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डायरिया में दही के सेवन से मिलता है आराम

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आमतौर पर डायरिया असंतुलित एवं संक्रमित चीजों से सेवन के कारण होता है । कई लोग जल्दी ही डायरिया यानि कि अतिसार के चपेट में आ जाते है। डायरिया होने का मुख्य कारण है गंदे पानी का सेवन तथा बैक्टीरिया युक्त खाना। इसमें मरीज को बार बार मल का त्यागना तथा मल बहुत ही पतला होता है, इसके अलावा अनेक समस्यों का सामना करना पड़ता है जैसे : मरीज के सिर दर्द और पेट दर्द हो जाता है । डायरिया होने पर कुछ ही घंटों में रोगी को कमजोरी महसूस होने लगती है क्योंकि लगातार दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है । वहीं बड़ों की अपेक्षा छोटे बच्चे डायरिया की इसकी चपेट में जल्दी आ जाते हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि बच्चे साफ सफाई और उचित खानपान का पालन नहीं कर पाते हैं। इसलिए डायरिया से बचनें के लिए हर अभिभावक को अपने बच्चों के खानपान पर विशेष ख्याल रखने के साथ साफ सफाई का भी ध्यान रखें।

Pic: parenting


डायरिया के निम्नलिखित लक्षण है
1. बार -बार लूज़ मोशन(मल) आना
2. पतले दस्त का होना
3. दस्त के अलावा सिरदर्द तथा पेटदर्द का होना
4. डिहाइड्रेशन की समस्या उत्पन्न हो सकती है
5. मरीज को बैचेनी महसूस होना

डायरिया होने का मुख्य कारण
गंदा पानी और ख़राब भोजन
पेट में कीड़ों के वजह से
पेय पदार्थों की कमी के कारण
शरीर को साफ-सुथरा नहीं रखना
पाचन क्रिया के कमजोर होने पर आदि अनेक कारण है ।

डायरिया का इलाज उचित समय पर करना चाहिए । अस्पताल में इस रोग से बचने के लिए अनेक प्रकार की दवाइयां मिलती है। समय के साथ डॉक्टर को दिखना चाहिए । लेकिन हम आपको कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताएंगे जिसके कारण आप डायरिया को कंट्रोल कर सकते हैं।

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दही का इस्तेमाल : डायरिया के होने पर मरीज को अपने खाने में एक कटोरी दही का सेवन करना चाहिए । दही के खाने से मरीज के शरीर में अच्छे बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ने के साथ ही नुकसानदायक बैक्टीरिया समाप्त होने लगते हैं तथा मरीज को दस्त से जल्दी राहत मिल जाती है।

दही के साथ केले का सेवन : डायरिया के मरीज को दही के साथ केला मिलाकर खाने से अधिक फायदा होता है । इसे बनाने के लिए आपको एक कटोरी में ताजा दही और दो केले लें, तथा केले को छोटे -छोटे टुकड़े में काटकर दोनों को अच्छी तरह से मिला लें । इसका सेवन आप दिन में एक बार कर सकते है, इस प्रकार की समस्या को निजात पाने के लिए आपको लगातार तीन दिन तक इसका सेवन करना चाहिए ।

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मेथी के बीज और दही का सेवन :डायरिया के तुरंत राहत दिलाने में मेथी के बीज को दही के साथ मिलाकर पीने से बहुत ही फायदा होता है । इसे बनाने के लिए आधा चम्मच मेथी के दाने और एक कटोरी ताजी दही को अच्छी तरह से घोल कर
तुरंत खा लेना चाहिए ।

जीरा और दही का सेवन : दस्त लगने पर आधा चम्मच मेथी के बीज तथा आधा चम्मच जीरा इन दोनों मिश्रणों को अच्छी तरह से भून कर मिक्सी में पीस लें, तथा इसके बाद एक कटोरी ताज़ी दही को लेकर उसमे इस पावडर को मिलकर पीने से तुरंत राहत मिल जाती है । इस मिश्रण को २ से 3 बार पी सकते हैं।

गर्मी के मौसम में बच्चों का कैसे रखें ख्याल?

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बच्चों का शरीर बहुत ही नाजुक होता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बहुत कमजोर होती है । और यही वजह है कि उन्हें जल्द ही रोग पकड़ लेता है । वहीँ हम गर्मियों की बात करें तो सबसे लम्बे समय तक पड़ने वाली गर्मियों में बच्चे सबसे अधिक बीमार पड़ते हैं। आइए जानते है कि गर्मी के मौसम की शुरुआत होने के साथ आपको कुछ ऐसे बातों का ख्याल रखना चाहिए, जिससे आपके शिशु को गर्मी से राहत मिलने
के साथ ही उनकी सेहत भी बनी रहे।

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शिशु को सूती एवं आरामदायक कपड़ें पहनाएं
गर्मियों के मौसम में आप अपने शिशु के कम्फर्ट के ख्याल रखते हुए उसे हमेशा सूती कपड़े या हल्के रंग के कपड़ें पहनाएं। क्योंकि सूती कपड़ें शिशु के पसीना आने पर नमी को सोख लेते हैं।अगर आप शिशु को बाहर धूप में ले कर जा रही हैं उसे हल्के फुल बाजू के कपड़े और टोपी पहनाकर लें जाए । ध्यान रहें शिशु की त्वचा को ज्यादा समय तक गीली न होने दें, क्योकि घमौरी होने की समस्या बढ़ सकती है।

पेय पदार्थ
गर्मियों के मौसम में आप अपने बच्चे को दिन -भर थोड़ी -थोड़ी मात्रा में पानी और पेय पदार्थ जैसे : मध्यम -ठंडा जूस, शर्बत आदि पिलाते रहें। क्योंकि जब शरीर से पसीना निकलता है तो शरीर में खून गाढ़ा होने लगता है । आप अपने शिशु को जब कभी बाहर लें जाएं तो हमेशा पानी और उचित भोजन साथ लें जाएं।

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बच्चें को सुबह – शाम नहलाएं
गर्मियों के मौसम में बच्चें को सुबह शाम नहलाना चाहिए क्योंकि नहाने से त्वचा साफ हो जाती है, तथा रोम छिद्र भी खुल जाते हैं । और आसानी से पसीना निकलता है इसी की वजह से शरीर को ठंडक एवं आराम महसूस होता है ।

कमरें का तापमान उचित रखें
अगर आपके घर में ए।सी।और कूलर लगे है तो यह उचित रहेगा परन्तु ए।सी। का तापमान बहुत कम न करें, शिशु के लिए 27 डिग्री तक तापमान सही रहेगा । लेकिन बच्चें को सीधी ठंडी हवा न लगने दें । अगर कही बाहर गर्मी से बच्चा आये तो तुरंत ही एसी या कूलर वाले कमरे में न ले जाए, क्योकि एकदम से शरीर का तापमान कम होना सही नही है, । कूलर का पानी को टाइम से बदलें इससे मच्छर नही होंगे और मलेरिया की संभावना भी कम होगी ।

बच्चें को पानी में खेलने से ठंडक मिलती है
शिशु को थोड़े से पानी जैसे कि बेबी पूल या बाथटब में कुछ खिलौनों के साथ बिठा सकते हैं । बच्चों को खेलना में बहुत मजा एवं आनंद आता है परन्तु ध्यान रहें शिशु को एक सैकंड के लिए अकेला मत छोड़िए ।

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शिशु को मच्छरों से सुरक्षित रखें
कोशिश करें कि आप अपने घर के दरवाजों तथा खिड़कियों पर जाली लगवा दें जिसके कारण मच्छर अंदर नहीं आएंगे। अगर कूलर का उपयोग करते हैं, तो हमेशा पानी चेंज करें तथा साफ करें । अपने आसपास या घर में पानी जमा न होने दें । ऐसे करने पर मच्छरों के प्रजनन की रोकथाम हो जाती हैं । इसके साथ बच्चों को फूल बाजु के कपड़े भी पहनाएं।

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चश्में पहनाएं
अगर आप अपने बच्चें को बाहर लेकर जा रहें हो तो आप धूप और धूल (मिट्टी) से बचने के लिए चश्में का इस्तेमाल कर सकते है । चश्मा हमेशा कंपनी के ही पहनाएं ।

गर्मियों के मौसम में हमारे शरीर को पानी के कमी से होने वाले नुकशान

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वैसे तो हमारे शरीर को भरपूर मात्रा में पानी की जरुरत हर मौसम में होती है लेकिन बात अगर गर्मी की हो तो हमें विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि कि गर्मियों के मौसम में हमारे बॉडी को कार्य करने के लिए अधिक पानी की जरुरत पड़ती है।डॉक्टर्स के अनुसार एक स्वस्थ मनुष्य को दिन भर में लगभग 7 से 8 ग्लास तक पानी पीना चाहिए।
वहीँ गर्मी के मौसम में पानी की कमी के कारण वजन बढ़ सकता है, इसलिए सुबह उठते ही चाय -कॉफी पीने से बचें तथा आप सुबह की शुरुआत एक गिलास पानी से करें । इससे आपका वजन घटने के साथ ही शरीर को ऊर्जा प्राप्त करने में मदद भी मिलेगा। आइए जानते है पानी कम पीने से क्या -क्या हो सकता है

सुबह पानी ना पीने से शरीर में एनर्जी की कमी
सुबह उठते ही आप अगर चाय या कॉफी पीते हैं तो आप इस आदत को छोड़ कर गुनगुना या सादा पानी पीना शुरू कर दीजिये। क्योंकि रात भर की लम्बी नींद के बाद सुबह आपके शरीर को पानी की जरुरत पड़ती है। इससे शरीर को स्वस्थ एवं फ्रेश रखने में सहायता मिलता है। यह मूड फ्रेश करने, बॉडी को एनर्जी देने के साथ ही पाचन की समस्या को भी दूर करता है।

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पानी के कमी से मुंह में बदबू आना
अगर आपके शरीर में पानी की कमी हो तो इसकी वजह से मुंह से बदबू आने की समस्या आ सकती है। मुंह का सुखना तथा पानी की कमी से मुंह में बैक्टीरिया उत्पन्न होते है जिसके कारण सांसों से बदबू आना शुरू हो जाती है। इसके लिए आपको पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए जिससे सांसो की बदबू न आएं ।

पानी की कमी से वजन का बढना
मनुष्य के शरीर में लगभग 70 फीसदी हिस्सा पानी होता है। इसलिए पानी की मात्रा के संतुलन बनाए रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना जरूरी है । शरीर में पानी के कमी होने पर मेटाबॉलिज्मस प्रभावित होता है, तथा जिसके कारण कम खाने पर भी मोटापा तेजी से बढ़ जाता है । आजकल देखा जाता है कि अधिकतर लोग मोटापा की वजह से बहुत ही परेशान है हर किसी के मुंह से यही सुनने को मिलता है कि हम इतना खाते नहीं फिर भी मोटापा बहुत बढ़ रहा है, इसके पीछे काम पानी का सेवन भी एक कारण हो सकता है।

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चेहरे पर झुर्रियां तथा त्वचा का मुरझाना
चेहरे की कुदरती नमी को बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक है उचित मात्रा में पानी के सेवन किया जाये। जो लोग पानी कम मात्रा में सेवन करते है उनकी त्वचा में रूखापन बढने के साथ ही चेहरा मुरझाने लगता है। इसके साथ ही मुंहासे, दाग, झुर्रियां और चेहरे की चमक भी समाप्त हो सकती है । इसलिए त्वचा की नमी बांये रखने के लिए और चेहरे को स्वस्थ रखने के लिए सही मात्रा में पानी पिए ।

दिल की समस्या
शरीर में अगर पानी की कमी हो जाये तो बहुत सारी समस्याएं आपके सामने आने लगती हैं। जो लोग पानी कम पीते है उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे : शरीर में खून का जमना, रक्त संचार सही से न होना तथा दिल से संबंधित अनेक बीमारियों की समस्या हो सकती हैं। इसलिए डिहाइड्रेशन से बचने के लिए सही मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए जिसके कारण हानिकारक पदार्थ पेशाब और पसीने के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।

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अत्यधिक थकान का महसूस होना
शरीर में पानी की कमी के कारण अत्यधिक थकान तथा एनर्जी की कमी महसूस हो सकती हैं । पानी की कमी से सिरदर्द, डिप्रेशन यानीकि तनाव, उलझन आदि अनेक प्रकार की समस्याए हो सकती है अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हो तो सही मात्रा में पानी का सेवन करें । यह आपको कई रोगों और बीमारियों से दूर रखेगा।

जानिए खांसी के कारण, लक्षण तथा घरेलू उपाय

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गर्मी हो या सर्दी बदलते मौसम के साथ खांसी की समस्या होना आम बात है । कभी -कभी खांसी इतनी ज्यादा होती है कि इसकी वजह से दिन की चैन ख़त्म होने के साथ ही रातों की नींद भी समाप्त हो जाती है। खांसी के ठीक होनें के लिए लोग दवा का सेवन करते है किन्तु दवा से तो खांसी ठीक हो जाती है लेकिन कुछ समय बाद फिर से खांसी शुरु हो जाती है ।आज इस लेख में खांसी के कारण,लक्षण,कुछ घरेलू उपाय बता रहे है । आइए जानते है।

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खांसी होने का कारण
बहुत से लोग खांसी से अधिक परेशान रहते है, जिसके वजह से सेहत पर बूरा असर पड़ता है इसलिए जरूरी है खांसी होने के वजहों के बारे में जानना ।

  • टीबी के वजह से होने वाली खांसी
  • अस्थमा (दमा) के रोगियों को
  • एलर्जी वालो को
  • प्रदुषण तथा धूल-मिट्टी के वजह से
  • निमोनिया के ग्रस्त व्यक्तियों को
  • बदलते मौसम के कारण
  • फेफड़ों का कैंसर
  • गले में टॉन्सिल की वजह से
  • धुम्रपान के करने से
  • ठंडी चीज़ें के सेवन से जैसे –कोल्डड्रिंक या आइसक्रीम

खांसी से होने वाली परेशानियां निम्न हैं

  • गले में दर्द तथा ख़राश होना *
  • तेज बुखार आना
  • ठंडा लगना
  • सिरदर्द होना
  • अत्यधिक थकान महसूस होना
  • सीने में दर्द,सीनें में जलन, सांस लेने में दिक्कत तथा नाक बंद होना
  • उल्टी आना
  • नींद की समस्या
  • भूख न लगना
  • खांसी के जल्दी ठीक होने पर इसे सामान्य माना जाता है ,हालाँकि यही खांसी ज्यादा समय तक रहें तो यह चिंता का वजह बन सकता है। खांसी होने पर जल्द ही इलाज करना चाहिए ।
    हम आपको कुछ घरेलू उपाय बता रहें है जैसे –

1. नमक के पानी से ग़रारे करने पर होगा फायदा
एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच नमक डालकर ग़रारे करने से जल्दी आराम मिल जाता है। यह तरीका सबसे आसान होता है । यह एंटीबैक्टीरियल एजेंट के तरह काम करते हुए गले को नमी, ख़राश और दर्द से राहत देता है। इसलिए खांसी के होने पर इसे कुछ दिनों तक नियमित रूप से सुबह – शाम करें ।

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2. शहद का इस्तेमाल
शहद और अदरक या शहद या नींबू के रस को मिलाकर इसे दवा की तरह दो बार पीनें से खांसी में राहत मिलेगी क्यों कि शहद में एटी-माइक्रोबियल की मात्रा होने के कारण वह उन बैक्टीरिया और वायरस को भी मारता है ।

3. अदरक का सेवन
अदरक में एंटीबायोटिक की गुण पाया जाता है । इसे शहद के साथ मिलाकर खाने से दर्द से राहत मिलती है कफ, गले में खराश को कम करने में मदद करता है ।और इसमें एंटी-वायरल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है

4. काली मिर्च

काली मिर्च और शहद दोनों को मिलाकर पीने से आपको खांसी से राहत मिल सकती है तथा काली मिर्च, सर्दी-खांसी को कम करने के लिए एक आयुर्वैदिक दवा की तरह काम करती है । दो चम्मच शहद एक कप गर्म पानी में कालीमिर्च पाउडर को मिलाए तथा इस चाय का सेवन करें । खांसी के दौरान इसको दिन में दो बार लें सकते है ।

5. लहसुन का सेवन
लहसुन में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है लहसुन की दो कली को एक गिलास दूध में उबालें फिर सेवन करें इससे गले के दर्द तथा खांसी में तुरंत राहत मिलती है ।

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6. दूध में हल्दी पाउडर का सेवन करें

खांसी होने पर दूध में एक चुटकी हल्दी पाउडर मिलकर पी सकते है। यह आप तब तक लें सकते हो जब तक आपकी खांसी ठीक न हो, रात को सोते समय पीने से ज़्यादा फायदा होगा तथा नींद भी अच्छी आएगी । गर्म दूध के पीने से गले को नमी तथा ख़राश में आराम मिलती है । हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है जिसकी वजह से पुरानी से पुरानी खांसी को दूर करने में मदद करती है ।

कैसे करें खांसी से बचाव

तला हुआ तथा ज्यादा मसालेदार खाद्य-पदार्थ से बचें

मौसम के बदलते समय ठंडी चीज़ें का सेवन न करें जैसे :- आइसक्रीम या कोल्डड्रिंक आदि

अधिक मात्रा में पानी पीए

अगर कही बाहर धूप या गर्मी से आये तो तुरंत ठंडी चीज़ों या ठंडा पानी पीने से बचें

बाहर गर्मी से आकर कुछ समय रुककर नहाए तुरंत न नहाएं

जब भी बाहर जाए तो मुंह पर मास्क या कपड़ा बांधकर रखनें से आपके मुंह में धूल-मिट्टी नहीं जाएगी

गर्म चीज के खाने के बाद तुरंत ठंडा नहीं खाएं

ज़्यादा ठंडे फलों को न खाएं

धूम्रपान से बचें
अगर आपको खांसी की समस्या अधिक हो तो देर न करें तथा डॉक्टर से सलाह लेकर खांसी की दवा लें।

गर्दन दर्द के कारण और उसके निवारण

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आमतौर देखा जाता है जो लोग घंटों बैठकर काम करते है उनको अधिकतर सर्वाइकल स्पेन्डिलाइसिस की संभावना हो सकती है । गर्दन में दर्द का कारण स्वास्थ्य संबंधित पुरानी चोट, गलत तरीके से बैठना, लेटकर टीवी देखना, देर तक बिस्तर में लेटना तथा तकिये का इस्तेमाल ज्यादा ऊँची या नीची करना के वजह से भी हो सकती है ।सर्वाइकल स्पेन्डिलाइसिस में आपकी गर्दन के साथ रीढ़ की हड्डी भी प्रभावित होती है।

Pic: medicalnewstoday

गर्दन दर्द के लक्षण
जब आप के गर्दन में दर्द होता हैतो उसके कुछ लक्षण इस प्रकार के हो सकते हैं।

  • गर्दन को छूने पर दर्द महसूस होना
  • खाना निगलते समय दर्द होना या कठिनाई होना
  • तेज गर्दन दर्द से चक्कर आना, तथा उल्टी जैसा होना
  • लसिका ग्रन्थि में सूजन आना
  • गर्दन का सुन्न होना
  • तेज बुखार आना
    गर्दन दर्द का समस्या गर्दन के नसों के दबने के वजह से होती है । अगर यह दर्द एक सप्ताह से ऊपर हो तो इसे अनदेखा न करें और तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें ।

गर्दन दर्द होने के कारण

गर्दन दर्द निम्नलिखित कारणों से होता है जो इस प्रकार है

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  • गर्दन दर्द का सामान्य कारण जैसे – बिस्तर पर बैठकर पढ़ने से, स्टीयरिंग के ऊपर झुककर कई घंटो तक गाड़ी चलाने से भी गर्दन में दर्द हो सकती है। हालाँकि अधिकतर दर्द मांसपेशियों के खिचाव के कारण होता है ।
  • बढ़ती उम्र के हिसाब से शरीर के अन्य जोड़ों की जैसे ही गर्दन की जोड़ भी घिस जाते है । इसी के कारण गर्दन में अनेक समस्या उत्पन्न हो जाती है ।
  • गर्दन की हड्डी या डिस्क कई बार अधिक जगह घेर लेती है । इसी वजह से गर्दन दर्द शुरू होता है ।
  • गर्दन पर चोट लगने की वजह से गर्दन दर्द हो सकता है
  • यह दर्द रोग की वजह से होता है, जैसे – रुमेटी गठिया तथा रुमेटाइड अर्थराइटिस, दिमागी बुखार या कैंसर की आदि। इसलिए गर्दन दर्द के रोकथाम के लिए व्यायाम अति आवश्यक है ।

Pic: activehealthcentre

आइए जानते है दर्द का समाधान कैसे करें
जी हां अगर आपको गर्दन दर्द की शिकायत हैं तो इसका समाधान करने के लिए आपके पास अनेक प्रकार के तरीके है जैसे : दर्द के स्थान पर मसाज करना तथा बर्फ को लगाना परन्तु इस दर्द से बचाव के लिए आप घर हो या दप्तर में सबसे पहले अपना पोस्चर सही बनाएं रखें । यदि आप का काम दिनभर कुर्सी पर बैठकर करना है तो सीधा बैठें तथा आराम से दोनों पैरों को जमीन पर रखकर कंधों को रिलेक्श दें । मांसपेशियों को आराम देने के लिए अलग -अलग पोजिशन में बैठे । यदि आप कम्प्यूटर के सामनें बैठकर काम करते हो तो अपना वर्क स्टेशन ठीक ढंग से रखें । तथा मानीटर का टाप आखों के सामने रखें । अपने जीवनशैली मैं तनाव तथा डिप्रेशन से बचें। ज्यादा देर तक टेलीफोन पर बातों न करें हो सके इसके जगह हैड या स्पीकर फोन का उपयोग कर सकते है ।इसके अलावा

Pic: activehealthcentre

  • मोबाइल फोन को कंधें के सहारा लेतें हुए बातें न करें
  • सोतें समय गर्दन को टेडी न करें
  • तकिये का इस्तेमाल सही तरीके से करें
  • तकिया न ज्यादा ऊँचा हो न ज्यादा नीचे होना चाहिए
  • अगर आप बेड पर पढ़तें हो तो ध्यान दीजिए कि अपना पोस्चर सही रहें
  • अपनी किताबों को किसी ऐसे स्थान पर रखें जिससे किताब को आसानी से पकड़कर तथा गर्दन को टेडी न करनी पड़ें
  • कार की सीट को अपराइट तरीके से रखें
  • हमेशा तनकर खडें हो तथा पीठ को सीधी रखें
  • धुम्रपान से बचें
  • संतुलित आहार लें
  • सुबह -सुबह टहलने से भी गर्दन दर्द में राहत मिलती है इसलिए हमेशा मोर्निग वाक,व्यायाम आदि करें । ऐसे करने पर गर्दन दर्द से छुटकारा मिल सकता है ।
  • गर्दन दर्द अर्थराइटिस या इन्फेक्सन के वजह से भी हो सकता है इस स्थिति में अच्छी थैरेपी के लिए डाक्टर से उचित सलाह लें
    अधिकतर लोगों में गर्दन दर्द होने का आम समस्या गलत पोजिशन को ही दर्शाया है इसलिए आप अपने स्वस्थ जीवनशैली में गर्दन दर्द से बचने के लिए इस समस्या का हल कर सकतें है ।

सिरदर्द की समस्या के कई प्रकार

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बदलती जीवनशैली और असंतुलित खाद -पदार्थों के सेवन करने से सिरदर्द की समस्या आम हो गई है । सिरदर्द का मतलब है कि सिर के एक या एक से ज्यादा हिस्सों में दर्द तथा गर्दन के पीछे हिस्से में हल्के या तेज़ दर्द का होना। सिर दर्द अनेक कारणों से होते है, जैसे – नींद पूरी न होने से , दांतों में दर्द के वजह से, थकान लगने पर , दवाई की गलत सेवन से, चश्मे का नंबर बढ़ने तथा मौसम के चेंज हो जाने पर हो सकता है। सिरदर्द अलग-अलग प्रकार के होते है यह नहीं कह सकते है कि सारे सिरदर्द में डॉक्टर की जरूरत पड़े या सारे सिरदर्द सामान्य हों । आइए जानते है सिर दर्द के बारें में ।

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1. तनाव यानी की टेंशन
यह सिरदर्द बहुत ही सामान्य है । ऐसे दर्द में सिर के दोनों तरफ तेज दर्द होने लगता है तथा सिरदर्द के कारण गर्दन तथा कंधे की मांसपेशियों में बहुत समस्या आ जाती है । अक्सर देखा जाता है कि इस तरह के सिरदर्द में तनाव, नींद की समस्या या सिर पर चोट लगने के कारण होता है ।
नोट -यह अधिक सर्दी, एयर-कंडीशन के संपर्क में आने के कारण हो सकता है । गर्दन और सिर पर ठंडी हवा लगने से भी सिरदर्द हो सकता है । तथा तनाव यानी कि टेंशन के कारण सिरदर्द में फिज़ियोथेरेपी के करने से बहुत फायदेमंद हो सकता है ।

2. माइग्रेन से सिरदर्द
माइग्रेन से आजकल बहुत से लोग परेशान है। क्योंकि ख़राब खानपान और बिजी लाइफस्टाइल के कारण यह एक बड़ी समस्या बन चूकी है। कभी -कभी यह दर्द असहनीय हो जाता है तथा कई बार कुछ मिनटों में सही हो जाता है। यह सिर के एक तरफ होने के कारण इसे अधकपारी भी कहा जाता है। इसे एक आनुवांशिक रोग भी माना जाता है। इस बीमारी में रोगी के जी मिचलाना, उल्टी होना, दृष्टि-दोष, सुस्ती, बुखार और ठंड भी अधिक लगती है ।
माइग्रेन दर्द ज्यादा बढनें के वजह है टाइम से खाना नही खाना,नींद पूरी न लेना, तेज खुशबू, हार्मोंन में बदलाव, एलर्जी, शराब पीने से, डिप्रेशन या तेज आवाज की वजह से हो सकता है ।

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3. क्लस्टर सिरदर्द
इस तरह के सिरदर्द कभी भी किसी ही समय शुरु होता है तथा यह दर्द बहुत ही तेज एवं पीड़ादायक भी होता है। यह दिन में कई बार हो सकता है अधिक समय तक नही होता है यह दर्द एक ही समय पर शुरु होता है । इस सिरदर्द की वजह है, तेज रोशनी, धूम्रपान, थकावट, तेज गर्मी आदि ।

4. साइनस में होने वाला सिरदर्द

मौसम के बदल जाने पर सिरदर्द का होना सामान्य है। साइनस सिरदर्द तेज तथा कई बार होने के वजह से यह दर्द सिर के आगे के तरफ तथा चेहरे पर अनुभव होता है यह सिर दर्द अधिकतर सुबह के समय होता है तथा व्यक्ति अपने सिर नीचे की और झुकता है तो यह दर्द तब महसूस होता है। इस तरह सिरदर्द में कई प्रकार की समस्या आ जाती है जैसे – आंखों पर, मथें पर, गाल पर ,ऊपरी दांत में दर्द, बुखार, ठंड लगना, चेहरे पर सूजन और सिर के अगले हिस्से में दबाव और दर्द होता है। यह अधिकतर धूल-मिट्टी, प्रदूषण, संक्रमण, सर्दी-ज़ुकाम, बुख़ार, ज्यादा ठंडी हवाएं चलने कारण हो सकती है ।

Pic: fashionnewsera

सिरदर्द को नजरंदाज न करें और बरतें सावधानियां
अगर आपको सिरदर्द की समस्या हो तो सबसे पहले तनाव कम करें तथा पर्याप्त नींद लें फिर भी इन सबसे आराम न मिले तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें सिरदर्द के उचित इलाज करें । आपकी लापरवाही की वजह से समस्या बढ़ सकती है । कई बार असंतुलित भोजन के कारण गैस बनने भी सिरदर्द हो सकता है आप अपने खानपान और रुटीन पर ध्यान दें तो आप सिरदर्द से निजात पा सकतें है।

किडनी फेल होने के लक्षण

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किडनी मानव शरीर का बहुत अहम और नाजुक हिस्सा है। शरीर की गंदगी को सफाई करने के साथ ही किडनी का सबसे बड़ा कार्य है कि खून को फ़िल्टर करता है। तथा हानिकारक तत्व को पेशाब के रूप में शरीर से बाहर निकलता है। यदि हमारे शरीर से गंदगी बाहर न आए तो इस स्थिति में जान भी जा सकती है । आजकल असंतुलित खाद्य-पदार्थो के सेवन, समय पर भोजन न करना, शरीर में पानी की कमी होनें के कारण व्यक्ति की किडनी यानि गुर्दा में भार बढ़ जाता है, और किडनी काम करना बंद कर देती है तथा धीरे -धीरे यह ख़राब हो जाती है । आइए आपको बता दें कि किडनी के ख़राब होने का लक्षण क्या- क्या है

Pic: empowher

यूरिन में ब्लड आना
अगर व्यक्ति के यूरिन यानी की पेशाब के रास्ते ब्लड आ रहा हो तो यह किडनी के ख़राब होने का लक्षण हो सकता है । इस स्थिति को नजरंदाज न करें किसी यूरोलाजिस्ट से परामर्श लें।

Pic: dailyhunt

उल्टी होना
किडनी में दिक्कत की वजह से पेट में दर्द तथा बार -बार उल्टी आनें का संकेत हो सकता है ।

यूरिन की समस्या
दिन में कई बार और बार -बार पेशाब आना, मूत्रविसर्जन के समय अगर पेशाब में जलन व बैचेनी हो तो यूरिन इन्फेक्सन के कारण भी हो सकता है। किन्तु बार -बार होने पर यह समस्या को नजर अंदाज नही करें । ऐसे में हालत को जाननें की कोशिश करें तथा चेक -अप करवाए ।

शरीर में सूजन आना
आंखो के नीचे बहुत सुजन आ जाना यह भी किडनी फेल होने की निशानी हो सकती है वहीँ पूरे शरीर में सूजन आना भी किडनी डैमेज होना का लक्षण हो सकता है किडनी के ख़राब होने पर कई विषैले पदार्थ जमा हो जाते है जिसके कारण पेशब का कलर गाढ़ा हो जाता है ।

Pic: youtube

बुखार की समस्या
बार -बार तेज बुखार का आना या ठण्ड लगना इस लक्षण से पता चलता है कि किडनी सही से कार्य नही कर रही है ।
पेट में दर्द
आमतौर पर पेट के दायी तथा बायीं तरफ बहुत तेज दर्द होना किडनी के ख़राब होने के लक्षण हो सकते हैं।

साँस लेने में दिक्कत
शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाने के कारण यही पानी फेफड़े में भर जाता है, ऐसे में फेफड़े अपने कार्य करना बंद कर देते है । ऐसे में मरीज को सांस लेने में परेशान होती है । अधिकतर जो लोग धुम्रपान करने वालों को यह समस्या ज्यादा होती है, साँस लेने में दिक्कत हो तो यह किडनी जैसे समस्या का लक्षण हो सकती है ।

Pic: zeenews

बेहोश होना
अगर आदमी बिना किसी भी रोग का बेहोश एवं बैचेनी महसूस करता हैं तो बहुत ही चिंता का विषय है । इस कारण भी किडनी का फेल होने का संकेत हो सकता है ।
इन सभी लक्षणों को सावधानी से पढ़ें अपनी शरीर में किसी भी प्रकार की लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह लें क्योंकि मनुष्य की जिन्दगी बहुत ही अनमोल होती है, इसे स्वस्थ एवं दुरस्त रखना अपने हाथों में है।

किडनी का कैसे करें बचाव

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किडनी शरीर का बहुत ही अहम हिस्सा होता है । किडनी का कार्य है, रक्त में मौजूद पानी तथा विषैले पदार्थों को अलग करना तथा ब्लड साफ करना, यूरिन बनाना, हार्मोन बनाना आदि। इससे यह स्पष्ट होता है कि किडनी हमारे शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण भाग है । अगर हम उचित देखभाल नहीं करते है तो किडनी से संबंधित बहुत प्रकार की बीमारियां हमारे शरीर में होती है । इसका उपचार सही समय पर नहीं करने पर स्थिति गंभीर भी हो सकती है । हम आपको किडनी के सुरक्षा से संबधित कुछ कारण एवं उपाय आपको बताएँगे।

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किडनी फेल होने के कारण
आजकल बदलती जीवनशैली में आमतौर पर देखा जाता है, कि भागदौड़ की जिंदगी की वजह से खान – पान में ध्यान नहीं दें पाते है, तथा जंक फ़ूड तथा फास्ट फ़ूड को लोग बड़े ही मजे (चांव )से खा लेते हैं।, जिसकी वजह से लोगों के जीवन से संतुलित आहार दिन प्रतिदिन गायब होते जा रहें है । किडनी से ग्रस्त लाखों लोग अपनी जान गवां देतें है क्योकि बहुत से लोगों को किडनी ख़राब होने का पता नहीं चलता है । इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। 50 प्रतिशत मरीज ऐसे होते है जिन्हे बीमारी का पता तब चलता है, जब 65 या 70 प्रतिशत किडनी ख़राब हो चूकि होती है फिर किडनी को ट्रांसप्लांट करवाना पड़ जाता है । किडनी से सम्बंधित बेसिक नॉलेज हर व्यक्ति को होनी चाहिए ।

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शरीर में पानी की मात्रा कम होना
सबसे बड़ा कारण है, शरीर में पानी की कमी होना, पानी शरीर के लिए बहुत ही जरूरी होती है । शरीर में पानी की कमी के कारण किडनी पर बहुत बुरा असर पड़ता है, क्योंकि किडनी खून को साफ करने के साथ ही ख़राब पदार्थों को भी अलग करती है, जिसके लिए शरीर को भारीमात्रा में पानी की आवश्यकता होती है ।

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अत्यधिक नमक का सेवन करना तथा मीठा खाना
बहुत से लोग खाने में नमक का सेवन अत्यधिक करते है, शायद उन्हें पता नहीं कि किडनी पर इसका बुरा असर पड़ता है। अधिक नमक खानें से हमारे शरीर में सोडियम बढ़ने के साथ ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है, इसलिए खाने में नमक की मात्रा कम लें । मीठा ज्यादा खाने से यूरिन से प्रोटीन निकलने लगता है, और इसी से किडनी की समस्या हो जाती है ।

पेशाब को रोकना तथा नींद कम लेना
कुछ लोगों की आदत होती है, पेशाब यानी कि यूरिन के प्रेशर को रोक कर रखने की , जो कि बहुत ही खतरनाक होता है, पेशाब के प्रेशर को रोकने से किडनी के ख़राब होने और पत्थरी होने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए भरपूर पानी पियें और पेशाब को रोकें नहीं बल्कि समय पर पेशाब को करते रहें।

तम्बाकू तथा धूम्रपान करना – धूम्रपान या तम्बाकू का सेवन करने से फेफड़े के साथ ही लिवर से संबंधित रोग भी हो सकते हैं और बहुत से बीमारियों का सामना भी करना पड़ सकता है । इसलिए इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए ।

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किडनी के ख़राब करने में कुछ अन्य आदतें
अधिक शराब पीना, पर्याप्त आराम न करना, देर तक भूखा रहना, असंतुलित भोजन का करना, अत्यधिक मांस खाना आदि किडनी को हानि पहुंचा सकता है।

किडनी को स्वस्थ कैसे रखें उपाय

  • अगर किडनी में स्टोन की समस्या हो तो हर रोज विटामिन बी 6 का सेवन करें इसी के साथ विटामिन डी तथा सी के सेवन से किडनी ख़राब होने से बच सकती है।
  • किडनी रोगियों को सुबह शाम सब्जियों के रस पीना चहिए जैसे – गाजर,लौकी,खीरा,पत्तागोभी, आलू, तरबूज आदि का रस पीने से बहुत ही फायदा रहता है।
  • गुर्दे के मरीजों को रुक -रुक कर आधे – आधे गिलास पानी पीना चाहिए जिसकी वजह से किडनी में मौजूद विषैले पदार्थ यूरिन के रास्ते बाहर निकलने में सहायक होता है ।
  • संतुलित भोजन खाये तथा प्रतिदिन व्यायाम के साथ अपने वजन पर नियंत्रित करें । इस बीमारी को रोकथाम और शीध्र इलाज के लिए चैक-अप करवाना अति आवश्यक है ।

कैसे करें पीठ दर्द को कम?

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आज के आधुनिक जीवनशैली में पीठ दर्द की शिकायत हर उम्र के व्यक्तियों की समस्या बन चूकी है । पीठ दर्द से व्यक्ति को शारीरिक गतिविधियों को करने में तकलीफ होती है, जैसे – झुकना, बैठना, उठना, पेडू और कूल्हों के पास दर्द आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है। देखा जाता है कि यह अकसर 45 से 60 उम्र के व्यक्तियों में समस्या अधिक होती है, क्योंकि दिन प्रतिदिन उम्र के हिसाब से शरीर में खून की कमी, कमजोरी,विटामिन डी, तथा कैल्शियम की कमी से यह समस्या हो जाती है, तथा जिन लोगों को पीठ दर्द होती है उन्हें हड्डियाँ मजबूत रखनें के लिए अपनें खानपान में इन चीजों को शामिल करना चाहिए, जैसे – कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन सी, विटामिन डी-3, साथ ही अनाज, लौकी, मछली, हरी सब्जियों और फलों का सेवन करना चाहिए । पीठ दर्द को नजर अंदाज न करें क्योकि ध्यान नही देने पर बड़ी समस्या बढ़ सकती है। पीठ दर्द से निजात पाने के लिए प्रतिदिन घरेलू काम, एक्सरसाइज, तथा कसरत करनें पर आपको फायदा मिल सकता है ।



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पीठ दर्द के कारण

  • अधिक वजन होने के कारण ।
  • अत्यधिक भारी सामान के उठाने पर ।
  • झटके के साथ उठनें या बैठनें से ।
  • गलत शारीरिक गतिविधियाँ करने से ।
  • मांसपेशियों में खिचाव के कारण ।
  • बहुत ज्यादा थकान लगने के कारण ।
  • लगातार कुर्सी पर बैठने से ।
  • रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर की वजह से ।
  • गुर्दें में संक्रमण के कारण ।
  • ऊंची हील वाली सैंडल पहनने से

पीठ दर्द से निजात पाने का उपाय

  • सबसे पहले शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ाए, सुबह -शाम को एक – एक गिलास दूध पिएं तथा इसके अलावा आप प्रतिदिन सुबह की धूप में 30-35 मिनट तक बैठने या टहलनें का प्रयास करें । सूर्य की किरण से शरीर को विटामिन डी प्राप्त होने के साथ ही हड्डियाँ भी मजबूत होंगी ।
  • लहसुन की चार-पांच कलियों को सरसों या नारियल के तेल में खूब अच्छे से गर्म करें तथा ठंडें होनें पर इस तेल को अपनी हल्के हाथों से मालिश करें। धीरे-धीरे कमर दर्द से राहत मिलेगा ।
  • बढती उम्र के साथ पीठ दर्द के अलावा शरीर के अन्य अस्थियों के साथ रीढ़ की हड्डी का जोड़ भी कमजोर हो जाता है, इसके अलावा शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण कंधा, बांह, गर्दन और पीठ दर्द की समस्या हो जाती है। इस प्रकार की समस्या से बचने के लिए सुबह जल्दी उठना, टहलना, व्यायाम आदि करने से आप अपने शरीर को स्वस्थ एवं दुरुस्त रख सकते हैं ।
  • पीठ दर्द के होने पर आप एक टब में गर्म पानी बनाए उसमें हल्का सा नमक मिलाए फिर एक तौलिया को डालकर और निचोड़कर अपनी पेट के बल लेटें तथा तौलिये को दर्द के स्थान पर रखें और सिकाई करें इससे आपको आराम मिलेगा ।
  • अगर आपको चोट लगने के वजह से पीठ दर्द हो रही हो तो आप बर्फ से सिकाई करे । बर्फ के सिकाई से मांसपेशियों में हो रही सूजन एवं दर्द से छुटकारा मिलता है ।
  • आप अपने खान -पान पर विशेष ध्यान दें तथा वजन को भी नियंत्रित करें ।
  • तुलसी के 6 से 8 पत्ते को एक गिलास पानी के आधे होने तक उबालें जब ठंडा हो जाए तो उसमे एक चुटकी नमक मिलाकर पीने से पीठ दर्द में आराम मिलेगा ।

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पीठ दर्द से बचाव के लिए ये भी अपनाएं

  • मलाई रहित दूध में हल्दी डालकर पी सकते है ।
  • नियमित अपने आहार मे कैल्शियम और विटामिन सी की मात्रा लें ।
  • वसा युक्त भोजन न करे तथा प्रतिदिन संतुलित आहार लें ।
  • अगर आपकोपीठ दर्द हो तो उस दर्द में व्यायाम न करें ।
  • अत्यधिक बैठें मत कुछ न कुछ काम को करते रहें ।
  • उठना,बैठना, चलना, सोना आदि का पोस्चर हमेशा सही रखें ।
  • नियमित एक्सरसाइज करे ।
    अगर आपके पीठ में दर्द है तो आप ये तरीके आजमा सकते हो लेकिन अत्यधिक दर्द होने पर चिकित्सक से जरुर परामर्श लें

गर्मियों में छाछ पीने के हैं कई फायदे

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गर्मियों के मौसम में छाछ,मीठी लस्सी आदि का सेवन बहुत ही अच्छा लगता है। छाछ शरीर को ठंडक प्रदान करने के साथ ही पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद होता है। क्योकि इसको बनाने में दही को मथकर मक्खन अलग निकल दिया जाता है। तथा यह एक तरल पेय होने के साथ वसा रहित होती है । इसमें विटामिन तथा खनिज प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, यह खाना पचाने में मदद करता है । गर्मियों में छाछ की तुलना अमृत से की जाती है, छाछ शरीर को हाइड्रेड रखने एवं पेट को भी गर्मी से शांत रखने में मदद करता है । तो जानते है छाछ के फायदे के बारे में



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छाछ से होने वाले फायदे

ब्लड प्रेशर को कंट्रोल – प्रतिदिन छाछ के सेवन करने से ब्लड प्रेशर को घटने में सहायक होता है, क्योंकि इसमें बायोएक्टिव प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण हृदय संबंधी बिमारियों का खतरा कम होता है ।

कॉलेस्टॉल को कम करने में सहायक – प्रतिदिन छाछ के पीने से शरीर में कॉलेस्टॉल की मात्रा कम हो जाता है तथा छाछ को एक आयुर्वेदिक औषधि भी माना जाता है



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कब्ज को दूर करें – जब कभी हम असंतुलित भोजन करते है तो उसके पश्चात पाचन तन्त्र पर दबाव पड़ने के कारण पेट में गड़बड़ी होने से दस्त (डायरिया) तथा कब्ज हो जाती है । ऐसे में छाछ इन खतरे से बचाने में सहायता करता है ।

वजन करे नियंत्रित – छाछ में पोषक तत्वों के होने के साथ ही एंजाइम भी अधिक मात्रा में होता है, छाछ को भोजन करने के बाद में पीने से शरीर में धीरे -धीरे चर्बी भी कम हो जाती है,जिससे वजन नियंत्रण में मदद मिलता है । छाछ में वसा तथा कौलोरी की मात्रा नही होता है । गर्मियों में प्रतिदिन छाछ के पीने से शरीर में पानी की कमी को पूरी होती है तथा शरीर को एनर्जी प्रदान करता है । छाछ में विटामिन बी, कैल्शियम, प्रोटीन,और पोटैशियम प्रचुर मात्रा पाया जाता है ।

पेट में गैस (एसिडिटी) से राहत – एसिडिटी होने पर छाछ में कुछ आवश्यक मसाले डालकर सेवन करना चाहिए जैसे: काली मिर्च, जीरा, नमक, अदरक आदि को मिलाकर पीने से गैस की जलन से राहत मिलेगी ।



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त्वचा के सौंदर्य बढ़ाए – छाछ त्वचा को मॉइस्चराइज के साथ ही प्राकृतिक चमक भी देता है। तथा छाछ का प्रयोग फेस मास्क के रूप में किया जाता है, यह त्वचा को नमी, चमक तथा झुर्रिया को कम करने में सहायता करता है तथा इसके साथ ही आप इसे बालों पर भी लगा सकते है जिससे आपके बाल मुलायम और चमकदार हो जाएंगे ।

छाछ के अनेक फायदे होने के साथ ही कुछ नुकसान भी है आइए एक नजर इस पर डालते हैं ।

छाछ के पीने से होने वालें नुकसान

कोई भी व्यक्ति जिसे गुर्दे की समस्या है या इससे सम्बंधित किसी रोग से पीड़ित हो तो उसे छाछ का सेवन डॉक्टर के परामर्श से करना चाहिए।

एक्जिमा जैसी त्वचा के समस्या से पीड़ित व्यक्ति को भी छाछ का सेवन नहीं करना चाहिए ।

छाछ में सैचुरेटेड फेट होने के कारण कुछ गंभीर स्थिति में कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ सकता है । जिससे ह्रदय रोगियों को नुकसान पहुंच सकता है ।



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छाछ का सेवन सर्दी -जुकाम तथा खांसी की स्थिति में नहीं करना चाहिए ।

अगर आपको बुखार एवं कमजोरी महसूस हो रही हो तो छाछ का सेवन नहीं करना चाहिए ।

जब कोई व्यक्ति छाछ का अत्यधिक सेवन करता है तो ऐसे में उसे पेचिस (डायरिया) या उल्टी जैसे शिकायत हो सकती है ।

जानें थायराइड के कारण और बचाव

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आजकल थाइराइड आम बात हो गई है। लोगों के बिजी लाइफस्टाइल और असंतुलित भोजन की वजह से थायराइड के मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। थायराइड का लक्षण बहुत देर बाद पता चलता है इसलिए कुछ लोग थायराइड को साइलेंट किलर भी कहते हैं। थायराइड गले में एक तरह की ग्रंथि का नाम है। यह साँस नली के पास स्थित होता है तथा इसकी बनावट एक तितली जैसी होती है। यह ग्रंथि व्यक्ति के शरीर में मेटाबॉल्जिम को नियंत्रित करने में सहायता करती हैं यानी कि जो भोजन हम ग्रहण करते है,उसे ऊर्जा में बदलने मदद करती है। थायराइड हमारे शरीर में मांसपेशियों, हृदय, हड्डियों व कोलेस्ट्रोल को भी प्रभावित करनें के साथ ही साथ वजन का बढना तथा हार्मोन असंतुलित होने का भी कारण बनता है। थायराइड की वजह से हमारे शरीर में कई प्रकार की समस्याएँ और अनेक रोग उत्पन्न हो जाते हैं। यह बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक होती है आइए जानते है थाइराइड के कुछ लक्षण तथा कारण

थायराइड के कुछ प्रारम्भिक लक्षण इस प्रकार है

थायराइड होने से गले में दर्द,खाना निगलते समय कठिनाइयां का अनुभव होता है। थायराइड की वजह से पेट में कब्ज, खाना पचने में समस्या या लेट में पचना । थाइराइड की समस्या हो जाने पर व्यक्ति के हाथ पैर हमेशा ठंडे होते है। मरीज की प्रतिरोधक क्षमता यानीकि इम्यून सिस्टम कमजोर होने के साथ कई बीमारी घेर लेती है। इस तरह के व्यक्ति जरा सा भी काम के करने में ज्यादा थकान महसूस करते हैं तथा इनका शरीर सुस्त रहता और आलस्य भी बहुत होता है। थायराइड से ग्रस्त मरीजों के त्वचा में रूखापन आ जाता है। थायराइड के वजह से किसी भी व्यक्ति को यदि जुकाम हो जाता है,वह जुकाम नार्मल व्यक्तियों की अपेक्षा लम्बे समय तक रहता है ।

ऐसे व्यक्ति जिसे थायराइड है वह हमेशा तनाव में यानी कि डिप्रेशन में रहते है, ऐसे लोगों की सोचने की क्षमता भी कम हो जाती है, उनका किसी काम में मन नहीं लगता तथा उनकी याद्दाश्त भी कमजोर हो जाती है।
थायराइड होने पर व्यक्ति के बाल झड़ जाते है तथा गंजापन होना साथ ही भौहों के बाल भी झड़ जाते हैं।कमजोरी का होना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द जैसी समस्या भी थायराइड के लक्षण हैं। थायराइड आनुवंशिक रोग भी होता है, यदि आप के परिवार में किसी भी सदस्य को थाइराइड है तो आपको भी होने की संभावना रहती है ।



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थायराइड के कारण

खाने में आयोडीन की कमी होने के कारण थायराइड नोड्यूल बढ़ने की समस्या हो जाती है।

ज्यादातर दवाइयों का सेवन करने के कारण उनके साइड इफैक्ट से थायराइड की समस्या हो सकती है।



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अत्यधिक तनाव, टेंशन लेने से इसका असर भी थायराइड ग्रंथि पर पड़ती है ।

गर्भावस्था(प्रेग्नंसी ) के समय स्त्री का तनाव ग्रस्त होने के कारण भी थायराइड की समस्या बढ़ सकती हैं।

प्रदूषण के कारण हवा में घुले जहरीले कण थायरोइड ग्रंथि को भी हांनि पहुंचा सकते है।

अगर आपको ग्रेव्स रोग है तो आपके थायराइड बढ़ने के चांसेज बढ़ जाते है चूकि ग्रेव्स एक आनुवंशिक रोग है इसलिए यह थायराइड को भी प्रभावित करता है यह रोग 20 से 40 वर्ष की महिलाओं को अपनी गिरफ्त में लेता है ।



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थायराइड से बचाव
1 – नियनित रूप से फाइवर, कम वसा वाले भोजन अपने आहार में लें जिससे आपका वजन एवं शरीर स्वस्थ रहेगा।
2 – निरंतर बैठे मत रहें कुछ न कुछ शारीरिक गतिविधि करते रहना चाहिए।
3 – डिप्रेशन या तनाव में न रहें।
4 – सुबह जल्दी उठें, मॉर्निग वॉक, व्यायाम, योग आदि का प्रयास करें। थायराइड किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकती हैं इसे नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। तथा उपरोक्त कोई भी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें ।

कैल्सियम से भरपूर हैं ये सुपर फ़ूड

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एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना 800 से 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की ज़रुरत होती है। खासकर हड्डियों, मांसपेशियों और दांतों की मजबूती के लिए। इसके लिए शरीर में कुछ एंजाइम और हॉर्मोंन होते हैं जिसके विकास और रखरखाव के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी होता है। जब शरीर में कैल्शियम की कमी होती है तो ब्लडप्रेशर के बढ़ने, मांसपेशियों में शिथिलता ,शारीरिक विकास में अवरोध, दांतों का कमजोर हो कर गिरना, जोड़ों के दर्द और एंठन और टेढ़ीमेढ़ी हड्डियां जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। तो ये हैं वो खाद्य पदार्थ जो कैल्शियम की कमी को दूर करेंगे।

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दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थ
कैल्शियम का सबसे अच्छा स्रोत दूध को माना जाता है। शरीर में कैल्शियम की कम मात्रा से होने वाले हड्डियों के रोग ओस्टियोपोरोसिस के खतरे से बचना है तो आपको अपने आहार में दूध को भी शामिल करना होगा क्योंकि एक गिलास दूध में करीब 300 ग्राम कैल्शियम होता है इसलिए नियमित रूप से दूध का सेवन करना चाहिए। क्योंकि कैल्शियम के कमी होने पर कई समस्यायों का सामना करना पड़ता है जैसे: कम उम्र में दांत गिरना, कमजोर होना, हाथ-पैर में दर्द रहना आदि।
दूध ही नहीं बल्कि दूध से बने प्रोडक्ट जैसे कि दही इसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम होने के साथ ही इसमें मौजूद जीवाणु हमारे शरीर को इन्फेक्शन से भी बचाते हैं। इसके अलावा पनीर में भी प्रचुर मात्रा में कैल्शियम होता है। वहीँ चीज भी कैल्‍शियम का अच्छा श्रोत है लेकिन इसका सेवन सिमित मात्रा में करना चाहिए नहीं हो मोटापा बढ़ने का भी खतरा रहता है।

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टमाटर
आपको रोजाना अपने आहार में टमाटर को शामिल करना चाहिए क्योंकि टमाटर में विटामिन सी के साथ ही कैल्शियम की अच्छी मात्रा होती है तो वहीँ इसमें फास्फोरस भी पाया जाता है। टमाटर हड्डियों को तो मजबूत बनाने के साथ ही शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरी करता है। डॉक्टर का कहना है कि रोज एक टमाटर खाने से कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।

सोयाबीन
सोयाबीन प्रोटीन का एक मुख्य स्रोत है लेकिन सोयाबीन में भरपूर मात्रा में कैल्शियम भी पाया जाता है। तथा सोयाबीन में दूध के बराबर ही कैल्शियम होता है। इसका मतलब यह हुआ कि जिन लोगों को दूध पसंद नहीं है वो कैल्शियम की पूर्ति के लिए सोयाबीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। आपको मार्केट में सोया मिल्क, टोफू और सोया चंक्स के रूप में कई सारे विकल्प मिल जायेंगे। सोयाबीन में प्रोटीन, कैल्शियम के साथ ही फाइबर और विटामिन ई की की अच्ची मात्रा उपलब्ध होती है।

संतरा और आंवला
संतरा और आंवला भी कैल्शियम रिच फूड हैं । इनमें मौजूद तत्व ना सिर्फ हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ -साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में भी मदद करती है।

हरी पत्तेदार सब्जियां
हरी पत्तियों वाली साग- सब्जियों के खाने से भी कैल्शियम की कमी पूरी हो जाती है। स्वस्थ रहने के लिए नियमित अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें । हरी सब्जियों में आपको बिन्स, गोभी, ब्रोकली और साग में – सरसों, बथुआ और पालक को खाना चाहिए इनका सेवन करेंगे तो शरीर में कैल्शियम की कमी नहीं रहेगी।

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सूखे मेवे
सूखे मेवे में जैसे : अखरोट, काजू , बादाम, पिस्ता, और चिलगोजा आदि खाना किसे पसंद नहीं होगा ये मेवे स्वाद के साथ ही सेहत से भी भरे होते हैं। इनमे प्रचुर मात्रा में कैल्शियम उपलब्ध होता है। इनका नियमित सेवन करने से हड्डियां मजबूत हो जाती हैं। ल‍ेकिन इसमें वसा की अधिक मात्रा होने के कारण इनका सेवन कम से कम करें।

उम्मीद हैं आप अपने आहार में इन खाद्य पदार्थों को शामिल कर कैल्शियम की कमी को दूर कर पाएंगे।

डायबिटीज के मरीजों लिए किस तरह फायदेमंद है दही

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मधुमेह यानि कि डायबिटीज कहा जाता है कि एक बार जिसे हो जाये फिर इस पर नियंत्रण पाना मुश्किल होता है। लेकिन सही खानपान और सही परहेज से मनुष्य किसी भी चीज पर नियंत्रण पा सकता है। हालाँकि यह सच्चाई है कि डायबिटीज के मरीजों को अपने खानपान और संतुलित आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कुछ ऐसी चीजें हैं जो बिलकुल भी नहीं खानी चाहिए और कई ऐसी भी चीजें से होती हैं जिन्हें खानें से डायबिटीज सामान्य हो जाता हैं। ऐसे ही एक चीज है दही वो भी बिना मलाई वाले दूध से बनी दही। ये तो सब जानते हैं, दही मैं खूबसूरती और स्वास्थ्य का खजाना छिपा है, वहीँ दही के सेवन से डायबिटीज का खतरा भी कम हो जाता है। डाइबिटीज में भी टाइप 2 डाइबिटीज में दही विशेष लाभ पहुंचाता है। दही में ऐसे तत्व होते हैं जो डाइबिटीज के सम्भावना को काम करने के साथ ही इसको बढ़ने से ही रोकता है। एक शोध के अनुसार अगर हम नियमित रूप से दही का सेवन करते हैं तो यह डायबिटीज टाइप 2 के असर को 28 प्रतिशत तक कम कर देता है। तो चलिए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में

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दही डायबिटीज के मरीजों के लिए कई तरिके से फायदेमंद हो सकती है। इसे नियमित रूप से लेने से कॉलस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसेराइड लेवल पर कंट्रोल बना रहता है । जो लोग हर हप्ते 700 ग्राम दही खातें है उन्हें भी मधुमेह होने का खतरा कम हो जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार केवल लो फैट वाले दूध और दूध से बने पदार्थों से डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है। ज्यादा फैट वाले पदार्थों और दूध से डायबिटीज का खतरा कम नहीं होता।

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इसके साथ प्रोबायोटिक दही यानि वो दही जिसमें बैक्टीरिया की संख्या ज्यादा हो तो ये लिपिड लेवल को कम करने में मदद करती है। लिपिड लेवल के बढ़ जाने से डायबिटीज के मरीजों के लिए दिल की बीमारी के होने का खतरा भी बढ़ जाता है। अगर आप लगातार प्रोबायोटिक दही कहते हैं तो आपके शरीर में एलडीएल कॉलेस्ट्रॉल लेवल कम हो जाता है जो कि दिल के अच्छी बहुत जरुरी है। एलडीएल कॉलेस्ट्रॉल बढ़ने से दिल की बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

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शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि अगर हर रोज एक व्यक्ति ताज़ा पनीर के दो टुकड़े खाता है तो उसे टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 12 प्रतिशत तक कम हो जाता है।
इसके साथ ही दही में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम और प्रोटीन भी मिलता है जिससे आपके रोजाना की जरुरत के ८ से २५ प्रतिशत तक के कैल्शियम की पूर्ति हो जाती है।
वहीं दही में प्रोबायोटिक्स भी मिलता है जो शरीर में इन्सुलिन के निष्कासन को रोकता है।
उम्मीद है अगली बार से आप अपने खाने में लो फैट वाली दही को जगह देंगे।

ठंडा पानी पीने के कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी

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शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसे गर्मियों में ठंडा पानी पीना पसंद नहीं हो। जब आदमी का शरीर तप रहा हो ऐसे में ठंडा पानी बहुत सुकून पहुंचाता है। हालाँकि डॉक्टर के अनुसार पानी को हमेशा सामान्य तापमान पर पीना चाहिए। वहीँ कुछ लोग यह मानते हैं कि गर्म पानी स्वास्थ्य के लिए सही है। लेकिन देख जाए तो हर चीज का फायदा एवं नुकसान होता है। इसी तरह ठंडें पानी के भी फायदे एवं नुकसान दोनों ही प्रभाव मिलते है। तो आइए जानते हैं इसके फायदे

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शरीर के तापमान को सही बनाना – ठंडा पानी पीने के गर्मियों में आप खुद को हाइड्रेट रख सकते हैं। जब आप एक्सरसाइज करते है या उसके बाद भी शरीर का तापमान बहुत अधिक रहता है, इस दौरान तापमान को नार्मल बनाएं रखने में सहायता करता है। इसके साथ ही शरीर की गर्मी को भी अवशोषित करके शरीर को सामान्य अवस्था में लाता है। ठंडा पानी शरीर में पानी की कमी को जल्द ही दूर करने में सहायक होता है क्योंकि ये गर्म पानी की अपेक्षा ठन्डे पानी में तेजी से रक्त में पहुँचने की क्षमता होती है।

त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद – ठन्डे पानी से रक्त संचार बढ़ता है। जिससे त्वचा चमकदार बनने में सहायता मिलती है। ठंडे पानी के पीने से त्वचा तो स्वस्थ होती ही है साथ ही बालों में भी प्राकृतिक चमक देखने को मिलती है। ठन्डे पानी से रोम छिद्र बंद हो जाते है और इसका उपयोग करने से बाल नरम हो जाते है

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हार्मोन्स नियंत्रित करना – एक अध्ययन के माध्यम से यह पता चला है कि ठन्डे पानी के प्रयोग से एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन्स पर पॉजिटिव असर पड़ता है, इतना ही नहीं इन हार्मोन्स के एक्टिव होने से व्यक्ति की सेक्सुअल लाइफ भी बेहतर होती है। ऐसे में अगली बार आप सामान्य पानी पीते है तो ध्यान दें कि उसमें ठंडा पानी या बर्फ जरूर मिला लें।

तनाव कम करने में मददगार – जब कभी आपको लगे कि आपका मूड खराब हो गया है या आपको तनाव या घबराहट महसूस हो रही हो तो आपको ठंडा पानी पीना चाहिए। अध्ययन से पता चला है ठंडा पानी पीने से मस्तिष्क के ऑर्बिटोफ्रोंटल कॉर्टेक्स जिनका सम्बन्ध हमारे मूड से होता है वो एक्टिव हो जाता है। ऐसे में जब हम ठंडा पानी या बर्फ वाला पानी और ठंडा पेय पदार्थ पीते हैं तो हमारा मस्तिष्क उत्तेजित होता है। और हमारा मन भी खुश हो जाता है।

ठंडा पानी पीने से होने वाले नुकसान

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पाचन में समस्या -सामान्य तापमान के पानी पीने से पाचन क्रिया ठीक बनी रहती है जो कि ठंडें पानी के पीने से कब्ज की एक प्रॉब्लम हो सकती है। ठंडें पानी के पीने से पेट के अंदर खाना सख्त एवं कठोर हो जाता है,जिसके कारण आतें संकुचित होने लगती हैं, जिससे आगे चल कर मल निकलने में मुश्किल हो जाती है और कब्ज होने की समस्या हो जाती है।

सर्दी -जुकाम- ठंडे पानी पीने से गला दर्द,सर्दी जुकाम तथा श्वसन तंत्र में बलगम जमने लगता है। कई लोगों को साँस लेने में भी तकलीफ होने लगती है।

हृदय दर में कमी और सिर दर्द- कई अध्ययनों से इस बात का पता चलता है, ठंडा पानी के पीने से न सिर्फ हृदय दर में कमी आती है, बल्कि यह वैगस नर्व को भी उत्तेजित करता है। वहीं ठंडा पानी रीढ़ की हड्डी की कई संवेदनशील नसों को ठंडक मिलती है, जिसके परिणाम स्वरूप यह नसें तुरंत मस्तिष्क में संदेश भेजती है जिस कारण तुरंत सिर दर्द होने लगता है।

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मोटापे में वृद्धि – ठंडा पानी पीने से वसा सख्त हो जाती है। शरीर अनावश्यक वसा (फैट) को अवशोषित नहीं कर पाता है। व्यक्ति का इस वजह से वजन बढ़ जाता है हालाँकि खाना खाने के करीब आधे घंटे बाद ही आपको सामान्य तापमान वाला पानी पीना चाहिए।

हाई ब्लड प्रेशर के सामान्य लक्षण जिन्हें आप अनदेखा न करें

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आज की भागदौड़ भरी जिन्दगी में अपने खान-पान का सही से ध्यान देना बहुत ही आवश्यक हैं। खासकर हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) वाले रोगियों को अपने खान -पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। दरअसल हाई ब्लड प्रेशर सुनने में जितना ही छोटा लगता है उससे कही ज्यादा शरीर को नुकसान पहुंचने वाला तथा खतरनाक है। हालाँकि नॉर्मल व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर की बात करें तो 120 से ऊपर नहीं होना चाहिए तथा 80 से नीचे नहीं होना चाहिए। तथा हाई ब्लड प्रेशर के बढ़ जाने पर धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है इससे शरीर को कभी भी नुकसान पहुंचा सकती है। आमतौर पर लोग हाई ब्लड प्रेशर (उच्‍च रक्‍तचाप) को छोटी बीमारी समझकर नजरअंदाज और अनदेखा कर देते है। और कुछ ही लोग दवाओं को खानें से हाई ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखते हैं। तो चलिए हम आपको बताते हैं हाई ब्लड प्रेशर के कुछ सामान्य लक्षण जिन्हें आप अनदेखा न करें।

हाई ब्लड प्रेशर के शुरुआत में व्यक्ति के सिर के पीछे गर्दन में दर्द होने लगता है । कई बार इस तरह की परेशानी को ध्यान नहीं देते हैं तथा नजरअंदाज या अनदेखा करने लगते है, जो आगे चलकर बीमारी का रूप लें लेता है।

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खुद को तनाव में महसूस करना, छोटी -छोटी बातों पर गुस्सा आना और कई बार ऐसे लोग सही गलत की पहचान नहीं कर पाते हैं। इस प्रकार की समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए ।

हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) के लक्षणों में जैसे ज्यादा प्रेसर बढ़ जाने पर सिर में दर्द, चक्कर,धुंधला दिखना, उल्टी आना या सीने में दर्द होने की शिकायत हो सकती है। इस स्थिति में ऐसे डॉक्टर से संपर्क करें।

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जब शरीर में खून दबाव बढ़ जाता है तो कई बार नाक से खून आने लगता है। इसके अलावा व्यक्ति सामन्य से ज्यादा जल्दी -जल्दी सांस लेने लगता है। इसके साथ ही मरीज को सांस लेने में तक़लीफ़ जैसे लक्षण हाई ब्लड प्रेशर की निशानी हो सकती है,इन को अनदेखा ना करें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ।

उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति को नींद आने में अक्सर परेशानी होती है। हालाँकि यह समस्या किसी चिंता से ग्रस्त तथा अनिंद्रा के कारण भी हो सकती है। लेकिन फिर भी ऐसी समस्या लगातार रहे तो इसे हल्के में ना लें।

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हाई ब्लड प्रेशर में व्यक्ति की सांस पहले से मुकाबलें तेज हो जाती है या हार्ट में हल्का -हल्का दर्द होने लगता है। अगर ऐसे सभी लक्षण आप को दिखें तो इन्हे अनदेखा न करें जाकर डॉक्टर से परामर्श लें।
हाई ब्लड प्रेशर का उपचार – सबसे पहले यह जानना जरुरी है कि आपका ब्लडप्रेशर क्यों बढ़ रहा है अगर एक बार इसके कारणों का पता चल जायेगा तो उस पर रोकथाम करना आसान हो जायेगा। अगर ब्लड प्रेशर बढ़ने का कारण आपका मोटापा है तो सबसे पहले मोटापा कम करने की कोशिश करें जो कि नियमित एक्सरसाइज और संतुलित भोजन से संभव हो पायेगा।करें। वजन में थोड़ी सी कमी होने से आपको काफी असर पड़ सकता है। तथा नियमित जांच कराते रहें। शुरुआती में ही इस बीमारी का इलाज करवाए। हाई ब्लडप्रेशर में एक बात और ध्यान देने वाली है और वो हैअपने खाने में नमक या सोडियम की मात्रा को कम करें। फास्ट फ़ूड या जंक फ़ूड भी कम खाएं । अपने दिनभर के भोजन को कई हिस्सों में बांटें और एक ही बार में ज्यादा खाना नहीं खाएं। इसके साथ ही ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करें और नियमित स्वस्थ का चैक-अप करवाते रहें।

डायबिटीज़: शरीर के किन अंगों के लिए ज्यादा खतरनाक

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मधुमेह के मरीजों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है। बदलते लाइफस्टाइल तथा उचित खान -पान के नहीं होने के कारण दुनियाभर में रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही हैं। जब खून में शुगर की मात्रा बढ़ने पर डायबिटीज (मधुमेह) होता है। डाइबिटीज के रोगियों में डायबिटीज का असर शरीर के विभिन्न हिस्सों पर भी पड़ता है। डायबिटीज दो प्रकार के होते है ।
टाइप -1 डायबिटीज और टाइप -2 डायबिटीज। दरअसल टाइप -2 डायबिटीज को ज्यादा खतरनाक माना जाता है। जिससे शरीर के कुछ अंगो की कार्यक्षमता प्रभावित हो जाती है। डायबिटीज पर ध्यान नहीं देने पर कई मरीजों की जान भी जा सकती है। आज हम इसी के बारे में बात करेंगे।

गुर्दे पर असर -डायबिटीज रोगियों में कई बार गुर्दे में परेशानियां हो जाती है। जिसके कारण गुर्दें काम करना बंद कर देता है। गुर्दे पर असर पड़ने से खून की कमी तथा हाई ब्लड प्रेशर आदि समस्याएं पैदा हो जाती है। ऐसे में मरीज को यूरीन टेस्ट करवाने के लिए कहा जाता है। टेस्ट के जरिए यूरीन में प्रोटीन व खून के रिसाव के बारे में पता किया जाता है। इसके अलावा अगर यूरीन में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है तो इससे किडनी फेल होने का खतरा रहता है।

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हृदय की बीमारियां- डायबिटीज के होने पर आपको अपनी खानपान को लेकर कई तरह की सावधानियां बरतनी होती हैं क्योकि इसमें ह्रदय रोग की संभावना बढ़ जाती है डायबिटीज के मरीज को रक्‍तचाप, मोटापा और उच्‍च कोलेस्‍ट्रोल होने का खतरा सामान्‍य लोगों से अधिक होता है। सीने में हो रहे हलके दर्द को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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पैरों पर असर – डायबिटीज वाले व्यक्ति के ज्यादा पैरों की समस्या हो जाती है। पैरों के नसें क्षतिग्रस्त हो जाने पर अगर रोगी के पैर में चोट लगें तो इससे बुरा असर पड़ता है। यही नहीं इसमें खून का दौरा धीरे धीरे होने लगता है,जिससे पैर में लगी हुई चोट बहुत लंबे समय के बाद ठीक होने के साथ मरीज के पैरों में संक्रमण भी हो सकता है। कभी कभी तो यह बहुत बुरी तरह से फैल जाता है कि रोगी के पैर पूरी तरह से खराब हो जाते हैं। पैरों में दर्द, सूजन तथा जकड़न की शिकायत होने पर इसे हल्के में नहीं लें तुरंत डॉक्टर से संपंर्क करें।

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आंखो पर असर – डायबिटीज के मरीजों को अपने आंखो की नियमित रूप से जांच करनी चाहिए क्योंकि डायबिटीज में सफेद मोतियाबिन्द जैसी समस्या होने के चांस बढ़ जाता है। इसके साथ ही आंखो में तनाव तथा आंखों के पर्दे के कमजोरहोने के साथ ही धुंधला दिखना शुरु हो जाता है। कई बार तो डायबिटीज से अंधे होने की भी समस्या हो जाती है। आंखों की जांच के समय अपने डॉक्टर यह जरूर बताएं कि आप मधुमेह के शिकार हैं।
अगर खानपान में उचित परहेज किया जाये और नियमित डॉक्टर से परामर्श ले कर दवाईयों का सेवन किया जाये तो बहुत संभव है कि मधुमेह पर नियंत्रण किया जा सके।

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