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गर्मियों में खान-पान का रखें विशेष ख्याल

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गर्मी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। और इस मौसम में आपके शरीर को पानी की बहुत जरूरत होती है शरीर में पानी की मात्रा कम होने पर कई तरह के रोग हो सकते है। ऐसे में आपको सेहत का विशेष ध्यान देना चाहिए। इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा पेय पदार्थो का सेवन करना चाहिए इसके अलावा मौसमी फलों को भी अपने डाइट चार्ट को शामिल करें । गर्मियों में अगर मौसमी फलों का सेवन करेंगे तो आप अपने को ठंडा-ठंडा, कूल – कूल महसूस करेंगे। गर्मियों में मिलने वाले फल जैसे -आम,खरबूज,तरबूज,बेल और मौसमी आदि फल के सेवन करने पर न केवल शरीर स्वस्थ होगा बल्कि गर्मी भी कम लगेगी । आज कुछ ऐसे ही खाद्य पदार्थों की बात करेंगे जो गर्मी में आपके बॉडी टेम्प्रेचर को कम कर पानी की मात्रा को बनाये रखेंगे

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तरबूज – जैसे ही गर्मी का मौसम आता है वैसे ही प्यास ज्यादा लगनी शुरू हो जाती हैं । ऐसे में सबसे अच्छा,मीठा और रसीला फल है तरबूज । क्योकि इसमें पानी की प्रचुर मात्रा तो होता ही है साथ ही इसमें मिनरल और विटामिन भी अच्छी मात्रा में पाए जाती हैं। यह डिहाइड्रेशन से भी बचता है। तरबूज का सेवन बहुत ही फायदेमंद है लेकिन ध्यान दें कि तरबूज खाने के तुरंत बाद पानी न पीयें तरबूज को खाना दोपहर के वक्त अच्छा होता हैं।

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हेल्थ ड्रिंक– गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए छाछ, फ्रूट जूस, मिल्क शेक, ग्रीन सलाद आदि को शामिल करना चाहिए। इस मौसम में खीरा, ककड़ी का सेवन सलाद के रूप में उपयोग कर सकते हैं। नाश्ते में भी जूस पीना चाहिए ताकि शरीर को एनर्जी मिलें। और लंच में हल्का खाना ही खाएं।

नारियल पानी – गर्मियों में नारियल पानी बहुत ही फायदेमंद है। नारियल पानी 99% फैट फ्री होने के अलावा इसमें शुगर की मात्रा बहुत कम होती है। इसमें अधिक मात्रा में कैल्सियम, क्लोराइड और पोटैशि‍यम पाया जाता है।कई लोगों को गर्मियां आते ही हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाती है। ऐसे में नारियल का पानी शरीर के लिए फायदेमंद है।

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नींबू पानी – गर्मियों में नींबू का पानी प्रत्येक दिन पीना चाहिए । इस पानी से अनेक फायदा होती है,जैसे -यह लू से बचता है, शरीर को प्रतिरोधक क्षमता के साथ ही दिल की धड़कन सामान्य रहती है ।नींबू में विटामिन सी तथा पोटेशियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। नींबू पानी के सेवन करने से शरीर की इम्युनिटी पावर बढ़ जाती है तथा बीमारी से भी बच जाते हैं।

लीची – लीची खाने से गर्मियों में शरीर को विटामिन ए, सी एवं पानी भरपूर मात्रा में मिलता है। लीची में एंटीऑक्सीडेंट्स होता है जो आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। इसके अलावा त्वचा के लिए भी लाभदायक होती है। लीची स्वाद में मीठा और रसीला होने के साथ ही ये सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। लीची में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन सी, विटामिन ए और बी कॉम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है

खरबूजा – गर्मी के मौसम में खरबूज को सबसे उत्तम फल माना जाता हैं । फल खरबूज न केवल स्वाद एवं ठंडक के लिहाज से बेहतरीन फल है बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। खरबूज में प्रचुर मात्रा पानी के अलावा, विटामिन्स और मिनिरल्स भी प्रचुर मात्रा में होते हैं जो सेहत से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में मददगार है।

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खीरे का सेवन – गर्मियों में खीरे को बहुत ही सर्वोत्तम माना जाता है। इसमें पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है, ये ऑयली त्वचा को ठीक करता है।साथ ही साथ पेट में गैस, एसीडिटी, सीने में जलन में अत्यधिक लाभकारी हैं।

गर्मी को मात दे, शरीर को ठंडक पहुंचाएंगे ये घरेलू उपाय

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गर्मी के मौसम में गर्म हवा और बढ़े हुए तापमान से लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।ऐसे में घर से बाहर निकलना बहुत ही मुश्किल हो जाता है क्योंकि हर साल मई जून की गर्मी में सबसे ज्यादा चिलचिलाती गर्मी में कारण लोग बीमार हो जाते हैं। गर्मीयो में हवा का तापमान सामान्य से अधिक होने के कारण वातावरण में जो गर्म हवाएं चलती हैं, उन्हीं ही लू यानि कि हीट स्ट्रोक कहते हैं। लू लगने में तेज बुखार,सिर में दर्द, उल्टियां,भूख न लगना और थकान होने लगती हैं।और शरीर में पानी की मात्रा भी कम हो जाती है। घर में ही मौजूद कई सारी चीजों के सेवन से हिट स्ट्रोक से बचा जा सकता है।

जानिए लू से बचने के घरेलू उपाय

गर्मी और लू का गहरा संबन्ध है गर्मी जैसे -जैसे बढ़ती जाती है लोगो को लू का डर सताने लगती है इसलिए अपने शरीर में पानी की कमी मत होने देना ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए ,क्योंकि लू यानि कि हीट स्ट्रोक सबसे बड़ी वजह होती है शरीर में पानी की कमी होना। गर्मियों में जब भी घर से बाहर निकलने से पहले अपना सिर,कान और नाक को अच्छी तरह से कवर करना जरूरी है इससे शरीर में गर्म हवाएं प्रवेश नहीं करेगी। ऐसे में खुद को सुरक्षित रखने के लिए धूप में बाहर जाते वक्त खाली पेट नहीं जाना चाहिए। घर
से पानी या कोई ठंडा शर्बत पीकर बाहर निकलें।जैसे : चीनी, नमक, नींबू या बेकिगं सोड़ा पानी के साथ मिलाकर शर्बत ज्यादा फायदेमंद है।

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प्याज का रस -प्याज का रस लू के लिए सबसे फायदेमंद है।चटनी या सलाद में कच्चा प्याज भी आपके शरीर को ठंडा कर सकता है। ऐसे में अपनी सेहत का ख्याल रखने के लिए प्याज का रस पीना चाहिए। इसके अलावा तलवों पर भी इसका रस लगाने से काफी फायदा होता है। इससे शरीर को ठंडक मिलती है और लू का असर भी कम हो जाता है।

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नींबू का पानी – नींबू पानी विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत है। इसकी मदद से हमारे शरीर में विटामिन सी पहुंचता है, जो हमारे इम्यून सिस्टम को ठीक रख कर हमें सेहतमंद बनाए रखता है। नींबू पानी पीने से लू का असर कम और शरीर में पानी की कमी नहीं होता है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर को भी काबू में रखता है।

इमली का पानी – इमली को आप गर्म पानी में भिगोए और इस पानी में शक्कर मिलाकर पीने से लू से बचा जा सकता है। इससे शरीर का तापमान नार्मल रहेगा इमली मे विटामिन, खनिज और इलेक्ट्रोलाइट्स भरपूर मात्रा में पाया जाता।

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नारियल पानी और छाछ -नारियल पानी पीते रहने से शरीर में पानी की कमी नहीं होने पाती है। लू लगने से सुरक्षित रखता है इसके अलावा नारियल पानी में विटामिन सी, पोटैशियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते है और ब्लड-प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। इसी तरह छाछ भी शरीर को आवश्यक विटामिन और खनिजों प्रदान करने में सहायता करता है।

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एलोवेरा जूस के फायदे – एलोवेरा जूस में एंटी-ऑक्‍सीडेंट भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो शरीर की अधिकांश बीमारियों को ठीक कर देते है। इसे पीने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। लू से बचने के लिए एक अच्छा घरेलू उपचार है।

सौंफ के बीज और तुलसी फायदे – गुलाब जल में तुलसी के कुछ बीज को मिलाकर पीने से कहा जाता है कि शरीर को तुरंत ठंडक पहुँचती है। इसके अलावा सौंफ को पानी में रातभर भिगो कर छोड़ दें और सुबह यह पानी छान कर पीना चाहिए। यह आपके शरीर को ठंडा रखेगा।

कोरोनावायरस: रोग के बारे में अपने बच्चों से कैसे बात करें

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जैसे ही कोरोनवायरस का प्रकोप बढ़ता है, माता-पिता अपने बच्चों से सवाल पूछ रहे हैं, जिन्होंने इंटरनेट, टीवी, शिक्षकों और सहपाठियों से बिट्स और जानकारी के टुकड़े (और गलत जानकारी) प्राप्त किए हैं। यह विषय बच्चों से निपटने के लिए एक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि बीमारी को लेकर बहुत अधिक भय और अनिश्चितता है। लेकिन इस तरह की किसी भी स्थिति के साथ, बच्चों के भ्रम के बीच खुद को एक सहायक और विश्वसनीय व्यक्ति के रूप में पेश करना महत्वपूर्ण है। इस बातचीत को निर्देशित करने में मदद के लिए, हफपोस्ट ने विशेषज्ञों से COVID-19 के बारे में बच्चों से बात करने के बारे में उनकी सलाह मांगी।

अपने आप को शांत करें

कोरोनोवायरस के प्रकोप के बारे में अपने बच्चे से बात करने से पहले, चिंता या भय की अपनी भावनाओं का जायजा लें। यदि आपके पास घबराहट की भावना है, तो अपने आप को शांत करने के लिए जो भी कदम आवश्यक हैं उसका पालन करें।

Father talking to Daughter While Working

चाइल्ड माइंड इंस्टीट्यूट में क्लिनिकल डायरेक्टर और सीनियर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, मार्क राइनके ने कहा, “अस्पष्ट स्थितियों में, छोटे बच्चे अक्सर अपने माता-पिता की ओर इशारा करते हैं कि वे कैसे प्रतिक्रिया दें और कैसा महसूस करें।” “यदि आप शांत और आश्वस्त हैं, तो वे इस पर विचार करेंगे। यदि आप चिंतित या भयभीत हैं, तो वे उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देंगे। “

बच्चों के पास एक ही शक्ति और जानकारी नहीं होती है जो उनके माता-पिता करते हैं, इसलिए यदि आप खुले तौर पर तनाव कर रहे हैं, तो आपके बच्चे केवल यह जान पाएंगे कि जो कुछ भी हो रहा है वह इतना डरावना है कि उनके माता-पिता भी चिंतित हैं। और वे अपनी कल्पनाओं को उन्हें और अधिक भयावह जगह पर ले जाने दे सकते हैं।

मॉडलिंग की समरूपता के अलावा, अपनी खुद की चिंता को प्रबंधित करने से आपके बच्चों को सुनने और समर्थन करने के लिए आवश्यक मानसिक स्थान भी खाली हो जाएगा। “यदि आप शांत रहते हैं, तो आपके बच्चे को समझ में आने की अधिक संभावना होगी कि क्या महत्वपूर्ण है: कि घटनाएँ हमारे जीवन को परेशान कर सकती हैं, लेकिन हम बुरे अनुभवों से सीख सकते हैं और साथ मिलकर काम कर सकते हैं।”

वार्तालाप आरंभ करें

इस कठिन विषय को लाने से डरो मत। आप अपने बच्चे की जानकारी के भरोसेमंद स्रोत बनना चाहते हैं। राहेल थॉमसन, लाइसेंस प्राप्त विवाह और परिवार के चिकित्सक और Playa के मालिक ने कहा, “यदि आपके पास एक स्कूली उम्र का बच्चा है, तो आपके बच्चे ने कोरोनोवायरस के बारे में सुना होगा, या इसी तरह समाचार में कुछ और भी हो सकता है, चाहे माता-पिता उन्हें चाहते हों या नहीं।” विस्टा काउंसलिंग। “मैं हमेशा खेल से आगे निकलने और उन चीजों के बारे में बातचीत करने की सलाह देता हूं जो अपने साथियों से एक डरावना संस्करण सुनने से पहले डरावनी हो सकती हैं।”

चूँकि आपके बच्चे संभवत: साथियों और समाचारों से महामारी के बारे में सुन रहे हैं, इसलिए इस चर्चा से बड़ा उत्पादन करना आवश्यक नहीं है। इसे एक नियमित वार्तालाप और दिन-प्रतिदिन की दिनचर्या का हिस्सा बनाएं क्योंकि आप सोफे पर या खाने की मेज पर बैठे हैं।

वे क्या जानते हैं पूछें

“मैं उनसे पूछना शुरू कर दूंगी कि क्या उन्होंने कोरोनोवायरस के बारे में सुना है और यदि ऐसा है, तो उन्होंने क्या सुना है,” एक बाल चिकित्सक और AnxiousToddlers.com के निर्माता नताशा डेनियल को सलाह दी। “अपने बच्चे की धारणाओं या गलत धारणाओं के साथ शुरू करने से आपको यह मार्गदर्शन करने में मदद मिलेगी कि बातचीत कहाँ से करें और क्या सुधारात्मक रूप से आपको पहले से ही करने की आवश्यकता है।”

ओपन एंडेड प्रश्न पूछने से आप अपने बच्चों के ज्ञान, साथ ही साथ उनकी भावनात्मक स्थिति का पता लगा सकते हैं। उन्हें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करें और इस बात पर चर्चा करना सुनिश्चित करें कि आप उनके बारे में क्या जानते हैं।

“यदि आप जानते हैं कि आपका बच्चा चिंता करने के लिए प्रवण है, तो यह कहकर बातचीत के लिए खुला रहना सामान्य हो सकता है, ‘फ्लू के मौसम के बारे में बहुत सी खबरें आई हैं, और मुझे आश्चर्य है कि आपने क्या सुना है,” सुझाव दिया रॉबिन गुडमैन, एक नैदानिक ​​मनोवैज्ञानिक और कला चिकित्सक जो तनाव से संबंधित मुद्दों पर बच्चों के साथ काम करते हैं। “उन्हें सुनना जारी रखें और प्रस्ताव दें कि आप प्रश्नों के लिए उपलब्ध हैं और उत्तर पाने के लिए।”

इसे आयु-उचित रखें

थॉमस ने बताया, “माता-पिता को अपने बच्चों के साथ अलग-अलग उम्र और विकासात्मक स्तर के आधार पर कोरोनोवायरस के बारे में बात करना चाहिए।” “अंगूठे का एक अच्छा नियम केवल उन शब्दों का उपयोग करना है जो आपका बच्चा पहले से समझता है। इस और / या अन्य बीमारियों के बारे में वे जो जानते हैं उससे शुरू करें और उस पर निर्माण करें। इस बातचीत का मकसद उन्हें सुरक्षित रखने में मदद करने, उनकी चिंताओं को दूर करने और उनके पास मौजूद किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए उम्र-उपयुक्त जानकारी देना होना चाहिए। ”

6 के तहत

6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को वायरस के नाम या किसी बीमारी के वैश्विक खतरे की तरह अधिक विस्तार की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे इसे संसाधित करने के लिए बहुत छोटे हैं। अपने साथी या बड़े बच्चों के साथ अपने छोटों के सामने की जाने वाली बातचीत के बारे में सावधान रहें और टीवी या सोशल मीडिया पर किसी भी परेशान करने वाले चित्र को बंद कर दें।

इसके बजाय, कीटाणुओं के बारे में बातचीत करें कि लोग कैसे बीमार होते हैं और हम हाथ धोने के लिए स्वस्थ रह सकते हैं। यदि वे इस विशिष्ट प्रकोप या उनके द्वारा देखी जाने वाली किसी चीज़ के बारे में आपके पास आते हैं, तो आश्वस्त करें कि आपका परिवार सुरक्षित और स्वस्थ है।

विद्यालय युग

स्कूल-आयु के बच्चों के लिए, आप प्रकोप के बारे में जानकारी दे सकते हैं: यह क्या है, यह कैसे फैलता है और इसे रोकने के तरीके। लेकिन मरने वाले लोगों की बात से दूर रहें, खासकर यदि आपका बच्चा छोटे छोर पर है। इस बात पर जोर दें कि उनके जीवन में बड़े हुए लोग उन्हें सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। और यदि लागू हो तो अपने स्थानीय क्षेत्र में कम मामलों को उजागर करें।

“5 से परे, अपने संदेश को सरल रखें और आत्मविश्वास के साथ, 5 अभी एक बीमारी चल रही है, इसलिए हमें सफाई के बारे में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी और बीमार लगने वाले लोगों के आसपास रहना होगा,” अनुशंसित नैदानिक ​​मनोवैज्ञानिक जॉन मेयर। “बच्चे बीमारी जानते हैं और स्वाभाविक रूप से बीमार नहीं होना चाहते हैं, इसलिए वे रोकथाम की अवधारणा को समझेंगे।”

हमेशा की तरह, आप उचित मात्रा में जानकारी साझा करने के लिए निर्धारित करते समय अपने बच्चे के विकासात्मक नेतृत्व का पालन करना चाहते हैं। उन्हें सुरक्षित महसूस कराने पर ध्यान केंद्रित करें, और अपने टीवी समाचार और सोशल मीडिया एक्सपोज़र को सीमित करें, जो अधिक चिंता पैदा कर सकता है।

“आपका बच्चा पहले से ही रोज़मर्रा की आम जगहों पर चेहरे पर मास्क पहने व्यक्तियों को देख रहा होगा। माता-पिता के कोच और जीआईटी मॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आइरिन हीडलबर्गर ने सिफारिश की, इससे कोई बड़ी बात नहीं है। “यदि आपका बच्चा पूछता है कि वे क्यों हैं, तो एक तेजी से जवाब दें, why क्योंकि वे इसे स्वस्थ रहने का अपना सबसे अच्छा तरीका मानते हैं, और हर परिवार की अलग रणनीति होती है। इसीलिए हम अपना हाथ धोने का काम कर रहे हैं। ”

आप उन्हें बता सकते हैं कि रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र, इस स्थिति से निपटने वाले विशेषज्ञों के समूह, स्वस्थ लोगों को मास्क पहनने की आवश्यकता नहीं है। यह नोट करना भी उपयोगी है कि दुनिया भर में बहुत सारे डॉक्टर और वैज्ञानिक हैं जो लोगों की सुरक्षा के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और विशेष रूप से यू.एस. में महान अस्पताल और चिकित्सा हैं।

बच्चों को बीमारी के साथ अपने पिछले अनुभवों के आधार पर संदर्भ का एक फ्रेम दें, यह समझने के लिए कि अधिकांश लोगों के लिए COVID-19 कैसे प्रकट होता है – एक ठंड, सूँघने, दर्द, थकान, आदि। आप उन्हें याद दिला सकते हैं कि वे कितने समय से बीमार थे और फिर बेहतर हो गए।

प्रीटेन्स एंड टीन्स

“10 वर्ष और उससे अधिक की उम्र से, तथ्यात्मक हो और उनसे चीजों को छिपाओ मत। तथ्यों के साथ चिपके रहें क्योंकि हम उन्हें अभी जानते हैं और किसी भी अफवाहों या खतरनाक विवरणों को दूर कर सकते हैं जो उन्होंने सुना हो सकता है, ”मेयर ने कहा। “ध्यान रखें कि वे सोशल मीडिया पर चीजों को उठाएंगे, इसलिए यह मत सोचिए कि वे इस बीमारी के बारे में नहीं सुन रहे हैं।”

किशोरावस्था के साथ, आप इस मुद्दे पर विज्ञान और राजनीति में भी गोता लगा सकते हैं। सीडीसी जैसे विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने के लिए आपके द्वारा जाने जाने वाले डेटा और तथ्यों की पेशकश करें और उन्हें सशक्त बनाएं। एक साथ सवालों के जवाब तलाशते हैं।

इस वायरस के आसपास बहुत अनिश्चितता है, जो चिंता पैदा कर सकता है। यदि आपका प्राग्म या किशोर कोरोनोवायरस प्रकोप के बारे में चिंतित महसूस कर रहा है, तो उन्हें इसे बात करने दें और सुनने वाला कान बनें। अनिश्चित चुनौतियों के साथ पिछले अनुभवों के बारे में उन्हें याद दिलाएं और उनका सामना कैसे करें। यह बच्चों के लिए एक उपयोगी विकासात्मक अभ्यास है जिससे यह पता चलता है कि दुनिया में खतरा है और आशंकाओं, निराशाओं और नकारात्मकताओं को संभालना सीखो।

“यह कहना माता-पिता के लिए मददगार है, ‘याद रखें कि एक पेड़ कब घर पर गिर गया?’ या ‘याद रखें कि जब सड़कें बर्फीली थीं, और हमें स्कूल जाने में मुश्किल समय था?”, क्ले सेंटर के कार्यकारी निदेशक जीन बेरेसिन ने कहा। मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल में युवा स्वस्थ मन के लिए। उन्होंने कहा, ” चुनौतीपूर्ण समय पर इसे वापस लाएं ताकि वे याद रख सकें। कहो, got हम इसके माध्यम से मिला। हमने एक साथ कठिन समय प्राप्त किया है, और हम इसे अब फिर से कर सकते हैं। बेशक हम थोड़े चिंतित हैं और सभी जवाब नहीं हैं। लेकिन हमने उन्हें फिर से वापस नहीं किया। ‘

दूसरी ओर, आपके प्रीटेन्स या किशोर इस तरह से महसूस नहीं कर रहे होंगे। उनसे संकेत लें। “यदि वे असंबद्ध हैं, तो उदासीनता का सम्मान करें और उन्हें आवश्यक के रूप में अपडेट करें,” हीडलबर्गर ने कहा।

पेट्स के साथ बढ़ते बच्चों के फायदे

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जब एक घोड़ा आपके बच्चे को ले जाता है, जो छोटा और शक्तिहीन महसूस करता है, तो उसका बहुत आंदोलन आपके बच्चे को आराम देता है और कार्रवाई के माध्यम से नियंत्रण बहाल करता है। और अपने घोड़े की सवारी करते समय, आपका बच्चा बिना शर्त स्वीकृति का एक सुरक्षित स्थान पा सकता है और अपने सबसे अच्छे दोस्त और चिकित्सक … अपने घोड़े के साथ प्यार कर सकता है।

मेरा बहुत प्रिय मित्र एक घोड़ा फुसफुसाता है, जिसने पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) चंगा के साथ कई बच्चों की मदद की है। एक दिन दोपहर का भोजन एक साथ करते हुए, मैंने उससे पूछा कि मुझे समझाएं कि जानवर, और घोड़े विशेष रूप से, PTSD के साथ बच्चों को ठीक होने में मदद करते हैं। उसने मुझे समझाया कि बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और घरेलू हिंसा, साथ ही जिन बच्चों की शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियां हैं, वे घोड़ों (और अन्य जानवरों) का जवाब देते हैं क्योंकि वे सहज रूप से पहचानते हैं कि वे उन पर भरोसा कर सकते हैं।

भावनात्मक और शारीरिक रूप से घायल और दुर्व्यवहार करने वाले बच्चों की कोई आवाज़ नहीं है, और अक्सर भावनात्मक और शारीरिक रूप से पंगु हैं, खुद को व्यक्त करने में असमर्थ हैं। ये बच्चे जमे हुए हैं, और फिर भी, जब वे एक बड़े, शक्तिशाली घोड़े पर बैठते हैं, तो वे एक बार फिर से भरोसा करना सीखते हैं, आराम करते हैं और अपने नए सहयोगी के आंदोलन के लिए आत्मसमर्पण करते हैं।

एक घोड़ा न तो न्याय करता है और न ही आलोचना करता है, लेकिन बिना शर्त प्यार करता है। और न केवल वह अशाब्दिक संकेतों के साथ प्रतिक्रिया करता है, जैसे कि ध्वनि, गूंज और अपने कानों को उठाता है, लेकिन वह ईमानदार भी है, और आपके बच्चे को किसी भी चीज से दूर नहीं होने देगा – कोई धोखा नहीं, कोई धोखा नहीं। आगे, क्योंकि शारीरिक या भावनात्मक चुनौतियों या दुरुपयोग के साथ बोझिल होने वाले बच्चे को अक्सर बेईमानी में उलझा दिया जाता है, वह पहली बार सामना कर सकता है, एक दोस्त जिसे वह गिन सकता है कि उसे निराश न करें।

जब एक घोड़ा आपके बच्चे को ले जाता है, जो छोटा और शक्तिहीन महसूस करता है, तो उसका बहुत आंदोलन आपके बच्चे को आराम देता है और कार्रवाई के माध्यम से नियंत्रण बहाल करता है। और अपने घोड़े की सवारी करते समय, आपका बच्चा बिना शर्त स्वीकृति का एक सुरक्षित स्थान पा सकता है और अपने सबसे अच्छे दोस्त और चिकित्सक … अपने घोड़े के साथ प्यार कर सकता है।

पालतू जानवरों के साथ मानव जाति के प्रारंभिक संबंध के इतिहास पर लंबे समय से बहस चल रही है, लेकिन 12,000 साल पहले एक भेड़िया-पिल्ला के चारों ओर अपनी बाहों के साथ दफन किए गए एक आदमी के इज़राइल में एक खोज, सिर्फ इस बात का सबूत हो सकता है कि मनुष्यों ने कब तक होने के लाभों की खोज की थी पालतू जानवर। आज, कई परिवार अपने पालतू जानवरों से प्यार करते हैं और अपने पालतू जानवरों को अपने परिवार के सदस्य मानते हैं। चाहे आप एक बिल्ली, एक कुत्ता, एक घोड़ा, या एक खरगोश चुनते हैं, पालतू जानवरों के साथ घर में बच्चों को बढ़ाने के लिए लाभ महान हैं।

अपने परिवार में एक पालतू जानवर को शामिल करने के कुछ लाभ हैं:

पालतू जानवर बिना शर्त प्यार देते हैं। वे गैर-न्यायिक हैं, और विशेष रूप से केवल बच्चों, एकाकी बच्चों या ऐसे बच्चों के लिए जिनके पास सहोदर प्रतिद्वंद्विता या भावनात्मक संकट है, एक पालतू जानवर उन्हें किसी से बात करने के लिए देता है। एक पालतू जानवर आराम कर सकता है, समर्थन दे सकता है, और बिना निर्णय या परिणाम के बच्चे की परेशानियों को सुन सकता है। और, खेलते समय, एक पालतू जानवर आपके बच्चे का साथी और सबसे अच्छा दोस्त बन सकता है।

एक पालतू जानवर एक बच्चे को सिखा सकता है कि उसे अपना गुस्सा या डर दूसरों पर नहीं निकालना है। कुछ बच्चे बछड़े बन जाते हैं और यदि उनके पास अपनी तुच्छ भावनाओं को साझा करने के लिए एक सुरक्षित स्थान नहीं है, तो वे उन भावनाओं को अन्य बच्चों पर प्रोजेक्ट कर सकते हैं। क्योंकि एक पालतू जानवर आपके बच्चे से प्यार करेगा चाहे वह कुछ भी कहे, एक पालतू जानवर उसे एक विश्वासपात्र, एक सुरक्षित जगह देता है जिसमें मौखिक रूप से अपने डर और उसके गुस्से को डालना है।

एक पालतू जानवर सहानुभूति सिखा सकता है। एक पालतू जानवर की देखभाल करना जो इतना निर्भर है कि आप सहानुभूति सिखाता है। आपका बच्चा आपके पालतू जानवरों की जरूरतों को पढ़ना सीखता है: क्या वह भूखा है? क्या उसे बाहर जाने की जरूरत है? हो सकता है कि पालतू हवा, बारिश या बर्फ से डर गया हो और आराम करने की जरूरत हो। इसके अलावा, सहानुभूति एक ऐसा कौशल है जिसे सिखाया जा सकता है और एक ऐसा कौशल जिसे बुलियों में अक्सर कमी आती है।

एक पालतू जानवर आत्मविश्वास और जिम्मेदारी सिखा सकता है। पालतू जानवरों की देखभाल की जिम्मेदारी होने से बच्चे आत्मविश्वास हासिल कर सकते हैं। तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चे पालतू जानवरों के पानी और भोजन के कटोरे भरने जैसे सरल कार्यों का प्रबंधन कर सकते हैं। जैसे-जैसे आपका बच्चा बड़ा होता जाता है, वह पालतू जानवरों को तैयार कर सकता है।

पशु बच्चों को सामाजिक बनाने और मौखिक कौशल बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। आपने बहुत कम बच्चों को देखा है, जो अभी भी पालतू जानवरों से दूर रहने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह, पालतू जानवर न केवल सामाजिक और भावनात्मक समर्थन देते हैं, बल्कि बच्चों को संज्ञानात्मक भाषा कौशल भी प्रदान करते हैं। एक पालतू जानवर की सरल उपस्थिति आपके बच्चे को दूसरे के साथ बात करने और सामाजिक अभ्यास करने में मदद करने के लिए मौखिक उत्तेजना प्रदान करती है।

पालतू जानवर (और सामान्य रूप से जानवर) बच्चों के लिए बहुत चिकित्सीय हो सकते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि पालतू जानवर निम्न रक्तचाप, रिकवरी समय में तेजी लाने और तनाव और चिंता को कम करने में कैसे मदद कर सकते हैं। हम इसे परेशान बच्चों और ऑटिस्टिक बच्चों के साथ देखते हैं, और, जैसा कि मेरे घोड़े फुसफुसाए दोस्त के पास है, उन बच्चों के साथ जो PTSD का अनुभव करते हैं: जब वे जानवरों के साथ होते हैं तो वे तुरंत संबंधित हो सकते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि जानवर उनके प्यार और स्नेह में बिना शर्त हैं।

कैसे पहचानें कुपोषण को और क्या है बचाव के उपाय

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व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक है पोषक तत्व क्योंकि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जैसे :प्रोटीन,वसा,कार्बोहाइड्रेट,विटामिन फाइवर तथा जल आदि। कम या ज्यादा मात्रा में इन तत्वों को लेने से व्यक्ति कुपोषण का शिकार हो सकता है। कुपोषण के कारण बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है। इसके कारण व्यक्ति आसानी से कई प्रकार के रोगों से ग्रस्त हो सकता है जैसे : स्त्रियों में रक्ताल्पता या घेंघा रोग अथवा बच्चों में सूखा रोग या रतौंधी आदि प्रायः कुपोषण अपर्याप्त असंतुलित आहार के कारण होता है अतः कुपोषण का जानकारियाँ होना बहुत ही जरूरी है

Pic: dopahar

कुपोषण के कारण
कुपोषण से ग्रस्त होने के अनेक कारण हो सकते है जैसे: कुपोषण का कारण सिर्फ संतुलित आहार की अधिकता एवं कमी से ही नहीं बल्कि यह सामाजिक स्थिति से भी प्रभावित करता है जैसे :जनसंख्या में वृद्धि के कारण भी यह संभव हो सकता है, जिसमे समाज के एक हिस्से को ही पोषण मिलने लगता है।तथा दूसरे पक्ष कुपोषण से ग्रस्त हो जाते हैं। इसके अलावा गरीबी, आर्थिक रूप से कमजोर होना भी कुपोषण का कारण है। लोगो के पास पोषक तत्व खरीदने को भी धन नहीं होते है ऐसे में उन्हें जो भी मिलता है उसी से जीवन को चला लेते हैं। और यही असंतुलित आहार कुपोषण को बढ़ाता है । आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति पौष्टिक चीजें जैसे दूध, फल, घी इत्यादि नहीं खरीद पाते और उनके प्रतिदिन के आहार में पौष्टिकता की कमी हो जाती है।
अज्ञानता तथा निरक्षरता भी कुपोषण एक बड़ा कारण है। गाँव, देहात में रहने वाले व्यक्तियों को पौष्टिक आहार की उतनी जानकारी नहीं होती है इस कारण अपने और बच्चों के भोजन में पौष्टिक आहार शामिल नहीं करते है इसके कारण अपने आप तो इस रोग से ग्रस्त होते ही है बल्कि अपने परिवार को भी कुपोषण के शिकार बना देते है।

Pic: dailyhunt

गर्भावस्था के दौरान कुपोषण के गंभीर परिणाम

माँ के शरीर में पोषक तत्वों की कमी बच्चें की विकास के लिए खतरनाक ही नहीं बल्कि पुरे उम्र रोग से ग्रस्त तथा कमजोर बना देती है । कुपोषण की शिकार गर्भवती महिलाओं को खून की कमी अथवा रक्ताल्पता की बीमारी हो सकती है इसलिए गर्भवती स्त्रियों को ज्यादा पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है। किन्तु जो गर्भवती माताएं संतुलित आहार नहीं लेती हैं, स्वयं तो रोग से पीड़ित होते ही हैं साथ में होने वाले बच्चें को भी कमजोर एवं रोगी बना देती हैं। गर्भावस्था के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी बच्चे के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

कैसे पहचानें कुपोषण को
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार की जरूरी होती है। तथा समय के अनुसार पौष्टिक आहार के न मिलने पर हमें कई प्रकार के लक्षण दिखते हैं।

  • शरीर का विकास अवरुद्ध होना या रुक जाना ।
  • त्वचा का रंग पीलापन होना तथा झुर्रियाँ युक्त।
  • मांसपेशियाँ का सिकुड़ जाना
  • थोड़ा बहुत काम करने पर ज्यादा थकान लग जाना ।
  • वजन का कम होना, कमजोरी महसूस होना ।
  • मन उदास होना ,घबराहट तथा चिड़चिड़ापन होना ।
  • पाचन शक्ति में गड़बड़ी तथा नींद कम आना ।
  • स्किन और बालों का रंग में परिवर्तन आना ।
  • रोग प्रतिरक्षा में कमजोर होना ।
  • पैरों तथा घुटनों और शरीर के निचले हिस्से में सूजन होना है।
    ऐसे होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए
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कुपोषण रोकने के उपाय

  • नियमित रूप से संतुलित आहार लेना चाहिए|
  • दूध और डेयरी खाद्य पदार्थ
  • फलों एवं सब्जियां
  • प्रोटीन के अन्य गैर-डेयरी स्रोत
    इसके अलावा सभी हॉस्पिटलों में मरीजों,बच्चों ,गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गो को कुपोषण के लिए मूल्यांकन किया जाना चाहिए| तथा बच्चें कुपोषण से ग्रस्त न हो इसलिए गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त पौष्टिक आहार देना चाहिए|

गर्मियों में बच्चों की देखभाल कैसे करे?

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गर्मियों का मौसम आ चुका है मौसम के बदलने पर बच्चों को कोई न कोई बीमारी पकड़ लेती है । क्योंकि बच्चें बहुत नाजुक होते है तथा बच्चों का शरीर बड़ों की तरह विकसित नहीं होता है । और बच्चों के शरीर में तापमान को घटाने और रेगुलेट करने की क्षमता बड़ों की अपेक्षा कम होती है । इसी कारण जब गर्मी बढ़ती है तो बच्चे बीमार होने लगते हैं।इसलिए बच्चों का इस गर्मियों में किस तरह ख्याल रखें आज हम बताएँग

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पानी की कमी न होने दें और पौष्टिक आहार दें

तापमान बढ़ने के साथ ही शरीर से पानी की मात्रा कम हो जाती है, इसलिए गर्मियों में बच्चों को अधिक से अधिक पानी पीने के लिए कहें। ध्यान रहें कि जब बच्चें खेलना, कूदना,मस्ती करनें लगते है तो उस समय दौरान पानी पीना भूल जाते है। ऐसे में पसीने के द्वारा शरीर से बहुत ज्याद पानी निकल जाता है और डिहाइड्रेशन होने का खतरा रहता है।डिहाइड्रेशन से बचने के लिए घर का बना जूस , निम्बू पानी, नारियल पानी , छाछ, ताजे फल का रस, इसके अलावा खीरा तरबूज भी दें सकते है इनके सेवन से पानी की कमी नहीं होगी।

बच्चों को गर्मियों में सही आहार देना जरूरी है क्योंकि गर्मियों में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है।सही आहार के न मिलने पर बच्चें बीमार पड़ जाते है जैसे – डायरिया ,पेट में जलन ,उल्टी होना, पीलिया, टाइफाइट होने का संभव हो जाता है इसलिए अपने बच्चों के आहार में विशेष ध्यान दें और हल्का पौष्टिक आहार दें। और तली-भुनी चीजों को कम से कम दें।

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साफ सफाई का ध्यान रखने और मच्छरों से बचाव करें

गर्मियों में बच्चों को सुबह शाम दोनों टाइम नहलाने की आदत डालें। बच्चा कहीं भी बाहर से आये तो उनका हाथ पैर साबुन से अच्छी तरह साफ करवाएं जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जायेगा । गर्मियों में शाम के समय मच्छर और कीड़े बहुत हो जाते है ऐसे में बच्चा जब बाहर खेलने जाए तो पूरी बांह वाले कपड़े पहनाएं तथा कीड़े और मच्छरों से सुरक्षा करने वाली क्रीम लगाकर बाहर भेजें । घर में भी सोते समय गर्मी की रातो में मच्छरदानी का प्रयोग करें।

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मौसम का ध्यान रखें और दिन की गर्मी से बचाएं

मौसम का ध्यान रखते हुए सर्द -गर्म का ख्याल रखें अगर आपका बच्चा धूप में खेलकर वापस घर आएं तो तुरंत नहलाना नहीं चाहिए और कूलर के सामने भी बैठने न दें। बच्चे को पीने के लिए ठन्डे पानी की जगह सामान्य पानी दें। इसके अलावा गर्मियों में अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए सबसे अच्छा तरीका कि 12 से 4 बजे दोपहर में बाहर न जाने दें उस समय उन्हें घर में ही कुछ गतिविधियों में व्यस्त रखें । क्योंकि 12 से 4 बजे के बीच तापमान सबसे ज्यादा रहता है।

शरीर को ढककर रखें और हल्के रंग के कपड़े पहनाएं

वैसे तो धूप बहुत ही फायदेमंद होती है परन्तु गर्मियों के धूप तेज एवं नुकसान दायक हो जाती है जिससे बच्चें बीमार पड़ सकते है। गर्मियों के मौसम में घर से बाहर निकलते समय सिर जरुर ढका होना चाहिए। इसके लिए आप टोपी के साथ छातेका प्रयोग कर सकती हैं। तेज धूप में बच्चें देर तक बाहर रहें तो डिहाइड्रेशन और सनस्ट्रोक का शिकार हो सकते हैं। इसलिए कोशिस करें कि सुबह और शाम को ही घर से बाहर जाएं।

इसके साथ ही गर्मियों में शरीर के तापमान को विनियमित करने के लिए बच्चों को हल्के रंग के कपड़े को पहनना चाहिए। गहरे रंग के कपड़े सूरज की गर्मी को अवशोषित करतें है तथा हल्के रंग के कपड़े शरीर को ठंडा रखने में सहायता करते है । इसीलिए गर्मियों के समय अपने बच्चों को नियमित सूती कपड़े एवं हल्के रंग के कपड़े पहनाएं।

स्वस्थ जीवन के लिए अपनाएं ये जरुरी आदतें

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स्वास्थ्य और तंदरुस्ती को बनाए रखने के लिए सन्तुलित भोजन के साथ नियमित शारीरिक व्यायाम की आवश्यकता होती है। अच्छे स्वास्थ्य और तंदरुस्ती वाला एक व्यक्ति अपना जीवन पूरे उत्साह के साथ जीता है। जो लोग स्वस्थ और तंदरुस्त होते हैं उन्हें बीमारियों का खतरा कम रहता है। तंदरुस्त होने का अर्थ केवल शारीरिक रुप से फिट रहना नहीं है, बल्कि इसका अर्थ एक व्यक्ति की स्वस्थ मानसिक स्थिति से भी है। यदि कोई शारीरिक रुप से तंदरुस्त है, वह मानसिक रूप से भी स्वस्थ रह सकता है इसलिए जीवन को ख़ुशी से जीना चाहिए।

Home Cleaning (Pic: dclutterbug)

साफ-सफाई का विशेष ध्यान -सबसे पहले हमें स्वस्थ रहने के लिए हमारे चारो और का वातावरण स्वच्छ होना जरूरी है , स्वच्छता घर के अंदर व बाहर दोनों जगह होनी चाहिए।अपने बच्चों को भी स्वच्छता का ज्ञान देना चाहिए ,डायनिंग टेबल, सेंटर टेबल, को हमेशा अच्छे से साफ़ करनी चाहिए और हमेशा सफाई करने पर इससे गंदगी जमा नहीं होगी बाथरूम में रोज अच्छे से पानी डालें,जिससे ये गन्दी न हो पाए किचन को साफ रखे तथा बर्तन धोने वाले जगह, सिंक की हमेशा सफाई कर लेना चाहिए।

जब हम अपनी दिन कि शुरुआत अच्छे से करते है तो वह हमारे पूरे दिन को खुशनुमा बना देता है अगर हम अपने जीवन स्वास्थ्य दिनचर्या का पालन करेंगे तो हमारी जिंदगी का हर दिन बहुत ही अच्छे से बीत जायेगा,एक अच्छी दिनचर्या तथा जीवन शैली हमारे जीवन को स्वस्थ बनाएगी।इसलिए हमें छोटी-छोटी बातो पर ध्यान देना चाहिए। हमे प्रत्येक दिन साफ कपड़ा पहनना चाहिए। पुरानी कहावत है कि स्वास्थ्य से बड़ा कोई धन नहीं है।

संतुलित आहार – हमारा शरीर पोषक तत्वों से विटामिन और खनिज प्राप्त करता है जिससे हमारे शरीर का विकास और हमारे शरीर का निर्माण के लिए ऊर्जा होता है। इसलिए हमे संतुलित आहार लेना बहुत हीआवश्यक होती है संतुलित आहार वह है,जिसमे सभी प्रकार के पौष्टिक,विटामिन प्राप्त होता है। कार्बोहाइड्रेट और वसा ऊर्जा का स्रोत होती है।

जटिल कार्बोहाइड्रेट जो गेहूं में पाई जाती है जो कि हमारे शरीर के लिए बेहतर होती है, भोजन में विटामिन A,B , C, D, E और k होने आवश्यक होता , स्वस्थ तथा तंदरुस्त रहने के लिये हमें प्रतिदिन के खाने में हरी सब्जियाँ, फल, अंकुरित बीज और सलाद का सेवन करना चाहिये जिस कारण हमे बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है,एक स्वस्थ व्यक्ति को संतुलित आहार के साथ-साथ उचित मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है।

संतुलित भोजन में ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए जिनमें विटामिन, मिनरल, और पोषक तत्व उच्च मात्रा में हों और वसा तथा शुगर कम मात्रा लेना चाहिए। फलों में पोषण तत्वों की उच्च मात्रा होती जो जल्दी पचने वाली होती है। आहार में आप सभी प्रकार के फल,सलाद ,सूखे मेवे का सेवन करना चाहिए , इन सब खाद्य पदार्थ को अपने नियमित भोजन का हिस्सा बनाएं। भोजन संतुलित रहेगा तो जीवन भी संतुलित रहेगा।

Exercise (Pic: cwellness )

नियमित व्यायाम करें – स्वस्थ तथा तंदरुस्त बने रहने के लिए हमें नियमित आहार के साथ -साथ व्यायाम की आवश्यकता होती है। इसके लिए घंटों व्यायाम की जरूरत तो नहीं है किन्तु नियमित रूप से प्रतिदिन थोड़ा सा व्यायाम की जरूरत होती है। नियमित व्यायाम करने से ना केवल हम तंदरुस्त रहते हैं बल्कि हमारी जीवनशैली भी मजबूत बनती है यह हमारी ऊर्जा के स्तर को ही नहीं बल्कि यह हमारी जीवन के आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है।

दिन की शुरुआत हमें घूमने ,दौड़ने ,जिम जाना व्यायाम करना या अन्य शारीरिक कार्यों से करना चाहिए।इससे हमारी मांसपेशियों में सुधार होता है और हमें पाचन संबंधी बीमारी नहीं होती है। वैसे तो व्यायाम सभी आयुवर्ग के लिए बहुत ही जरूरी है लेकिन विशेषरूप से युवापीढ़ी के लिए नियमित रूप से शरीरिक गतिविधियाँ और नियमित व्यायाम आवश्यक है।

पर्याप्त नींद लेना – हमारे जीवन में नींद बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसीलिए हमारी स्वस्थ एवं तदुरूस्त रहने के अपनी आदतों की सूची में पहले नंबर पर नींद को लिया गया है। हमें संतुलित आहार लेना चाहिए कई बार लोग गलत खान-पान करते है जिसकी की वजह से पेट मैं दर्द जैसा परेशानियां शुरू हो जाती है जिस कारण कई लोग रात में एसिडिटी और अन्य पेट की परेशानियों हो जाती हैं,जिससे कारण नींद खराब हो जाती है। स्वस्थ जीवन के लिए सही और संतुलित भोजन का सेवन करना चाहिए ।जब हमारा पाचन तंत्र है सही रहेगा तभी नींद भी अच्छी आएगी।

सही तरह से नींद नहीं आना भी बीमारियों का कारण बन सकता है। नींद नही आने का एक कारण और भी है दिन मैं देर तक सोने की आदत भी है जो लोग दिन के समय मैं ज्यादा सोते है उन्हें रात को नींद कम आती है दिन के समय सोना नहीं चाहिए जिंदगी में स्वस्थ एवं तंदरुस्त रहने के लिए भरपूर नींद लेनी चाहिए।

समय रहते टीबी की पहचान जरुरी,वर्ना हो सकता है घातक

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टीवी यानी ट्रयूबर क्लोसिस बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। वैसे तो टीबी कई तरह की होती है लेकिन फेफड़े की टीवी सबसे कॉमन है। ज्यादातर यह बीमारी हवा के जरिए एक से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। इसके साथ ही मरीज के खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से निकलने वाले बारीक़ कण इन्हे फैलाते हैं। जब को स्वस्थ इंसान टीबी के मरीज के बहुत करीब बैठकर बात करता है तो उसे भी यह रोग पकड़ सकता है। फेफड़ों के अलावा मुंह, ब्रेन, यूटरस लिवर, किडनी,आदि में भी टीवी हो है। आइये जानते है इस भयंकर बीमारी के लक्षण और इलाज के बारे में।

कैसे पहचानें

अगर किसी इंसान को तीन हफ़्ते से खांसी है और उसके साथ ही तेज बुखार है। इसके साथ ही
खांसी के साथ बलगम आता है और कभी कभार बलगम में खून आता है यो आपको सावधान होने की जरुरत है। इन लक्षणों के साथ ही मरीज के वजन में लगातार कमी, भूख कम लगना, थकान महसूस होना, सांस लेते हुए सीने में दर्द होना, रात के समय भी पसीना आना और गले में सूजन या गिल्टी होना जैसे लक्षण भी दीखते है।

इसके कारण

टीवी रोग के यूँ तो कई कारण हो सकते है लेकिन प्रमुख कारण है अपर्याप्त व पौष्टिकता भोजन की कमी, गन्दगी वाले स्थान पर निवास। इसके साथ ही गाय का कच्चा दूध पिने से भी यह रोग फैलता है।
वहीं कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीज इसके चपेट में जल्दी आते है।

मरीज क्या करें

तीन सप्ताह तक लगातार खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाकर नियमित तौर पर दवा का पूरा कोर्स लें,ध्यान रहें बिना डाक्टर से पूछे दवा को बंद न करे। आमतौर पर बीमारी खत्म होने का लक्षण के दिखने पर मरीज को लगता है कि वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गया है और दवा खाना बंद कर देता है। ऐसा बिलकुल भी ना करें इससे दवा के प्रति रेजिस्टेंट पैदा हो सकता है जिसके कारण बीमारी तो बढ़ ही सकती है और दूसरे पर टीवी फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

इसके साथ ही टीबी के मरीज को मास्क पहनकर रहना चाहिए,अगर आप मास्क का उपयोग नहीं करना चाहते तो हर बार खांसने या छींकने से पहले अपने मुँह को नैपकिन पेपर से कवर करें और इस नैपकिन को डस्टबिन में डालें या फिर जला दें। टीवी के मरीज को दूसरों से कम से कम 1 मीटर की दूरी बना कर रखनी चाहिए। भीड़ भरी जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए और इधर -उधर नहीं थूकना चाहिए।

टीबी के मरीज का कमरा हवादार, अच्छी रोशनी,और साफ-सुथरा होनी चाहिए। मरीज को टीवी से बचने के लिए खान पान में सावधानी बरतनी होगी और भरपूर मात्रा में प्रोटीन डाइट लेना होगा जिससे आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढे । आप सोयाबीन , दाल, मछली, अंडा, दूध , अदरक आदि चीजो का सेवन करे जिससे प्रतिरोधक क्षमता का विकास होगा । योग और एक्सरसाइज करें और सामान्य जिंदगी जिए ।मरीज को सिगरेट,हुक्का, बीड़ी,शराब,तंबाकू आदि से परहेज करना चाहिए।

इलाज

सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज फ्री होता है। पूरी तरह से इलाज का होना मुमकिन है परन्तु टीवी का इलाज लम्बा चलता हैं। इस बीमारी को ठीक होने में कम से कम छह महींने से दो साल का समय लग सकता है। टीबी का इलाज पूरी तरह से ठीक नहीं होने पर अगर बीच में ही छोड़ दिया जाए तो बैक्टीरिया में दवाइयों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है इसके चलते आम दवाए असर नहीं करती और इलाज काफी मुश्किल हो जाता है। इलाज शुरू करने के शुरुआती 2 हफ्ते से लेकर 2 महीने तक भी इन्फेक्शन फैल सकता है क्योंकि उस वक्त तक बैक्टीरिया एक्टिव रह सकता है । ऐसे में इलाज के शुरुआती समय में भी सावधनियां जरूरी है।

‘स्तनपान’ शिशु के लिए अमृत, तो माँ के लिए भी फायदेमंद

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ही नहीं बल्कि जीवन की धारा है। मां का दूध सुपाच्य होता है । स्तनपान करने से मां और बच्चें के बीच सकारात्मक प्रभाव पड़ता है बौद्विक शक्ति का विकास, तथा अनेक रोगो से लड़ने की शक्ति मिलती है जैसे : डायरिया,कुपोषण, सूखा रोग आदि तथा जो शिशु भरपूर मात्रा में स्तनपान करते हैं उनके बड़े होकर मधुमेह, दिल संबंधी रोग और कैंसर आदि जैसे बड़े रोगों के होने की संभावना भी काफी कम हो जाती है।

प्रतिरोधक क्षमता – मां का दूध पीने वाले बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता अन्य बच्चों की अपेक्षा तुलनात्मक रूप से अधिक होती है। स्तनपान करने से बच्चों को सर्दी, जुकाम,खांसी, छाती में इंफेक्शन और कान के संक्रमण आदि रोग नहीं होते हैं।

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स्तनपान से शिशु का वजन नियंत्रित – जिस शिशु को स्तनपान कराया जाता है उस शिशु पर अनावश्यक चर्बी नहीं चढ़ती है। माँ के दूध से पेट भरते ही शिशु आवश्यकता से अधिक दूध नहीं पीता। बड़े होने के बाद भी बचपन में मिला स्तनपान मोटापे तथा कोलेस्ट्रॉल आदि से बचाता है।

स्तनपान से शिशु का दिमाग तेज – माँ के दूध से शिशु को डी एच ए मिलता है जो और शिशु के मानसिक विकास में सहायक होता है। शिशु को भावनात्मक सुरक्षा का अहसास मिलता है जो मष्तिस्क के विकास के लिए सहायता करता है।

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दांत और मुँह का सही विकास – जो बच्चा स्तनपान करता है उसके जबड़े की हड्डी तथा ऊपरी वायु मार्ग की मांसपेशियों का विकास सही तरीके से होता है। शिशु का मुँह स्तन से दूध पीने के लिए सबसे अनुकूल होता है। इस पूरी प्रक्रिया में बच्चें का मुँह का विकास अच्छे से हो जाता है और दांत निकलने में भी यह प्रक्रिया सहायक होती है। इससे जबड़े भी मजबूत बनते हैं

माँ का दूध अत्यधिक सुविधा जनक – माँ का दूध सबसे सुविधा जनक माना जाता है क्योंकि जब भी बच्चे को भूख लगे तो स्तनपान कराने के लिए किसी प्रकार की कोई तैयारी नहीं करनी पड़ती है। अगर कहीं माँ को बाहर जाना भी पड़े तो शिशु का आहार हमेशा माँ के साथ होता है। माँ के दूध को ठंडा गर्म करने की कोई भी परेशानी नहीं होती है।

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स्तनपान से माँ के लिए भी फायदा – स्तनपान से जितना शिशु को फायदा है उतना ही माँ को भी फायदा पहुंचता है । यह डिलीवरी के बाद महिला के वजन पर नियंत्रित करता है, कैलोरी घटाता है और शीघ्र घाव को भरता है। माँ और बच्चें के बीच भावनात्मक सम्बन्ध को भी बढ़ाता है तथा हार्मोन का संतुलन बनाये रखता है। स्तनपान कराने से महिलाओं में होने वाले स्तनकैंसर की संभावना भी कम होती है। जो महिलाएं बच्चे के जन्म के तुरंत बाद ब्रेस्टफीडिंग शुरू करती हैं उन्हें प्रसव के बाद होने वाले दर्द व रक्तस्त्राव में भी काफी आराम मिलता है।

बच्चों की एलर्जी के लिए प्राकृतिक उपचार

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आपके बच्चों के साथ क्या हो रहा है? हो सकता है कि आपने पार्क में खेलने के बाद अपने बेटे की त्वचा पर उभरे हुए लाल धब्बे को देखा हो। हो सकता है कि आप अपनी बेटी को अपने पड़ोसी की बिल्ली को पालतू बनाने के बाद छींकते हुए सुनें। या आप अपने प्रेगनेंट को उसकी पफीली आँखों को रगड़ते हुए देख सकते हैं क्योंकि वह लॉन घास काटने वाले को गैरेज में वापस भेजती है।

आप एलर्जी को कैसे रोक सकते हैं?

एलर्जी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका एलर्जी से बचना है। एक बार जब आप जान लें कि आपके बच्चे को किस चीज से एलर्जी है, तो अपने डॉक्टर से पूछें कि वे उनसे कैसे बच सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपके बच्चे को घास से एलर्जी है, तो उनका डॉक्टर उन्हें लंबी पैंट और मोजे पहनने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

The little girl has a runny nose and blows her nose into a paper handkerchief. Children’s cold selective focus on a handkerchief. Acute respiratory viral

यदि उन्हें कुत्तों से एलर्जी है, तो उनके डॉक्टर उन्हें पेटिंग से बचने की सलाह दे सकते हैं। यदि उन्हें कुछ खाद्य पदार्थों से एलर्जी है, तो उनका डॉक्टर उन्हें कभी न खाने के महत्व पर जोर देगा। उदाहरण के लिए, वे संभवतः आपको और आपके बच्चे को घटक सूचियों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, रेस्तरां के मेनू आइटम के बारे में सवाल पूछेंगे, और एलर्जी से व्यंजन और खाना पकाने की सतहों से बचने के लिए कदम उठाएंगे।

क्या आप प्राकृतिक उपचार का उपयोग कर सकते हैं?

कई एलर्जी प्रतिक्रियाओं से बचा जा सकता है। लेकिन दुर्घटनाएं होती हैं। एलर्जी प्रतिक्रियाओं का इलाज करने के लिए, आपके बच्चे के डॉक्टर कुछ दवाओं की सिफारिश करेंगे। उदाहरण के लिए, वे ओवर-द-काउंटर एंटीथिस्टेमाइंस, प्रिस्क्रिप्शन एंटीथिस्टेमाइंस या एपिनेफ्रीन की सिफारिश कर सकते हैं।

कुछ प्राकृतिक उपचार भी हल्के एलर्जी के लक्षणों को शांत करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन आपको कभी भी गंभीर एलर्जी के उपचार के लिए प्राकृतिक उपचार का उपयोग नहीं करना चाहिए। अपनी एलर्जी के लिए एक नया उपचार आजमाने से पहले हमेशा अपने बच्चे के डॉक्टर से बात करें।

त्वचा के लक्षणों के लिए प्राकृतिक उपचार

एंटीहिस्टामाइन क्रीम और लोशन कई दवा दुकानों पर उपलब्ध हैं। कुछ अन्य उपाय भी त्वचा के लक्षणों को शांत करने में मदद कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, संपर्क जिल्द की सूजन का इलाज करने में मदद करने के लिए, गर्म पानी और हल्के साबुन से चिढ़ क्षेत्र को स्नान करें। फिर एलोवेरा जेल या कैलेंडुला क्रीम लगाने पर विचार करें।

हालाँकि, ध्यान दें कि कुछ लोग इन उत्पादों में मौजूद अवयवों के प्रति संवेदनशील भी हो सकते हैं। यदि आपके बच्चे की त्वचा सूखी है, तो खुशबू रहित मॉइस्चराइजिंग क्रीम या मलहम मदद कर सकते हैं। पित्ती को राहत देने में मदद करने के लिए, क्षेत्र में एक ठंडा गीला कपड़ा लागू करें। अपने बच्चे के नहाने के पानी में बेकिंग सोडा या दलिया डालना भी एक सुखद प्रभाव प्रदान कर सकता है।

पेट दर्द को हल्के में न लें, हो सकता है खतरनाक

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Portrait of teenaged girl suffering from stomach ache. Studio shot, grey background.

पेट का रोग शरीर के हर रोग का प्रमुख कारण होता है। क्योंकि पेट भोजन को ग्रहण करता है और ऊर्जा प्रदान करता है।पेट के सामन्य परेशानियों में पेट दर्द एक आम समस्या है यह किसी को भी कभी भी हो सकती है। इसके सामन्य वजहें हैं पेट में गैस बनना, खाने का न पचना और बार-बार डकार आना, पेट में एसिड बनना, अल्सर होना, अपच होना, डायरिया या लूज मोशन होना आदि।

पेट में दर्द अन्य कई गंभीर बीमारियों की वजह से हो सकता है। हालांकि हल्का फुल्का पेट दर्द गुनगुना पानी पीकर ठीक किया जा सकता है लेकिन बार-बार पेट दर्द होने पर कोई बड़ी बीमारी भी हो सकती है। ऐसे में आपको कभी खुद से घरेलू उपचार नहीं करना चाहिए बल्कि तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। ये हैं पेट की गंभीर समस्याएं जिन्हे आप हल्के में ना लें।


Apendiks (Pic:wanista)

अपेंडीसाईिटस (अपेंडिक्स)

पेट दर्द सभी आयु वर्ग के लोगों में पायी जाती है। इसी में से एक है अपेंडिक्स।अपेंडिक्स एक अंधी-नली जैसी संरचना है जो बड़ी आंत से जुड़ी रहती है। यह पेट के निचले हिस्से में दाहिने तरफ पायी जाती है। इसमें सूजन आने पर पेट दर्द के साथ -साथ उलटी, बुखार, भूख न लगना आदि। जब बीमारी काफी बढ़ जाती है तब अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन के द्वारा इसका पता लगाया जाता है। इस बीमारी का ऑपरेशन ही एकमात्र इलाज है। डॉक्टर ऑपरेशन कर अपेंडिक्स को काट कर शरीर से अलग कर देते हैं। पहले यह ऑपरेशन मुश्किल था लेकिन अब यह दूरबीन के द्वारा आसानी से किया जाता है।

Gallbladder (Pic: dailyhunt)

पित्ताशय
दूसरी सामान्य बीमारी पित्ताशय की पथरी हैं। वैसे तो यह किसी भी आयु और लिंग के व्यक्ति में हो सकती है लेकिन वह महिलाएं जिनकी उम्र पच्चीस से पैंतालीस वर्ष के बीच हो उनमें यह बीमारी ज्यादा पायी जाती है। इस बीमारी में दर्द पेट के दाहिने तरफ उपरी हिस्से में होता है। दर्द कम या ज्यादा और कभी बहुत ही ज्यादा हो सकता है। मरीज को दर्द के साथ -साथ उल्टी की शिकायत भी होती है। डॉक्टर इसका इलाज ऑपरेशन के द्वारा करते हैं।

Consipation(kabj) (Pic: digitallylearn)

कब्ज
पेट में गैस कब्ज से बनती है। इससे आमाशय की झिल्ली में सूजन आ जाती है। तथा भूख कम लगती है। कई बार उल्टियां होने लगती है और शरीर से आवश्यक तत्व कम हो जाते है ऐसे में खाली पेट में कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए और न ही खाली पेट नशा करना चाहिए। गैस्ट्राइटिस रोग में मरीज को दूध और दूध से बनी वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। पेट को साफ रखना चाहिए और कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए।

Liver Swelling (Pic: ghr.nlm.nih)

लीवर में सूजन
अधिक मांस और शराब का नियमित सेवन करने वाले लोगों के लिवर में सूजन की संभावना होती है। जिससे पेट के ऊपरी दांये भाग में दर्द हो जाता है। इससे पीलिया होने का खतरा भी बढ़ जाता है। पेट रोग के बचाव के लिए वसायुक्त भोजन, खट्टा, तेज मिर्च मसाले वाले भोजन न खाएं ।अल्कोहल और मांस का सेवन बंद कर दें। तथा चिकित्सक से उचित परामर्श लें।

Colitis (Pic: practicalpainmanagement)

कोलाइटिस
जब बड़ी आंत में सूजन होने से पेट में दर्द होता है तो उसे कोलाइटिस रोग कहा जाता है । इसक प्रमुख कारण प्रदूषित पानी का सेवन माना गया है। इसमें पेट के निचले भाग में दर्द होता है, दर्द के साथ दस्त, मल में आंव आने लगता है जिससे रोगी को हल्का बुखार और भूख न लगने की शिकायत होती है। इन रोगियों को सफाई,स्वच्छ पानी,नाख़ून छोटे तथा शौच जाने के बाद हाथों को अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके साथ ही बाजार के खुले कटे फलों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था के लिए अपने शरीर को कैसे तैयार करें (दिन 1-7)

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बच्चे के लिए प्रयास करने का निर्णय लेना जीवन में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है। लेकिन क्या आपका शरीर गर्भावस्था के लिए तैयार है? गर्भधारण के लिए खुद को तैयार करने के लिए आने वाले महीने में आप क्या कर सकते हैं, इसकी एक सूची यहां दी गई है।

दिन 1-7

दिन 1: जन्म नियंत्रण बंद करो

यदि आप गर्भधारण करना चाहते हैं, तो आपको जन्म नियंत्रण के किसी भी रूप को बंद करना होगा जिसका आप उपयोग कर रहे हैं। गर्भ निरोधक गोलियों जैसे कुछ प्रकार के गर्भनिरोधकों को रोककर आप तुरंत गर्भवती हो सकती हैं। वास्तव में, कई महिलाओं को गोली छोड़ने के दो सप्ताह के भीतर अपनी पहली अवधि मिलती है।

जब आप अवधि शुरू करते हैं, तो आपका पहला चक्र गर्भ धारण करने की कोशिश करता है। कुछ महिलाएं तुरंत गर्भवती हो जाती हैं, लेकिन दूसरों के लिए, इसमें कुछ महीने लगते हैं।

दिन 2: एक मल्टीविटामिन शुरू करें

गर्भावस्था शरीर के पोषण भंडार पर कर लगा रही है। किसी भी अंतराल को पाटने के लिए मल्टीविटामिन लेकर खुद को बढ़ावा दें। बेहतर अभी तक, प्रसवपूर्व विटामिन विशेष रूप से आपके शरीर को देने के लिए तैयार किए जाते हैं जो गर्भावस्था के दौरान इसकी आवश्यकता होती है। अब प्रसवपूर्व शुरू करने से आपको गर्भावस्था के दौरान किसी भी पोषण संबंधी कमियों से बचने में मदद मिलेगी। आपके पास अपने शरीर के लिए क्या काम करता है यह देखने के लिए कुछ ब्रांडों को आज़माने का समय है।

दिन 3: फोलिक एसिड जोड़ें

आपके प्रसव पूर्व विटामिन के अलावा, आपको गर्भावस्था के दौरान न्यूरल ट्यूब दोष को रोकने के लिए एक अतिरिक्त फोलिक एसिड या फोलेट पूरक की आवश्यकता हो सकती है। सुनिश्चित करें कि आप प्रति दिन कम से कम 400 से 800 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड ले रहे हैं। कई ओवर-द-काउंटर प्रीनेटल विटामिन में पहले से ही यह राशि होती है। लेबल की जांच अवश्य करें। एक बार जब आप गर्भवती हो जाती हैं, तो आपका डॉक्टर अधिक मात्रा में प्रीनेटल लिख सकता है।

दिन 4: अच्छा खाओ

स्वस्थ, संतुलित आहार खाने से आपको कई विटामिन और खनिज मिल सकते हैं। कुछ भी संसाधित पर पूरे खाद्य पदार्थों का आनंद लें। यदि आपका बजट अनुमति देता है, तो आप विषाक्त पदार्थों के संपर्क को सीमित करने के लिए अपने आहार में अधिक जैविक फलों और सब्जियों को शामिल करना चाह सकते हैं।

दिन 5: व्यायाम करें

सप्ताह में कम से कम चार से पांच बार अपने शरीर को स्थानांतरित करना गर्भावस्था की तैयारी का एक और शानदार तरीका है। प्रत्येक सप्ताह कुल 150 मिनट के लिए कम से कम 30 मिनट की मध्यम गतिविधि प्राप्त करने का लक्ष्य रखें। सोफे से शुरू? चलने के लिए कुछ हल्का उठाएं जैसे कि आप अपने सामने के दरवाजे के ठीक बाहर कर सकते हैं। एक बार में सिर्फ 10 से 15 मिनट के साथ शुरुआत करें और लंबी अवधि तक अपने तरीके से काम करें।

यदि आप अधिक चुनौती चाहते हैं, तो जॉगिंग, साइकलिंग, या अपहिल हाइकिंग जैसी जोरदार गतिविधियों की कोशिश करें। अधिक व्यायाम से आपको अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। यदि आप पहले से ही अपेक्षाकृत सक्रिय हैं, तो आप प्रत्येक सप्ताह 150 से 300 मिनट के बीच जाने की कोशिश कर सकते हैं।

दिन 6: एक शारीरिक प्राप्त करें

वार्षिक शारीरिक के साथ रखने से स्वास्थ्य समस्याओं को पकड़ने में मदद मिलेगी इससे पहले कि वे गंभीर हो जाएं। जब आप गर्भावस्था के लिए तैयार हो रही हों, तो वे विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। आपका डॉक्टर आपकी जांच करेगा और संभवतः कोलेस्ट्रॉल के स्तर और अधिक की जांच के लिए कुछ रक्त काम करेगा। इस यात्रा में, आप किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को भी सामने ला सकते हैं।

दिन 7: जाँच टीकाकरण

आपकी शारीरिक नियुक्ति भी किसी भी टीकाकरण को पकड़ने का एक बड़ा अवसर है जो व्यपगत हो सकती है (टेटनस, रूबेला, आदि)। टीकाकरण आपको और आपके बच्चे दोनों को स्वस्थ और संरक्षित रखने में मदद कर सकताहै।

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