में ज्यादा मात्रा में नर्व कोशिकाएं बनती हैं। इसी वजह से इन बच्चों का दिमाग तेज हो जाता है। माना जाता है कि जिन बच्चों को अपनी मां से लगाव होता है, उनके दिमागी विकास पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।

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बच्चों के दिमाग के विकास के लिए संतुलित, पौष्टिक आहार देना बहुत महत्वपूर्ण है। आप बच्चों के मील में दूध, हरी सब्जियां, अंडे, फल और मेवे आदि अनेक खाद्य- पदार्थों को शामिल करें। बच्चों को प्र्त्येक दिन सुबह भीगे हुए 2 से 3 बादाम खाने को दें, बादाम खाने से याद्दाशत बढ़ती है। अपने बच्चों को बाहर का खाना जैसे फास्ट फ़ूड या जंक फूड कम से कम खिलाएं।

बच्चों को पोषक खाद्य -पदार्थों के अलावा उन्हें पर्याप्त नींद की जरूरत होती है। पर्याप्त नींद के कारण बच्चों की याददाश्त बढ़ती है। इसलिए कम से कम 1 घंटा दिन में भी सुलाने की कोशिश करें।

नवजात बच्चे के लिए मां के दूध को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। दूध से अच्छा कोई भी दूसरा आहार नहीं होता है। स्तनपान कराने से बच्चों को गंभीर बीमारियों होने की संभावना कम होती है तथा दिमागी विकास के लिए मां का दूध फायदेमंद होता है।

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आप अपने बच्चे को दूध में हल्दी का पाउडर मिलाकर पिला सकते हैं। हल्दी में कुरकुमीन रसायन की मात्रा पायी जाती है जो दिमाग को एक्टिव और स्वस्थ रखने के साथ कैंसर जैसे रोगों के इलाज में असरदार होती है।

बच्चों के भोजन में दही शामिल करें, किसी भी तरह के तनाव को दूर रखने में इससे फायदा होता है।
निःसंदेह ही इन घरेलू नुस्खों का आपके बच्चे के दिमाग पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

नवजात शिशुओं के पेट में होने वाली परेशानियों को कैसे दूर किया जाएं?

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आमतौर पर यह बात सब जानते हैं कि नवजात बच्चों का पालन-पोषण करना कोई आसान काम नहीं है। छोटे बच्चों की पाचन-क्रिया बहुत ही नाजुक एवं संवेदनशील होती है। इसीलिए शिशुओं के खानपान में एक छोटी सी गलती या छोटा सा बदलाव नवजात शिशु की पाचन-क्रिया को प्रभावित कर सकती है। खासकर महिलाएं जब नयी -नयी माँ बनती हैं, तो ऐसे में माताएं अपने नवजात शिशु के स्वास्थ्य के प्रति हमेशा काफी चिंतित रहती हैं।

छोटे शिशुओं में जो आम समस्या आती है वो है पेट में दर्द, पेट में मरोड़, बुखार आना, उल्‍टी-दस्‍त (डायरिया) कब्‍ज, गैस तथा नवजात शिशु का बार-बार रोना आदि।

शिशु के पाचन तंत्र की समस्‍याओं के लिए कुछ घरेलू उपाय प्रस्तुत हैं…

Pic: babycenter

स्तनपान करवाने की तरीका
ध्यान रहें नवजात शिशु को स्तनपान कराते समय सिर हमेशा पेट से अधिक ऊंचा होना चाहिए। यह शिशु को दूध पिलाने का अच्छा तरीका है, इससे दूध आसानी से पेट में चला जाता है। इससे शिशु के पाचन तंत्र, गैस या एसिड की समस्या भी नहीं होती है। पर आप बच्चे को बिस्तर पर लेट कर दूध न पिलाएं, बल्कि हमेशा उनको अपने गोदी में बिठाकर दूध पिलाएं।

शिशु की मालिश
आप अपने छोटे बच्चे की मालिश प्रतिदिन कर सकते हैं। मालिश करने से शिशु की पाचन-तंत्र से संबंधित परेशानियां दूर होती हैं, परन्तु आप अपने शिशु की मालिश हल्‍के हाथों से करें तथा पेट व छाती के आस-पास ज्‍यादा जोर न दें। मालिश के लिए अच्‍छा क्रीम व हल्‍की खुशबू वाला बेबी ऑयल ही प्रयोग करें।

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शिशु को दूध पिलाने के बाद पीठ थपथपाएं
शिशु को दूध पिलाने के बाद हमेशा अपने कंधे पर रखकर उन्हें अपने हल्के हाथ से पीठ को थपथपाना चाहिए। इससे बच्चे को पेट में होने वाली समस्याएं जैसे- कब्ज, पेट दर्द की संभावना कम होती है। यह अपच से राहत दिलाती है तथा शिशु को उल्‍टी की समस्या से राहत दिलाती है।

शिशु को ग्राइप वाटर पिलाएं
इस गर्मी के मौसम में अपने शिशु को ग्राइप वाटर पिला सकते हैं। यह शरीर को ठंडक एवं राहत दिलाती है, साथ ही यह शिशु के पेट से संबंधित समस्याओं के लिए भी इस्‍तेमाल किया जाता है। यह पानी, सोडियम बाइकार्बोनेट के अलावा कई तरह की जड़ी-बूटियां से बना होता है। अगर आपके शिशु को गैस की समस्‍या है तो इसे पिलाना एक बेहतरीन उपचारों में से है।

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बच्चें को केवल मां का ही दूध पिलाएं
6 से 8 महीने तक के बच्चों को केवल माँ का ही दूध पिलायें। अगर आपके शिशु को मां का दूध पिलाने के बाद पाचन-क्रिया में परेशानी का सामना करना पड़ता है तो आप सबसे पहले मां के दूध के अलावा जरूरत से ज्यादा खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ न दें। जब तक आपका बच्चा पूर्ण रूप से विकसित न हो जाए, तब तक स्तनपान करवाते रहें। जब आपका बच्चा खाने -पीने में सक्षम हो तो ही आप कुछ खिलाने की कोशिश करें।
इन छोटी मोटी सावधानियों को ध्यान में रखने से आसानी से बच्चों के स्वास्थ्य-सम्बन्धी समस्या से निपटा जा सकता है।

ठन्डे पानी का सेवन बिगाड़ देगा आपकी सेहत!

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गर्मी के अत्यधिक बढ़ जाने पर सबसे पहले किसी चीज की जरुरत पड़ती है तो वह है पानी। गर्मी के मौसम में लोग चाहें अंदर हों या बाहर, हमेशा ही प्यास लगती है। तमाम लोग अपनी प्यास को बुझाने के लिए पानी का सेवन करते हैं, किन्तु ‘नॉर्मल पानी न पीकर हम इस स्थिति में ठंडा पानी पीना ज्यादा पसंद करते हैं। खूब प्यास लगी हो तो ठंडा पानी किसी अमृत से कम नही लगता है। ठन्डे पानी से शरीर को ठंडक, थकान तथा लू से भी राहत मिलती है।

लेकिन बहुत से लोगों को यह पता नहीं होगा कि ठंडे पानी का सेवन हमारे शरीर के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है। आज हम बताएँगे कि ठंडा पानी शरीर पर कितना नकारात्मक प्रभाव डालता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना
ठंडा पानी पीने से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता एकदम से कम हो जाती है, जिससे खांसी, जुकाम की समस्या पैदा हो जाती है और छाती में भी कफ बनना शुरू हो जाता है। हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम के कमजोर हो जाने के साथ ही अनेक बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।

Pic: continentalhospitals

पाचन क्रिया पर बुरा असर
भोजन के बाद या भोजन के समय कभी भी ठंडे पानी का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि खाना खाते समय ठन्डे पानी को पीने से खाना पचने की समस्या हो जाती है। ठन्डे पानी के सेवन से धमनियां सिकुड़ने लग जाती हैं और ठंडा पानी पीने से पाचन तन्त्र बुरी तरीके से प्रभावित हो जाने के साथ उल्टी, दस्त यानी कि डायरिया, पचने में दिक्कत, पेट में दर्द जैसे अनेक रोगों का सामना करना पड़ता है।

सिरदर्द होना
ज्यादा ठंडे पानी के सेवन से सिर में दर्द शुरू हो जाता है। हालाँकि आप लोग “ब्रेन फ्रिज” के बारे में जानते होंगे जोकि ज्यादातर आइसक्रीम या ठंडे पानी के सेवन से होता है। ज्यादा ठंडा पानी पीने से ब्रेन की स्पाइन नसों के भी ठंडा होने के कारण यह ब्रेन पर असर डालती है, इसलिए यह सिर दर्द की वजह बन जाता है।

दिल की समस्या
ज्यादा ठंडा पानी पीना हमारे दिल के लिए भी नुकसानदायक होता है क्योंकि हमारे बॉडी में एक नर्व होती है, जिसका नाम वेगस है। यह नर्व शरीर के अंगों जैसे हार्ट, लंग्स और डाइजेस्टिव सिस्टम को कंट्रोल करती है। अधिक ठंडा पानी पीने से नर्व भी ठंडी होकर दिल की धड़कनों को धीमा कर देता है तथा इससे रक्त वाहिनियां भी सिकुड़ जाती हैं और कभी -कभी ब्लड फ्लो में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

Pic: indiatvnews

कब्ज़ की परेशानियां
देखा जाता है कि जो लोग ज्यादा ठंडा पानी पीते है उन्हें हमेशा कब्ज की शिकायत रहती है। क्योंकि ठन्डे पानी से भोजन पचने में परेशानी होती है। यह खाए हुए खाद्य – पदार्थों को कठोर बना देता है, इसलिए आगे चलकर कब्ज तथा बवासीर जैसी बीमारियाँ पैदा हो सकती हैं।

वजन का बढ़ जाना
ठंडे पानी के सेवन से मोटापा बढ़ जाता है, क्योंकि यह बॉडी में चर्बी को और कठोर तथा सख्त बनाता है। इसी कारण दिन-प्रतिदिन वजन बढ़ता जाता है। इस बात का ध्यान रहे कि जब कभी आप अपना मोटापा कम करने की सोच रहे हैं, तो ठंडे पानी का सेवन बंद करके आपको हमेशा गर्म या गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए।

Pic: sansaninews

आलस तथा थकान महसूस होना
ज्यादा ठंडा पानी पीने से आपको दिन भर थकान व आलस महसूस होता है। ठंडे पानी का तापमान बहुत कम तथा शरीर का तापमान ज्यादा होने के कारण शरीर में आलस या थकान महसूस होने लगती है।

युवाओं में दिखें ‘ये लक्षण’ तो हो जाएं सावधान!

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आधुनिक जीवनशैली की चपेट में आ कर आज की युवा पीढ़ी अपने स्वास्थ्य सम्बन्धी जरुरी चीजों को नजरअंदाज करती जा रही है। इसका नतीजा यह होता है कि असमय ही युवाओं का शरीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है। इसमें प्रमुख है कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना।

कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। कुछ लोगों का मानना है कि कोलेस्ट्रॉल अधेड़ उम्र में बढ़ता है, परन्तु आजकल के बदलते खानपान की वजह से देखा जाता है कि अक्सर 18-35 साल के युवाओं में भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या आम हो गई है।

Pic: cbsnews

जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है तो यह अनेक प्रकार से हानिकारक हो सकता है। जैसे आर्टरी ब्लॉक, ब्रेन स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर समस्या, कम उम्र में हार्ट अटैक सहित अनेक खतरनाक और जानलेवा बीमारियाँ भी हो सकती हैं। कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाने पर शरीर में कुछ लक्षण दिखाई देता है।

तमाम युवा इन संकेतों को अनदेखा यानी कि इन संकेतों को सामान्य समझकर ध्यान नही देते हैं। अगर इन संकेतों के दिखने पर आप सावधान हो जाएँ और अपनी जीवनशैली में थोड़ा बहुत बदलाव करें तो आप इन बीमारियों से निजात पा सकते हैं।
कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाने पर निश्चित रूप से इस तरह के संकेत हमारा शरीर हमें देता है।

सीढ़ियां चढ़ते समय या पैदल चलते समय सांस फूलना
यदि पैदल चलते या सीढ़ियां चढ़ते समय आपकी साँस तेजी से चलती है या पहले की तुलना में थोड़े से काम करने पर ही बहुत जल्दी थकान महसूस करते हैं तो यह लक्षण कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के हो सकते हैं। कोलेस्ट्रॉल के शुरुआती संकेत हैं- सांस फूलना, धड़कनों का तेजी से बढ़ना तथा अंदर से कमजोरी महसूस होना आदि।

Pic: lifealth

हाथ और पैरों में झनझनाहट होना

अगर आपके हाथों-पैरों में झनझनाहट या शरीर में चीटियां रेंगने की तरह अहसास हो तो इस प्रकार की समस्या कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से हो सकती है। शरीर के जिन अंगों तक ऑक्सीजनयुक्त रक्त के पहुंचने में दिक्कत आती है, या उस अंग तक खून पर्याप्त मात्रा में नही पहुँच पाता है तो समझ लीजिए कि धमनियों में प्लाक जमा हो गया है, इसलिए उस स्थान पर झनझनाहट महसूस होने लगती है।

अगर आपको इस प्रकार की परेशानियां नजर आयें तो तुरंत कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएं।

Pic: amayen

शरीर के अंगों में दर्द
कई बार पूरे शरीर में दर्द या अकड़न जैसी समस्या हो जाती है, इसे नजरंदाज न करें क्योंकि यह खतरनाक साबित हो सकता है। जैसे, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, पीठ में दर्द तथा गर्दन दर्द आदि। यह सामान्य दर्द भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का लक्षण हो सकते हैं। छाती के निचले भाग, जबड़ों में होने वाले दर्द हार्ट अटैक के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं।

आंखों की ऊपरी त्वचा पर पीले चकत्ते होना
जब रक्त में वसा की मात्रा बढ़ जाती है तो आंखों के ऊपर पीले चकत्ते दिखने शुरू हो जाते हैं। यह संकेत भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का हो सकता है। लेकिन कई बार इस तरह के लक्षण डायबिटीज के भी हो सकते हैं।

घबराहटऔर अधिक पसीना आना
कभी-कभी अचानक घबराहट, बेचैनी और शरीर में अधिक पसीना आना भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाने का संकेत होता है, क्योंकि शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक बढ़ जाने की वजह से दिल तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता है, इसलिए दिल कम मात्रा में खून पंप करने लगता है। साथ ही सांस लेने में दिक्क़त, घबराहट तथा शरीर से अधिक पसीना निकलने की समस्या हो सकती है।

Pic: navodayatimes

कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएं
20 साल की उम्र के हो जाने पर बहुत ही जरूरी है पहली बार कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाना। इसके बाद हर 3 साल बाद कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाना चाहिए, ताकि आपको सही समय पर कोलेस्ट्रॉल का पता चले तथा आप जानलेवा रोगों से दूर रहें।

प्रेग्नेंसी के दौरान आपको किन खतरों से सावधान रहना चाहिए?

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मां बनना हर महिला के लाइफ में बहुत ही सौभाग्य एवं ख़ुशी की बात होती है। वहीं गर्भावस्था के दौरान उचित सावधानी नहीं बरतने पर यह माँ और शिशु के लिए खतरनाक भी हो सकता है। गर्भावस्था की स्थिति में महिलाओं को अपने स्वास्थ्य और शरीर को लेकर अनेक सावधानियां बरतनी चाहिए।

चूंकि महिलाओं को नौ महीनों तक काफी लम्बा सफर तय करना होता है। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को सिर में दर्द होना, डिप्रेशन, तनाव, वजन बढ़ना, भूख कम लगना, नींद न आना आदि तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गर्भवती महिला को इसके बारे में जानना अति आवश्यक है।

आईये जानते हैं गर्भावस्था के दौरान होने वाली परेशनियों के बारे में

गर्भ में बच्चे की मूवमेंट कम होना और माँ के पेट में दर्द होना
गर्भावस्‍था के खतरों को पहचानने के लिए वैसे तो डॉक्टर कुछ संकेतों को बता देते हैं, फिर भी कुछ ऐसे लक्षण होते हैं, जिन्हें कुछ महिलाएं नज़रअंदाज़ कर देती हैं।
जैसे गर्भ के तीसरे महीने के चलते प्रेग्नेंट महिलाओं को तेज सिरदर्द, पेट में सूजन तथा पेटदर्द की समस्या होने लगती है तो इस का मतलब यूरीन में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा हो गयी है या ब्लड प्रेशर के बढ़ने से भी ऐसा हो सकता है।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अगर गर्भावस्था के दौरान बच्चा गर्भ में कम घूम रहा है तो बच्चे को प्लेसेन्टा से पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन नहीं मिल रहा है। इस तरह की परेशनियां होने पर तत्काल अस्पताल में दिखाना चाहिए ।

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पानी का गिरना
गर्भावस्‍था के दौरान ज्यादा पानी आना भी नुकसानदायक होता है। यह यूट्रस के सूजे होने तथा ब्लैडर के भारीपन की वजह से होता है। परन्तु ध्यान दें अगर पानी लगातार निकलता है तो इसकी वजह पानी की थैली का फटना भी हो सकता है। इस स्थिति में आपको तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए ।

लगातार उल्‍टी और कमजोरी महसूस होना
प्रेग्नेंसी में लगातार उल्टियों का आना भी परेशानियों की वजह बन सकता है। ऐसे में शरीर में पानी की कमी तथा बच्चे के जन्म के समय समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थितियों में डॉक्‍टर से हर समय परामर्श लेना चाहिए क्योंकि विशेषज्ञ आपको उचित आहार लेने का तरीका बताएंगे जिससे जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहेंगे।

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फ्लू के लक्षण या संकेत
कहा जाता है कि सामान्य महिलाओं की तुलना में प्रेग्नेंट महिलाओं में फ्लू का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि प्रेग्नेंट महिलाओं के शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम कमजोर होता है जिससे फ्लू से होने वाली समस्याएँ ज्यादा हो जाती हैं।

फ्लू में होने वाले सामान्य लक्षण

  • बार -बार उल्टियां आना
  • दस्त लगना या डायरिया होना
  • गले में दर्द, खरास की समस्या
  • लगातार खांसी और सर्दी जुकाम का लगना
  • कमज़ोरी महसूस होना
  • नाक का अधिक बहना आदि फ्लू के लक्षण हैं।

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खून की कमी होना
गर्भावस्‍था के समय में खून का कमी होना आम समस्या है। ऐसे में शरीर में रक्त की कमी हो जाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि महिला के गर्भ में एक और जान पल रही है। यह मां और बच्चे दोनों के लिए परेशानी का कारण हो सकता है।
इसलिए नियमित जाँच कराएं तथा डॉक्टर से परामर्श लें और इन खतरों से सावधान रहें।

सुबह खाली पेट भीगे बादाम खाने से क्या फायदे होते हैं?

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यूँ तो आपने सुना होगा कि बादाम खाने से दिमाग तेज बनता है, परन्तु क्या आपको पता है कि भीगे हुए बादाम के सेवन से और अधिक फायदे मिलते हैं?

जी हाँ! नियमित तौर पर सुबह उठने के बाद 3 या 4 भीगे हुए बादाम खाने से अनेक बीमारियों से लड़ने की क्षमता हमारे शरीर को मिलती है, साथ ही यह शरीर को स्वस्थ एवं मजबूत बनाता है। बादाम में प्रचुर मात्रा में मिनरल्स व फाइबर पाए जाते हैं। इसके अलावा विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम और फॉस्फोरस की मात्रा अधिकता में पायी जाती है। बादाम के खाने से शरीर में ब्लड प्रेशर और वजन बढ़ने तक की शिकायत भी कम होती है।

हृदय के मरीजों के लिए भी बादाम खाने से लाभ मिलता है। बादाम को पानी में भिगोकर या दूध के साथ भी खा सकते हैं। माना जाता है कि भीगे हुए बादाम, सूखे बादाम की अपेक्षा अधिक स्वास्थ्यवर्धक होता है।

तो आइये हम आपको बता देते हैं कि भीगे हुए बादाम खाने से वास्तव में क्या -क्या फायदे होते हैं?

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डिप्रेशन या तनाव को करे दूर
बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट बादाम में पाए जाते हैं, इसलिए नियमित बादाम के सेवन करने से दिमाग तेज रहता है और इसके साथ ही तनाव, डिप्रेशन से भी राहत मिलती है। भीगे हुए बादाम के हर दिन 4 से 5 दाने खाने से फायदा होता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए उत्तम
बादाम खाना प्रेगनेंसी के लिए बहुत ही सर्वोत्तम होता है । बादाम के सेवन करने से न केवल गर्भवती महिलाओं को फायदा होता है बल्कि मां के पेट में पल रहें शिशु का भी दिमाग तेज बनता है। इसके साथ ही बादाम से मिलने वाले न्यूट्रीशन से दोनों स्वस्थ एवं तंदुरूस्त रहते हैं।

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दिमाग को रखे तेज एवं स्वस्थ
प्रतिदिन सुबह 4 से 5 भिगोये हुए बादाम खाने से दिमाग तेज तथा याददाश्त भी तेज हो जाती है। जिन लोगों का काम दिमाग वाला होता है, ऐसे लोगों को नियमित रूप से बादाम खाना चाहिए। इससे मेमोरी तेज़ बनती है और सेंट्रल नर्वस सिस्टम ठीक से काम करता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करे
सर्दी, जुकाम तथा खांसी आदि छोटे- छोटे रोगों से लड़ने के लिए आप तुरंत ही बादाम खाना शुरू कर दीजिये, क्योंकि यह इन सब से राहत देता है। बादाम के खाने से शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ जाती है साथ ही छोटे- छोटे बीमारियों का भी शरीर में कोई असर नहीं हो पाता है। गर्म दूध में कूछ बूंदें बादाम के तेल की डालकर पीने से कफ से निजात पा सकते हैं।

मोटापा कम करने में सहायक
बादाम वजन कम करने में भी मदद करता है, इसलिए आप सुबह भीगे हुए बादाम को अपनी डाइट में शामिल करें। बादाम को खाने से भूख भी कम लगती है तथा साथ ही मोटापे से भी राहत मिलती है।

कब्ज़ से राहत
बादाम से शरीर में कब्ज आदि की समस्या नहीं होती है, क्योंकि बादाम में अत्यधिक फाइबर की मात्रा होने के कारण पेट अच्छे से साफ़ एवं हल्का हो जाता है।

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ब्लड प्रेशर करे नियंत्रित
भीगे हुए बादाम से उच्च रक्तचाप वाले लोगों को लाभ होता है। इसमें मैग्नीशियम होता है जो शरीर में खून के दबाव को नियंत्रित करता है और आपको घटते -बढ़ते ब्लड प्रेशर में आराम मिलेगा।

कोलेस्ट्राल कम करे
बादाम शरीर में मौजूद कोलेस्ट्राल की मात्रा को कम करता है, साथ ही इसमें पाए जाने वाले मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड और विटामिन E रक्त के प्रवाह से कोलेस्ट्राल कम करता है।

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स्किन से झुर्रियों को दूर करे
भीगा हुआ बादाम खाने से त्वचा से झुर्रियों को दूर करने में आसानी होता है। इसे एक नैचुरल एंटी-एजिंग फ़ूड के रूप में माना जाता है। इसलिए सुबह -सुबह भीगे बादाम के खाने से आपकी त्वचा पर झुर्रियों का असर कम हो जायेगा।

गर्मियों में हार्ट के मरीज रखें अपना ‘विशेष ध्यान’

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गर्मियों के मौसम में बाहर का बढ़ता हुआ तापमान हमारे दिल पर बहुत बुरा असर डालता है। इसलिए इस तपती धूप में दिल के मरीजों को अधिक समय तक धूप में कम या बाहर नहीं निकलना चाहिए। ज्यादा गर्मी में अत्यधिक शारीरिक श्रम करने से स्वस्थ शरीर वाले व्यक्तियों को भी थकावट या हीट स्ट्रोक (लू) जैसी बीमारियां घेर सकती हैं, तो जरा सोचिये दिल के रोग से ग्रस्त आदमी के लिए कितना खतरा हो सकता है?

आइए जानते हैं इस गर्मी के मौसम में दिल के मरीज अपना ख्याल किस प्रकार रखें

बढ़ता हुआ तापमान दिल के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक

बढ़ता हुआ तापमान हमारे हृदय पर अधिक बुरा असर डालता है। हमारे शरीर में पसीने का आना बहुत ही जरूरी होता है, क्योंकि पसीना आने से शरीर अपने आप थोड़ा ठंडा हो जाता है। वहीं जब शरीर किसी कारणवश अपने आप ठंडा न हो तो हार्ट को खून पंप करने में कठिनाई होती है। इतना ही नहीं रक्त वाहिकाओं का साइज बढ़ जाने पर दिल तेजी से धड़कने लगता है और ब्लड प्रेशर भी तुरंत कम हो जाता है।

इसलिए इस स्थिति में दिल के मरीजों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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बढ़ती हुई गर्मी में हार्ट के रोगियों को निम्न सावधानियाँ बरतनी चाहिए

विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में दिल के दौरे पड़ने के साथ ही तेज गर्मी में भी हार्ट अटैक के खतरे बढ़ जाते हैं। इसलिए दिल के रोग से ग्रस्त व्यक्तियों को इन दोनों मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए। गर्मियों में आमतौर पर हार्ट अटैक पड़ने की संभावना तब होती है जब लगातार कुछ दिनों तक तेज धूप होती है।

तेज गर्मी की वजह से यदि आप को घबराहट, बेचैनी हो तो तुरंत ब्लड प्रेशर चेक कराएं।
दोपहर के तेज धूप में बाहर जाने से बचें।
दिन के समय किसी जरूरी काम से अगर बाहर जाना हो तो छाते को ले जाना न भूलें।

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इसके अतिरिक्त कुछ और बातें भी आपको ध्यान में रखनी चाहिए, जैसे…

  • तेज गर्मी में खड़े न हों तथा कोशिश करें कि सुबह शाम ही घरया दफ्तर से बाहर निकलें
  • ज्यादा गर्मी लगने पर ठंडे पानी से नहाएं
  • गर्मियों में ढीले व हल्के रंग के कपड़े पहनें
  • तरल पदार्थों और पानी का सेवन बार -बार करें
  • चाय-कॉफी तथा एल्कोहल का सेवन करने से बचें
  • मसालेदार खाने से परहेज करें

गर्मी के प्रकोप के शुरुआती संकेतों को नजर अंदाज न करें क्योंकि यह हानिकारक हो सकते हैं

  • ज्यादा पसीना आना
  • सिर में अधिक दर्द होना
  • त्वचा का नमी युक्त व ठंडा महसूस होना
  • चक्कर आना
  • उल्टी, कमजोरी तथा जी मिचलाना
  • ठंड लगना
  • अधिक थकान महसूस करना
  • धड़कन व नाड़ी का तेज चलना
  • मांसपेशियों में ऐंठन महसूस होना आदि

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आप यदि इन लक्षणों को शुरुआत में ही पहचान लेते हैं तथा ठंडे वातावरण, पर्याप्त मात्रा में पानी व अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते हैं तो पीड़ित व्यक्ति की सेहत में सुधार हो सकता है। वरना बीमारी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।

इसके साथ ही नियमित समय पर अपने शरीर की जांच कराते रहें।

जोन्डिस होने के कारण?

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जोन्डिस यानीकि पीलिया रोग गर्मी के मौसम में अधिक होने की संभावना होती है, इसका मुख्य कारण है गंदा पानी एवं संक्रमित खानपान, इसलिए आवश्यक है कि आप सभी लोगों को पीलिया के बारे में जानकारी होनी चाहिए तथा जानकारी प्राप्त करने के बाद सुरक्षात्‍मक उपाय कर लेंना चाहिए। तो आइए जानते है ।

जोन्डिस व्यक्ति के शरीर की एक ऐसी अवस्‍था है जिसमें बिलिरुबिन की मात्रा रक्त में बढ़ जाती है। इससे रोगी की आंख का सफेद भाग तथा चमड़ी में पीलापन पड़ने लगता है । पीलिया के लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने की आवश्यकता पड़ती है।

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बिलिरुबिन क्या है?
यह एक पीले रंग का पदार्थ होता है, जोकि खून में उपस्थित लाल रक्त कणिकाओं के 120 दिन के सामान्य से कम अवधि पर टूटने से बनता है । बिलिरुबिन में बिलि होने के कारण हमारा लीवर पित्त रस का निर्माण तथा भोजन को पचाने और मल के उत्सर्जन में सहायता करता है । वहीँ जब किसी वजह से बिलिरुबिन, बिलि के साथ मिश्रण नहीं बना पाता तो इस स्थिति के वजह से रक्त में बिलिरुबिन की मात्रा तेजी से बढ़ जाता है । इसलिए यह शरीर के दुसरें अंगों में भी पहुंचकर पीलापन उत्पन्न कर देता है ।

जोन्डिस (पीलिया) इन बीमारियों का कारण बन सकता है
जोन्डिस अनेक बीमारियों के कारण भी बन सकता है जैसे : सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया,मलेरिया रोग बिलिरुबिन के बनने की स्थिति के तेज हो जाने के वजह से ग्रंथियों का बुखार, हेपेटाइटिस, लिवर का कैंसर,अल्कोहलिक लिवर की बीमारी इसके अलावा अधिक शराब के सेवन से बिलिरुबिन को प्रोसेस करने में लिवर की क्षमता को भी प्रभावित करती है।

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जोन्डिस (पीलिया) के लक्षणों को पहचानें
रक्त में बिलिरुबिन की मात्रा बढ़ जाने से चमड़ी, आंख का सफेद भाग व नाख़ून अत्यधिक तेजी से पीलापन हो जाता है।

इस बीमारी में फ्लू-जैसे लक्षण होते है जैसे कि रोगी को बार-बार बुखार चढ़ना तथा मरीज को अधिक ठंड महसूस होता है।

उल्टी आना, पेटदर्द, कभी-कभी पेट में मरोड़ उठना तथा खाना खाने का मन न करना आदि अनेक प्रकार की समस्या हो जाती है।

एकदम से वजन का घट जाना

पेशाब का रंग गहरा/पीला होना तथा अत्यधिक थकान महसूस होना आदि अनेक लक्षण दिखाई देतें है

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इस तरह के लक्षण के दिखाई देनें पर हमें अनेक प्रकार की सावधानियां बरतनी चाहिए ।

जैसे :
1 गर्मी के मौसम में विशेष ध्यान दें क्योंकि इस मौसम में अनेक प्रकार की संक्रमण की तरह ही पीलिया होने का संभावना कुछ ज्‍यादा बढ़ जाता है।
2 सबसे पहले आप हमेशा खाना बनाते समय, परोसते समय, खाना खाने से पहले, बाद में तथा शौच जाने के बाद अपने हाथ को साबुन लगाकर अच्छी तरह से धो लें तथा भोजन को कभी भी खुला न रखें,और धूल व मक्खियों से बचने के लिए हमेशा भोजन को ढक्कन से ढंककर या किचन अलमारी में रखना चाहिए ।
3 प्रत्येक दिन ताजा, शुद्ध, गर्म संतुलित आहार लें । पानी तथा दूध को हमेशा उबालकर इस्तेमाल करें, पानी स्वच्छ एवं साफ पीएं ।
4 कटे हुए फल, धूल में पड़ी, सड़े, गंदे या खुले हुए बाजार के पदार्थ के खाने से बचे साथ ही स्वच्छ शौचालय का इस्तेमाल करें ।
5 इस रोग से पीड़ित बच्चों नियमित तौरपर डॉक्टर के पास जाँच के लिए लें जाएं । याद रहें कि बच्चा जब तक ठीक नही हो तो उन्हें स्कूल या किसी भी अन्य स्थानों पर न जाने दें।

गर्म पानी पीने से शरीर में होते हैं ये फायदें

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भला पानी के बारे में कौन नहीं जानता है । पानी के बिना इस सरजमीं पर सभी प्रकार के प्राणीयों का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा । इसलिए कहा जाता है कि पानी ऑक्सीजन के जैसे ही हमारे शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक है । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भरपूर मात्रा मे पानी पीना चाहिए । एक स्वस्थ मनुष्य को कम से कम एक दिन में 8 से 10 गिलास पानी पीना चाहिए । वहीँ अगर गुनगुने पानी की बात करें तो यह एक दवाई का काम करता है । यह शरीर को स्वस्थ, त्वचा को मुलायम तथा चमकदार बनता है। गर्म पानी पीने से अनेक छोटे -छोटे रोग जैसे पाचन संबंधी दिक्कते, कब्ज और गैस की समस्याएं समाप्त हो जाती है । गुनगुना पानी को आप सुबह उठने के बाद, रात को सोने से पहले, ठंडी के मौसम में, व्यायाम व योगा के बाद पी सकते हैं। तो जानते हैं गर्म पानी पीने के फ़ायदे के बारें में।

मोटापा कम करे
अगर आपका वजन लाख प्रयास करने के बाद भी लगातार बढ़ रहा है तो बस आप रोज सुबह खाली पेट गर्म पानी पीना शुरू कर दें । गर्म पानी हमारे शरीर से अतिरिक्त फैट को घटने के साथी ही शरीर को स्लिम होने में सहायता करता है।

त्वचा की झुर्रियों व मुंहासे दूर करें
नियमित रूप से सुबह खाली पेट गर्म पानी के सेवन से किसी भी प्रकार की त्वचा से संबंधित परेशनियां ठीक हो जाती है । तेल व मसालेदार भोजन से शरीर के अंदर ख़राब पदार्थ जम जाते हैं, तथा व्यक्ति के शरीर को अंदर से कमजोर व जल्दी बूढ़ा कर देता है । इसलिए इस तरह की समस्या से निजात पाने के लिए सुबह गर्म पानी का सेवन करें । गर्म पानी आपकी त्वचा की झुर्रिया, पिंपल्स से छुटकारा दिलाने के साथ ही साथ ही पेट को साफ रखने में मदद भी करता है और शरीर में रूखापन भी दूर करता है ।

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सर्दी-जुकाम में फायदा
सर्दी-जुकाम से राहत पाने के लिए गर्म पानी पीना भी यह एक रामबाण इलाज है। अगर बे मौसम में आपकी नाक,गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत, छाती में जकड़न तथा जुकाम की समस्या हो जानें पर आप इन तकलीफों से बचने के लिए गर्म पानी में थोडा सा नमक डालकर गरारा करें और गर्म पानी का ही सेवन करें ।इससे आपको तुरंत राहत अथवा आराम मिलेगी ।

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पेट रखें साफ
गर्म पानी के सेवन से पाचन क्रिया ठीक रहता है । यह पेट को साफ, कब्ज, गैस तथा पेट दर्द होने पर आराम मिलता है। इसलिए भोजन करने आधे घंटे के बाद एक गिलास गर्म पानी अवश्य पीएं ताकि आपका पेट हल्का तथा खाना जल्‍दी पच जाए ।

ब्लड सर्कुलेशन में मददगार
गर्म पानी के पीने से ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में बहुत मदत मिलता है । अगर व्यक्ति शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही हो तो अनेक तरह की रोगों से बचा जा सकता है । इसलिए हमेशा गर्म पानी का सेवन करें ।

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दमा के मरीजों को फायदा
दमा के रोगियों को मसालेयुक्त भोजन के बाद गर्म पानी का सेवन करना बेहद फायदा होता है । हालाँकि ऐसे मरीजों को सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म या गुनगुने पानी में नींबू तथा शहद मिलाकर पीना चाहिए । इसका इस्तेमाल करने से इम्यून सिस्टम ठीक रहता है ।

गर्मी के मौसम में लू लगने पर कैसे करें घरेलू उपाय

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गर्मी के मौसम में लू चलना यानि की गर्म हवा चलना एक आम समस्या होती है। वहीँ जब हमारे शरीर में पानी की कमी होती है तो ऐसे में बड़ी आसानी से हम लू का शिकार बन जाते हैं। इसलिए इस मौसम में अधिक से अधिक पेय पदार्थो का सेवन करना चाहिए । वहीँ गर्मी के मौसम में लू से बचने के लिए जब घर से बाहर जाएँ तो आपको अपने शरीर का पूरा ध्यान रखना चाहिए । जैसे : आंख, कान, नाक की सुरक्षा के लिए कपड़ा बांधकर बाहर निकलना चाहिए, क्योंकि इन्ही के जरिए गर्म हवा शरीर में पहुंचती है और फिर आपको लू का शिकार होना पड़ता है। जिससे व्यक्ति को अनेक तकलीफ उठानी पड़ती है जैसें : सांस लेने में परेशनियां, शरीर में ऐंठन, हाथ-पैरों के तलुओं व आंखों में जलन तथा इसे में व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है । तो आइए हम आपको इस लेख में बता रहें हैं कि लू से बचने के लिए कुछ घरेलु उपाय ।

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क्या करें लू लग जाने पर
लू लगने पर मरीज को सबसे पहले खुली हवा तथा ठंडी जगह में रखना चाहिए जिससे उसे मिलता है।
बुखार104 डिग्री से अत्यधिक होने पर रोगी के सिर पर बर्फ की पट्टी रखना चाहिए।
प्याज का रस शहद में मिलाकर लू लगने वाले व्यक्ति को खिलाना चाहिए।
लू लगने वाले मरीज को प्यास लग जाने पर उसे नींबू के रस में मिट्टी के घड़े यानिकी सुराही का पानी देना चाहिए । यह पानी बहुत ही उत्तम रहेगा फ्रिज का ठंडा पानी या बर्फ नहीं पिलाना चाहिए क्योंकि यह रोगी के स्वस्थ पर बुरा असर डालता है।
मरीज के शरीर को गीले तौलिए से दिन में चार-पाँच बार पोंछना चाहिए।


लू लगने पर गर्म पेय पदार्थ जैसे : चाय-कॉफी आदि का सेवन नही करना चाहिए
पिसा हुआ कच्चा प्याज को जौ के आटे में मिलाकर मरीज के शरीर पर लेप करने से तुरंत आराम मिलती है ।
धनिए को रात -भर पानी में भिगोकर रखें, फिर उसे अच्छी तरह मसलकर तथा छानकर उसमें चुटकी भर चीनी मिलाकर लू वाले मरीज को पिलाए ।

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लू से बचने के कुछ घरेलू उपाय
दिन के समय में ज्यादा लू चलती हैं । इसलिए जरूरी न होने पर दिन के धूप में बाहर न निकलिए । अगर बहुत ही आवश्यक हो तो अपने सिर व गर्दन को कपड़ें से बांधकर बाहर निकलना चाहिए
इस मौसम में हल्का व सुपाच्य खाद्य-पदार्थों का सेवन करें । अगर घर से बाहर जाना हो तो खाली पेट न जाएं तथा मसालेदार चीजों को खाने से बचें ।
गर्मी के दिनों में पेय -पदार्थों का खूब सेवन करना चाहिए जैसे : नींबू और नमक को मिलाकर दिन में दो – तीन बार पिएं जिससे शरीर में पानी की कमी न होने के साथ लू की शिकायत नहीं होती है।
गर्मी से बचने के लिए आपको विशेष रूप से कपड़ों पर भी ख्याल रखना चाहिए । इस दौरान सूती कपड़े, मुलायम, नरम तथा हल्के कलर एवं फुल आस्तीन के कपड़े पहनना चाहिए।

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शरीर को ठंडक रखने के लिए नियमित मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए जैसे – अंगूर, खरबूज, तरबूज आदि तथा कटे प्याज को जेब में रखकर निकलें ।
कच्चे आम का शर्बत और आम का पन्ना पीने से राहत मिलती है
ध्यान रहें कही भी बाहर निकलनें से पहले हमेशा पानी की बोतल और छाता जरुर अपने साथ लें जाएं
थकान कम लगने एवं ऊर्जा के लिए पानी में ग्लूकोज मिलाकर पीएं
गर्मी के मौसम में बाहर से आने पर तुरंत पानी नहीं पीना चाहिए । ऐसे स्थिति में आपको तब पानी पीना चाहिए जब शरीर का तापमान सामान्य हो ।

गर्मी का मौसम डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरनाक

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गर्मी के मौसम में दिल के मरीजों को अत्यधिक थकान, तनाव (डिप्रेशन) तथा ब्लडप्रेशर बढ़ने की समस्या हो सकती है। ठीक इसी प्रकार डाइबिटीज के मरीजों को भी थकान, तनाव तथा ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या बढ़ जाती है । गर्मी के मौसम में पसीना अधिक आने के कारण शरीर में सोडियम व पोटैशियम की मात्रा की कमी की वजह से मरीज को बैचेनी, नींद कम आना, सुस्ती आदि महसूस होती है।
गर्मी के मौसम में मांसपेशियों में भी जल्दी थकान लग जाती है । वहीँ इस मौसम में पानी की अधिक आवश्यकता होती है। शरीर में पानी की कमी से घबराहट तथा बैचेनी महसूस होने लगती है । गर्मी के मौसम में भूख नहीं लगती है इसलिए पर्याप्त पोषक तत्व व कैलोरीज न मिलने से शरीर में सुस्ती और आलस बनी रहती है।

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तापमान के बढ़ जाने पर होती है समस्या
28 डिग्री सेल्सियस तापमान पर शरीर अच्छी तरह से कार्य करता है, वहीं जब तापमान 35 डिग्री सेल्सियस को पार करता है तो ह्रदय तथा मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसकी वजह से कमजोरी, सिरदर्द होना , चक्कर आना, दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट होना, तनाव तथा जी मिचलाना आदि समस्या हो जाती है।

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डायबिटीज के मरीजों रहें सावधान
गर्मियों के दिनों में तेज धूप में बाहर निकलने की कम कोशिश करें । यदि शरीर में पानी की कमी से अचानक घबराहट, बैचेनी महसूस हो, तो इस स्थिति में आवश्कता के अनुसार पानी, ग्लूकोज तथा नींबू पानी लें तथा साथ ही ठंडें जगह पर आधा-एक घंटे आराम करें जिससे आपको राहत मिल सकती है । अगर आराम करने के बाद भी बैचेनी दूर नही होगी तो इसे अनदेखा न करें, तुरंत ही नजदीक अस्पताल में जाकर डॉक्टर से संपर्क करें । घबराहट तथा बैचेनी की समस्या को जानने के लिए डॉक्टर अनेक जाचें कर सकते हैं जैसे : शरीर में सोडियम और पोटेशियम, ब्लडप्रेशर, ईसीजी, 2डी इको डॉप्लर तथा ब्लड शुगर आदि ।

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कैसे करें बचाव
शरीर में सोडियम और पोटेशियम की हमेशा जांच कराए । पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें । तथा बाहर जाते समय खाली पेट न निकलें ।
लस्सी, दही और मट्ठे का सेवन करें।
मार्किट में मिलने वाले खुले और कटे फलों का सेवन न करें
आम का पना, ककड़ी, खीरा व बेल का शर्बत पीना बहुत ही फायदेमंद होता है
ताजा भोजन करें।
घबराहट और बैचेनी होने पर अपने आप कुछ भी दवा न लें तुरंत ही डॉक्टर परामर्श लें।

मुंह की बदबू को दूर करें इलाइची से

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इलाइची को हमारे स्वस्थ शरीर के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है । इलाइची दो किस्म की होती हैं बड़ी इलायची तथा छोटी इलायची । इलाइची का इस्तेमाल अनेक प्रकार के रोगों से निजात पाने में किया जाता है। तेज खुशबु तथा स्वाद के कारण इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में भी किया जाता है । आज हम इलाइची के प्रयोग से मुँह की दुर्गन्ध की समस्या से निजात पाने के बारे में बात करेंगे।

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मुंह में दुर्गंध आने के लक्षण
जिस व्यक्ति के मुंह से अक्सर बदबू आती है वह लोगों के साथ मिलने में हिचकिचते है, यानीकि संकोच करते है । तथा वह हमेशा अपने मुंह को ढ़ककर और माउथ फ्रेशनर का इस्तेमाल भी करते है। कई बार दांतों की समस्य के चलते भी मुँह से बदबू आने लगती है।

मुंह की दुर्गंध के कारण
प्याज तथा लहसुन के खाने से
मादक, धूम्रपान,तम्बाकू आदि पदार्थो का सेवन करने
ज्यादा तला – भुना आहार के खाने से
अच्छे से दांतों की सफाई न करने से या दांतों में बीमारियां की वजह से ।
डायटिंग करने या खाली पेट रहने से

इलायची मुंह की दुर्गंध दूर करने में मदद करती
अगर आपके मुंह से दुर्गंध आती है तो आप इसे घरेलू तरीके से दूर कर सकते है, जैसे नियमित रूप से सुबह एक भीगी हुई बड़ी इलायची चबाना बहुत ही फायदेमंद होगी । वहीं कुछ ही दिनों में आपको महसूस होगा कि आपके मुंह से दुर्गंध आनी बंद हो गई है। इसके अलावा मुंह के घाव को ठीक करने के लिए इस्तेमाल कर सकते है ।

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इलायची के सेवन से अन्य लाभ
दिमाग को तेज करने में मदद करें – इलाइची के दो -तीन दानों को दो -तीन पिस्ता तथा दो – तीन बादाम के साथ तीन चम्मच दूध डालकर उस सभी मिश्रण को मिक्सी में पीस लें तथा पीसे हुए मिश्रण को एक गिलास दूध में इसे मिलाकर तब तक गाढ़ा करें जब तक यह आधा गिलास न हो। इसमें स्वाद के अनुसार मिश्री मिलाकर पिएं, तथा इसे बच्चों को पिलाने से अति उत्तम होता है। जैसे : दिमाग के तेज होने के साथ याद्दाश्त और आंखों की रोशनी बढ़ाने में इलायची बहुत सहायता करता है ।

पेट में गैस (एसिडिटी) और बदहजमी से निजात – अगर पेट में गैस और एसिडिटी की समस्या हो तो भोजन करने के तुरंत बाद इलाइची खाये इससे आपको राहत मिलेगी । केले के अधिक खाने पर अगर आप उसी समय एक इलाइची के खाने पर केला जल्दी पच जायेगा साथ ही शरीर हल्का हो जायेगा ।

उल्टी होना या जी मिचलाना – अगर कभी उल्टी की समस्या होने पर आपको 5 ग्राम बड़ी इलायची को आधा लीटर पानी में उबालें, जब तक एक-चौथाई पानी रह जाए, फिर हल्का गुनगुना होने पर इसका सेवन करें । यह पानी उल्टी बंद होने में मदद करता है।तथा बस में बैठने पर अगर आप को चक्कर या जी घबराने का लगता है तो इस स्थिति में आप लोगों को मुंह में एक छोटी इलायची को रखना चाहिए । इसके सेवन से जी मिचलाना बंद हो जायेगा ।

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खांसी, खराश, तथा सूजन को दूर करें – एक छोटी इलायची, एक लौंग, एक टुकड़ा अदरक, चार पांच तुलसी के पत्ते को एक साथ पान में रखकर खाने से खांसी से राहत मिलती है । गले में खराश है, या आवाज बैठी हुई है तो सुबह- शाम छोटी इलायची को चबा-चबाकर खाना चाहिए तथा साथ में गुनगुना पानी पीना चाहिए । गले में सूजन होने की समस्या हो तो छोटी इलायची पीसकर मूली के पानी में पीने से फायदा मिलेगा ।

सांस से संबंधित की बीमारी – बड़ी इलायची का सेवन सांस से संबंधी रोगों को दूर रखने में सहायता होती है। जैसे : फेफड़े का संकुचन होना, तथा अस्थमा से ग्रस्त मरीजो को बड़ी इलायची लेना बहुत फायदेमंद होगा।और इसका सेवन सर्दी-खांसी में भी बहुत लाभ मिलेगा ।

सिरदर्द तथा ब्लड प्रेशर कंट्रोल – लगातार सिरदर्द की शिकायत होने पर बड़ी इलायची के तेल से मसाज करने से बहुत लाभ मिलेगा । ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहेगा क्योंकि इलायची में मैग्नीशियम तथा पौटैशियम की मात्रा पाया जाता है ।

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